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टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार का नया प्लान, अब कंपनियों को रखना होगा पाई-पाई का हिसाब

कंपनियों को अब पाई-पाई का हिसाब रखना होगा. दरअसल Tax चोरी रोकने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) ने हाल ही में एक नया नोटिफिकेशन (GSR 205E, नियम 3 (1) कम्पनी लेखा नियम, 2014) जारी किया है, जिसके तहत अब हर कंपनी को अपनी किताबें यानी बुक्स आफ अकाउंट्स लिखने के लिए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में ऑडिट ट्रेल के फीचर की व्यवस्था करनी होगी. इसमें कंपनी के हरेक ट्रांजैक्शन का ऑडिट ट्रेल एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के सिस्टम में कैप्चर करेगा और रिकॉर्ड को सुरक्षित करेगा.

इसके अलावा इस अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर से ऑडिट ट्रेल को बंद न किया जाए, ऐसा प्रावधान रखना होगा और साथ ही मांगे जाने पर ऑडिट ट्रेल उपलब्ध कराया जा सके, इसकी व्यवस्था भी रखनी है. यह भी व्यवस्था करनी होगी कि ऑडिट ट्रेल को मिटाया न जा सके. ऑडिट ट्रेल का यह नोटिफिकेशन सिर्फ कंपनियों पर ही लागू होगा. इसमें एकल व्यवसाई, पार्टनरशिप फर्म और LLP शामिल नहीं हैं. यह प्रावधान 1 अप्रैल 2021 से लागू हुआ है.

क्‍या है ऑडिट ट्रेल (what is Audit Trail)
सीए मनीष कुमार गुप्‍ता के मुताबिक अकाउंटिंग में जब किसी ट्रांजैक्शन में बदलाव किया जाता है मसलन ट्रांजैक्शन को बदलना, पुरानी तारीख में डालना या दूसरे बदलाव का सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को ऑडिट ट्रेल कहते हैं. ऑडिट ट्रेल का मुख्य उद्देश्य कंपनी के ट्रांजैक्शंस में जो भी रद्दोबदल होते हैं इन सब को पकड़ना है. अगर आपने किसी भी अकाउंटिंग एंट्री को बदला है तो उस बदलाव की जानकारी आपके सॉफ्टवेयर के एक नए फीचर्स ऑडिट ट्रेल में मौजूद रहेगी.

पता चल जाएगी कारस्‍तानी
कंपनी के ऑडिटर उस ऑडिट ट्रेल को खोल कर देख सकते हैं और जान लेंगे कि किसी अकाउंटिंग एंट्री को किस दिन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में चढ़ाया गया और किस तारीख को इसको बदला गया. इससे ऑडिटर यह जान सकेंगे कि इन बदलाव के पीछे कंपनी के लेखाकारों की मंशा क्या है. अगर कोई अकाउंटिंग एंट्री कुछ समय से पहले की तारीख में डाली है तो ऑडिटर उसको भी जान सकेंगे और कंपनी के निदेशकों से यह पूछ सकेंगे कि इन ट्रांजैक्शंस को छेड़ा क्‍यों गया. विभिन्न सरकारी विभाग और संस्थान जैसे इनकम टैक्स, GST, सेबी, बैंक, एनसीएलटी यह डेटा मांग सकते हैं. यह डेटा Indian Evidence Act, 1872 के तहत एक सबूत माना जा सकता है, जिससे फाइनेंशियल विवादों में यह ऑडिट ट्रेल का डेटा कानूनी तौर पर एविडेंस के तौर पर रखा जा सकेगा.

नोटिफिकेशन की खास बातें
अब व्यापारी को अपने बहिखाते को समय पर तैयार करते रहने होगा
यह महीनेवार, तिमाही या छमाही तैयार करना होगा. ऐसा न करने पर ऑडिट ट्रेल पर उठे सवालों के जवाब देना मुश्किल होगा.
ऑडिट ट्रेल में ज्यादा बदलाव होने पर इनकम टैक्स विभाग कंपनी के बहिखाते को देखेगा और खास सॉफ्टवेयर की मदद लेगा.
इनकम टैक्स और जीएसटी की चोरी रोकने के लिए संबंधित विभाग आने वाले समय में अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और ऑडिट ट्रेल का बैकअप अपलोड करने को कह सकता है.

