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दिल्ली दंगे में शाहरूख ने बेल मांगी तो HC बोला- ‘हीरो बनने चले थे अब झेलो’

24 फरवरी को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के जाफराबाद और मौजपुर इलाके में हुई हिंसा में कई सारी चीजें प्रभावित हुई थी। अभी भी कुछ चीजें हैं जो ठीक नहीं हो पाई है जैसे कि बोर्ड के एग्जाम। फरवरी में हुए इस हादसे को लेकर कई सारे अपडेट आते रहे हैं। अब एक अपडेट और आया है। आपने वायरल वीडियो में दंगे की कुछ लोगों को देखी होगी। इन्हीं में से एक शख्स जो जाफराबाद की सड़कों पर खुलेआम फायरिंग करते हुए नजर आया था और साथ ही साथ पुलिस वाले पर भी बंदूक ताने हुए दिखा था। पुलिस के मुताबिक, उसने आठ राउंड गोली चलाई और एक पुलिसकर्मी पर बंदूक भी तान दी थी। लड़के की पहचान अरविंद नगर में रहने वाले शाहरुख के तौर पर हुई थी। कुछ दिन बाद वह गिरफ्तार हो गया। अभी जेल में है और बेल पाने की कोशिश में है। 24 जून को उसकी ज़मानत याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी। उसको लेकर अब एक बड़ी अपडेट आई है।

जस्टिस सुरेश कुमार इस पूरे मामले की सुनवाई कर रहे थे जिस तरह से उन्होंने कोर्ट में अपनी बात को रखी उसे सुनकर ऐसा लगा कि शायद जस्टिस सुरेश कुमार शाहरुख को राहत देने के मूड में नहीं है। इसके बाद शाहरुख के वकील ने याचिका वापस ले ली। कोर्ट ने कहा,

अगर आप कानून खुद के हाथ में लेते हो और हीरो बनते हो, तो फिर आपको कानून का सामना भी करना होगा। आपका मकसद हीरो बनने का था।

याचिका देते हो शाहरूख की तरफ से यह बयान दिया गया था कि उसके पिता बूढ़े हैं। 76 साल के हैं और उसके अलावा उसके परिवार में पिता की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। शाहरुख के वकील असगर खान का कहना था कि शाहरुख का कोई पिछला क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है और मामले में चार्जशीट भी फाइल हो गई है, इसलिए उसे जांच की ज़रूरत नहीं है। वकील ने याचिका में जामिया की सफ़ूरा ज़रगर को मिली बेल का भी हवाला भी दिया था।

कहा गया कि सफ़ूरा को मानवीय आधार पर ज़मानत दी गई है, इसलिए शाहरुख की ज़मानत भी उस आधार पर कंसिडर की जा सकती है। इसके अलावा शाहरुख के वकील का कहना था कि शाहरुख को आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए उकसाया गया था। क्योंकि उस घटना के अलावा दंगे के किसी और घटना में शाहरुख का कोई हाथ नहीं था।

याचिका का विरोध करते हुए एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित चड्ढा का कहना था पूरे दंगे से जो 2 सीसीटीवी कैमरे की फुटेज बरामद किए गए थे उसमें शाहरुख फायरिंग करते हुए नजर आया था। ऐसे में यह याचिका मैं कहना कि मानवता के आधार पर उसको बेल दे दिया जाए सरासर गलत है। पूरे तर्क़ और बातों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और कहा,

जब वो पिस्टल लहरा रहा था तब उसे अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए था। जब तुम अपराध कर रहे थे, तब हर किसी को भूल गए थे और अब तुम्हें अपने बूढ़े पैरेंट्स की याद आ रही है।

आपको बता दे कि 24 फरवरी को दिल्ली के जफराबाद और मौजपुर में दंगा हुआ था उसमें शाहरुख को फायरिंग करते हुए देखा गया था इसके बाद से उसे दिल्ली पुलिस के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की भी नजर बनी हुई थी। पुलिस ने उसे खोजना शुरू किया। उसकी गिरफ्तारी हुई उत्तर प्रदेश के शामली से 3 मार्च को।

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