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ट्रेन की सीट के नीचे छिपे थे सिद्धू और सभी सिख क्रिकेटर्स, चेतन चौहान ने दंगाई भीड़ से बचाई थी जान

लखनऊ/चंडीगढ़
क्रिकेट के मैदान से राजनीति में आए चेतन चौहान (Chetan Chauhan) कोरोना संक्रमण की वजह से जिंदगी की जंग हार चुके हैं। अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित भारतीय टीम के पूर्व ओपनर चेतन चौहान की दिलेरी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा है, जिसे कम ही लोग वाकिफ हैं। 1984 के दंगे (1984 Riots) में उन्होंने दंगाइयों की भीड़ से कई सिख क्रिकेटर्स की जिंदगी बचाई थी, जिनमें नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu), राजिंदर घई और योगराज सिंह शामिल थे।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से दो बार सांसद और प्रदेश में कैबिनेट मंत्री रहे चेतन चौहान के इस किस्से को याद करते हुए स्टार क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता तथा पूर्व टेस्ट खिलाड़ी योगराज सिंह ने बताया, ‘मुझे याद है कि भीड़ में से एक आदमी ने चेतन पाजी से कहा था- हम यहां सरदारों को मारने आए हैं। आपको कुछ नहीं होगा। चेतन ने वापस चीखते हुए कहा था कि ये सभी मेरे भाई हैं और कोई इन्हें छू नहीं सकता है।’

दिलीप ट्रॉफी मैच खेल ट्रेन से वापस लौट रहे थे खिलाड़ी
यह घटना ‘झेलम एक्सप्रेस’ ट्रेन में हुई। नॉर्थ और सेंट्रल जोन के खिलाड़ी दिलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल के बाद पुणे से वापस लौट रहे थे। हरियाणा के पूर्व ऑफ स्पिनर सरकार तलवार ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया, ‘मैच 30 अक्टूबर को खत्म हुआ और अगले दिन हमें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बारे में पता चला। टीम मैनेजर प्रेम भाटिया ने झेलम एक्सप्रेस में फर्स्ट क्लास टिकट बुक कराया। वह यात्रा किसी बुरे सपने की तरह से थी। हमें दिल्ली पहुंचने में 4 दिन लगे थे।’

ट्रेन में घुसे दंगाइयों के सामने आए चेतन चौहान
तलवार ने बताया, ‘एक स्टेशन पर अचानक से 40-50 लोगों की भीड़ हमारे कम्पार्टमेंट में घुस गई। वे सिख समुदाय के लोगों को ढूंढ रहे थे। हमारे साथ उस वक्त 3 सिख खिलाड़ी मौजूद थे- नवजोत सिंह सिद्धू, योगराज सिंह और राजिंदर घई। सामने खड़ी भीड़ के साथ चेतन चौहान और यशपाल शर्मा की काफी बहस हुई। भीड़ में शामिल लोगों को जब यह पता चल गया कि वे भारतीय क्रिकेटर्स हैं, तब जाकर वे बाहर उतरे।’

सीट के नीचे, किट के पीछे छिपे सिख खिलाड़ी
इस दौरान सभी प्लेयर्स काफी डर गए। उन्होंने सिद्धू और घई को सीट के नीचे और किट बैग के पीछे छिपा लिया। योगराज सिंह बताते हैं कि उन्होंने तो सिद्धू को बाल काट डालने तक का सुझाव दे डाला। योगराज ने बताया, ‘सबकुछ बहुत डरावना था। वे ट्रेन जला रहे थे और अंदर आकर उनकी चेतन से बहस भी हुई। मैंने सिद्धू से बाल काटने की पेशकश की। लेकिन सिद्धू ने इनकार करते हुए कहा- पाजी, मैं सरदार पैदा हुआ था और मरुंगा भी सरदार ही।’

चेतन ने कहा था- भरोसा करो, कुछ नहीं होगा
ट्रेन के ही दूसरे कम्पार्टमेंट में मौजूद क्रिकेटर गुरशरण सिंह ने भी घटना को याद कर बताया, ‘अगर चेतन चौहान नहीं होते, तो मुझे नहीं लगता कि एक भी सरदार खिलाड़ी बच पाता। मैं और राजिंदर हंस (उत्तर प्रदेश के पूर्व लेफ्ट आर्म स्पिनर) दूसरी बोगी में थे। जब हमें घटना के बारे में पता चला तो काफी डर गए। लेकिन चेतन हमारे पास आए और भरोसा दिलाया कि हम बिल्कुल सुरक्षित रहेंगे और कुछ नहीं होगा।’

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