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दलित महिला का यौन उत्पीड़न किए सपा जिलाध्यक्ष, धर्म परिवर्तन का भी दबाव बनाने का आरोप !

हाथरस कांड को लेकर विपक्षी दल कई तरह के गंभीर आरोप लगाते हुए योगी सरकार को घेर रहे हैं. खास बात ये है कि जब इनके ही शासित राज्यों से रेप की घटनाएं सामने आती है तो उसपर मुंह तक नहीं खोलते और लिपापोती करने लग जाते हैं. यही नहीं बल्कि रेप जैसे संवदेनशील मामले पर विपक्ष किस तरह से धार्मिक और जातिवाद का एंगल निकाल कर सियासत की मंडी में मवादभरी गंदगी फैला रहा है उसे भी आज पूरा देश अच्छे से देख रहा है. क्यों कि यूपी के कई और जिले से भी रेप की क्रूर घटनाएं सामने आई हैं. जहां मुस्लिम समुदाय के लडकों ने इन वारदातों को अंजाम दिया है मगर उस पर इनकी जुबान नहीं खुलती क्यों कि इन्हें पता है कि वोट बैंक खतरे में पड़ जाएगा.

जो पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश सूबे में हो रहे अपराध को लेकर योगी सरकार पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. अब उनके ही नेता दलित महिला के साथ यौन शोषण के आरोप में बुरे फंस गए हैं. लेकिन अब अखिलेश यादव की जुबान नहीं खुल रही है. दरअसल उत्तरप्रदेश के शाहजहाँपुर में समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष तनवीर खान समेत 4 अन्य लोगों को लूटपाट और दलित महिला के यौन शोषण के मामले में मामला दर्ज किया गया है. सपा नेता समेत अन्य पर ये मामला हिंदू युवा वाहिनी के प्रदर्शन के बाद दर्ज किया गया है. संगठन ने पुलिस थाने और एसएसपी दफ्तर के बाहर धरना दिया था.

पीड़िता के भाई के मुताबिक तनवीर खान ने उनकी बहन पर अपने एक 38 साल के रिश्तेदार से जबरन शादी करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. इस मामले को आईपीसी की धारा 354, 379, 504, 506 के अलावा एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में दर्ज किया गया है. इस घटना में आरोपी कफील अहमद, वैशाली सक्सेना, तनवीर खान और दुर्गेश सक्सेना का नाम शामिल है.

दरअसल ये यौन उत्पीड़न का मामला उस समय सामने आया है जब विपक्ष लगातार हाथरस मामले पर राजनीति करने में लगा है. सपा नेता अखिलेश यादव भी अपनी राजनीति साधने के लिए इस पर लगातार बयान दे रहे हैं. योगी सरकार और पुलिस प्रशासन की आलोचना करते हुए ट्वीट कर रहे हैं. उन्होंने हाल में उन सपा कार्यकर्ताओं पर पुलिस की ओऱ से लाठी चार्ज किए जाने पर अपना गुस्सा व्यक्त किया था, जो हाथरस में धारा 144 लागू होने के बावजूद गाँव की ओर आगे बढ़ रहे थे. उन्होंने कुछ दिन पहले हाथरस घटना पर अपना दुख जताते हुए ट्वीट में कहा था कि असंवेदनशील सत्ता से अब कोई उम्मीद नहीं बची है.

यानी कि एक ओर अखिलेश यादव को योगी सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है लेकिन उनके ही पार्टी के नेता घृणित और शर्मनाक घटना को अंजाम दे रहे हैं. क्या उस पर भी संवदेनशील होकर उन्होंने कोई बयान दिया है. या फिर वो असंवेदनशील ही बने रहेंगे. इससे साफ हो जाता है कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर अखिलेश यादव कितने चिंतित हैं. उनका ये दोहरा रवैया देखकर किसी को भी हैरानी होगी कि राजनैतिक जरूरतों के लिए कैसे कोई अपनी नैतिकता से समझौता कर लेता है.

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