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लड़खड़ाते तुर्की के पैरों तले से ज़मीन खींच लिया सऊदी अरब, इस कदम से बर्बादी तय !

तुर्की की हेकड़ी के चलते अब सऊदी अरब ने तुर्की के साथ अपने रिश्तों को 100 प्रतिशत खत्म करने के संकेत दिये हैं। अरब दुनिया के बेताज बादशाह सऊदी अरब की पहल के बाद उम्मीद है कि बाकी के अरब देश भी तुर्की पर एक के बाद एक आर्थिक स्ट्राइक कर सकते हैं। सऊदी अरब के हालिया फैसले के बाद तुर्की के निर्यातकों पर बेहद गहरा असर पड़ा है, जिसके कारण तुर्की की पहले से बेहाल पड़ी अर्थव्यवस्था को और बड़ा झटका लगना तय है।

गल्फ न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, “सऊदी अरब के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ने हाल ही में ट्विटर पर किए गए पोस्ट में तुर्की की हर वस्तु के बहिष्कार की मांग की है, चाहे वह आयात हो, निवेश हो, या फिर पर्यटन ही क्यों न हो, और साथ ही में ये भी कहा कि ऐसा करना हर सऊदी नागरिक का कर्तव्य है। यह मांग शायद इसलिए भी उठी है क्योंकि हाल ही में तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष रेसिप तय्यिप एर्दोगन ने यह आरोप लगाया है कि खाड़ी समूह के कुछ देश तुर्की को निशाना बनाकर उसे बर्बाद करने की साजिश रच रहे हैं।

अब जब सऊदी ने पहल की है, तो अरब जगत का इस अभियान में न शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। आज भी इस्लामिक जगत में सऊदी अरब को निर्विरोध नेता माना जाता है। सऊदी अरब के इसी वर्चस्व को तुर्की ने अपने निर्णयों के जरिये चुनौती दी थी, जो सऊदी अरब को बिलकुल भी स्वीकार नहीं होगा। इसीलिए जब अर्मेनिया-अज़रबैजान विवाद में तुर्की के हस्तक्षेप के कारण यह देश पूरी दुनिया का दुश्मन बन गया है, तो ऐसे में सऊदी अरब ने भी बहती गंगा में हाथ धोते हुए उसके खिलाफ ये बड़े एक्शन लिए हैं।

परंतु तुर्की और सऊदी अरब में यह तनातनी आखिर किस बात को लेकर है? दरअसल 2017 में जब सऊदी अरब और उसके समर्थकों ने क़तर पर प्रतिबंधों का ऐलान किया था, तब एर्दोगन के नेतृत्व में तुर्की ने क़तर की खूब मदद की थी, जिससे सऊदी काफी क्रोधित हुआ था। इसके बाद, चाहे जमाल खशोगजी के गायब होने पर सऊदी को घेरना हो, या फिर मुस्लिम ब्रदरहुड को बढ़ावा देना हो, तुर्की ने सऊदी अरब के इस्लामिक जगत में वर्चस्व को चुनौती देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इतना ही नहीं, तुर्की ने सऊदी अरब के वर्चस्व को खत्म करने के लिए हर प्रकार के आतंकी गतिविधि को भी बढ़ावा देना शुरू किया, जो न सिर्फ सऊदी अरब, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी सरदर्द बनता जा रहा है।

लेकिन सऊदी अरब द्वारा Turkey के सम्पूर्ण बहिष्कार का निर्णय यूं ही नहीं लिया गया, बल्कि इसके लिए बहुत पहले से प्लानिंग की जा रही थी। इसी विषय पर कुछ दिन पहले TFI Post ने एक रिपोर्ट प्रकाशित थी, जिसके एक अंश अनुसार, “सऊदी प्रशासन ने स्थानीय उद्योगों पर दबाव डाला है कि वे तुर्की से कोई भी उत्पाद न खरीदें। Turkey अखबार दूनया के अनुसार सऊदी सरकार ने स्वयं इस निर्णय को अपनी स्वीकृति दी है, और जो भी इस आदेश का उल्लंघन करेगा, उस कंपनी पर भारी जुर्माना लगेगा। परंतु बात यहीं तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब ने अपने नागरिकों को अब से Turkey की ओर यात्रा करने से भी मना किया है, क्योंकि वह भली-भांति जानता है कि Turkey अब पहले जैसा नहीं रहा। इससे पहले भी सऊदी अरब ने अपने नागरिकों के तुर्की जाने पर काफी पाबन्दियाँ लगाई थी, जिसके कारण तुर्की आने वाले सऊदी के पर्यटकों में करीब 17 प्रतिशत की गिरावट पिछले वर्ष दर्ज हुई थी”।

ऐसे में सऊदी अरब द्वारा तुर्की का सम्पूर्ण बहिष्कार अरब जगत के लिए आह्वान है कि वे भी सऊदी अरब के अभियान में शामिल होकर तुर्की को उसकी हेकड़ी के लिए सबक सिखा सके। इस समय Turkey के अर्थव्यवस्था की हालत बहुत खराब है, लेकिन ऐसा लगता है कि सऊदी अरब ठीक वैसे ही Turkey को आर्थिक चोट पहुंचाना चाहता है, जैसे निरंतर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भारत ने पाकिस्तान को आर्थिक चोट पहुंचाई।

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