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ड्रैगन ने लद्दाख में भारतीय सीमा पर तैनात किए ‘सुपर सोल्‍जर’, तस्वीरों ने खोली चीन की पोल

चीन एक ऐसा देश है जो हमेशा पीठ पर छुरा भोंकता है. लद्दाख में चीन के साथ भारत का तनाव पिछले करीब 9 महीने से जारी है. एक समझौते के तहत पैंगोंग इलाके से चीनी और भारतीय सेना वापस हो रही है लेकिन इतिहास गवाह है कि जब-जब चीन ने इस तरह के समझौते किए, तब-तब पीठ पर छुरा भी भोंका है. ऐसे में चीन ने अब ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है. खबर आई है कि चीन ने अब अपने सैनिकों को ‘सुपर सोल्‍जर’ में बदलना शुरू कर दिया है. चीन ने ऐसे सैनिकों के लिए एक आयरनमैन की तरह से ‘एक्सोस्केलेटन सूट’ बनाया है जो उन्‍हें भारी वजन ले जाने में मदद करता है. यही नहीं चीनी ड्रैगन ने ऐसे सूट से लैस चीनी सैनिकों को पूर्वी लद्दाख में तैनात किया है, जहां पर दोनों ही देशों के बीच पिछले कई महीने से तनाव चल रहा है.

चीनी सैनिकों के ‘एक्सोस्केलेटन सूट’ पहनकर गश्‍त लगाने की यह खबर ऐसे समय पर आई है जब पिछले दिनों ड्रैगन पर भारतीय सैनिकों के खिलाफ अपने सबसे घातक माइक्रोवेब वेपन के इस्‍तेमाल का आरोप लगा था. हालांकि भारतीय सेना ने इसका खंडन किया था. रूसी न्‍यूज वेबसाइट आरटी के मुताब‍िक चीन के सरकारी टीवी चैनल चीन सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी) ने अपनी रिपोर्ट में पीएलए सै‍निकों को यह सूट पहनकर गश्‍त लगाने को द‍िखाया है.

सीसीटीवी ने बताया कि इन सैनिकों को नागरी इलाके में तैनात किया है जो लद्दाख से सटा हुआ है. इन सैनिकों ने एक्सोस्केलेटन सूट की मदद से अग्रिम मोर्चे पर तैनात अपने साथी सैनिकों को चीनी नए साल का तोहफा पहुंचाया. यही नहीं चीनी ऑल टेरेन वीइकल समुद्रतल से 16 हजार फुट की ऊंचाई तक पहुंच गया. सीसीटीवी ने यह नहीं बताया कि इस सूट को किसने बनाया है.

चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, एक्सोस्केलेटन सूट की मदद से चीनी सैनिक गश्ती और संतरी ड्यूटी जैसे मिशन में अत्याधिक प्रभावकारी है. जिन सैनिकों को यह सूट सबसे पहले दिया गया है वे दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में में स्थित नागरी में तैनात हैं. बता दें कि इस इलाके में चीन का एक महत्वपूर्ण एयरफोर्स बेस भी है. जो भारत के खिलाफ चीनी आक्रमण का बड़ा केंद्र बन सकता है.

नागरी में तैनात सैनिकों ने इस सूट को पहनना भी शुरू कर दिया है. इसकी मदद से वे उबड़ खाबड़ रास्तों और खराब मौसम में भी भारी सामान ढोने में सक्षम हैं. इससे सैनिकों के कमर या पैर में चोट लगने का जोखिम भी कम होता है. नागरी समुद्रतल से 5000 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित है. ऐसे में वहां के मौसम में भारी सामान के साथ सैनिकों को गश्त करने में परेशानी होती थी.

सीसीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के ही सप्लाई डिलिवरी मिशन के दौरान शिनजियांग मिलिट्री कमांड से जुड़े कई सैनिकों ने इस सूट की सहायता से लगभग 20-20 किलोग्राम का खाना-पानी अपने बैकपैक में ढोया. विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीकी से बैकपैक का वजन सैनिकों के पैरों के बजाय एक्सोस्केलेटन सूट के फ्रेम में स्थानांतरित किया जाता है.

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