क्‍या होगा फायदा
सीए मनीष के मुताबिक अनुमान के आधार पर अगर टैक्स की गड़बड़ियों में उचित रूप से लगाम इस प्रावधान की वजह से लग जाती हैं तो देश के कुल कर संग्रह (Tax Collection) में लगभग 9% से 10% तक बढ़ोतरी हो सकती है. कंपनियों की लेखा बुक में और पारदर्शिता आएगी. बैंकों में लोन लेने के लिए झूठे दस्तावेज, सर्टिफिकेट्स, फाइनेंशियल स्टेटमेंट को सत्यापित करने से CA बचेंगे. यह भी हो सकता है कि बड़े Loan देने से पहले बैंक ऑडिट ट्रेल की स्वतंत्र ऑडिटर/ CA से जांच करा सकते हैं या फिर कंपनी के ऑडिटर/ मुख्य वित्त और लेखा अधिकारी से ऑडिट ट्रेल पर रिपोर्ट मांग सकते हैं. इसका नतीजा यह होगा कि आने वाले समय में बैंकों के NPA के घटने की संभावना बढ़ेगी.

NPA घटेगा
अनुमान के मुताबिक इससे 2 से 3 साल में लोन लेने वालों की सही वित्तीय स्थिति का पता लगने से बैंकों के एनपीए में कमी आने की संभावना है. इसका असर 2-3 साल बाद दिखाई देगा.

इनको होगा फायदा
अकाउंटिंग प्रोफेशनल, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकीलों आदि के लिए एक बड़ा मौका है क्योंकि अब कम्पनियों को अपने बहिखाते की तैयारी समय रहते ही करनी होगी. CA और अकाउंट से जुड़े व्यक्तियों को अधिक प्रोफेशनल मौके मिलेंगे और साथ ही ऑडिट प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी आ गई है. उनको भी अपनी टीम में ज्‍यादा पेशेवरों को रखना होगा और साथ ही ऑडिट ट्रेल की जांच करने वाली टीम को अपने डॉक्यूमेंटेशन को ऑडिट की फाइलों में लगा कर रखना होगा ताकि काम का विवरण दिया जा सके. इसके साथ ही कंपनी की सेवा में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए भी बडी जिम्मेदारी तय होगी.

ऑडिट ट्रेल बतौर सबूत
सरकार कर चोरी के मामलों को जल्‍द निपटाने के लिए ऑडिट ट्रेल का बतौर सबूत इस्तेमाल कर सकती है ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर से इनकम टैक्स के एसेसमेंट तेज हो सकेंगे. सरकार जनता को बताना चाहती है कि कर चोरों को बख्शा नहीं जाएगा. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस प्रावधान से वेतन और फीस में लगभग 20 से 25% की बढ़ोतरी होने की संभावना है. सरकार को अभी इस पर कई और नियम बनाने की जरूरत है कि जैसे अगर सॉफ्टवेयर करप्ट हो जाता है या सर्वर का डेटा उड़ जाता है तो ऐसी परिस्थिति को कैसे देखा जाएगा.

कई सवाल बाकी
सीए मनीष के मुताबिक ऑडिट ट्रेल में जानबूझकर की गई गड़बड़ी मिलने पर लेखा परीक्षक क्या कदम उठाएगा, पर अभी कोई चर्चा नहीं हुई हैं. इस नोटिफिकेशन में अभी इस बात का जिक्र नहीं है. छोटी कंपनियों जैसे 1 से 5 लाख तक के कैपिटल वाली कंपनियों या इसी तरह  20-50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को कोई राहत मिलेगी या नहीं, और ऐसे ही नई बनी  कंपनियों को या MSME कंपनियों को इसमें कोई राहत मिलेगी या नहीं. ये सवाल बाकी हैं.

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