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दूरी है जरूरी: BJP नेताओं से मुलाकात नहीं कर रहे नीतीश कुमार, पिछले हफ्ते में 4 ऐसे मौकों पर कन्नी काट गए CM

पटना : भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में जदयू के सात में छह विधायकों को तोड़ कर अपने पाले में जरूर मिला लिया, लेकिन उनका परिणाम नहीं सोचा। अरुणाचल प्रदेश का असर बिहार पर हुआ है। बिहार की राजनीति हिचकोलें खाने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इतने आहत हुए हैं कि भाजपा नेताओं से उन्होंने दूरी बना ली है। नीतीश कुमार अरुणाचल प्रदेश की घटना के बाद भाजपा नेताओं से मिलना नहीं चाह रहे हैं। कई ऐसे मौके आए जब नीतीश कुमार के सामने भाजपा नेता आते, लेकिन नीतीश कुमार वहां नही पहुंचे।

1- अटल बिहारी जयंती में भाजपा-जदयू
भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर को होती है। जितना भाजपा के नेता अटल बिहारी का सम्मान करते है, उतना ही नीतीश कुमार भी करते हैं। यहां तक नीतीश कुमार अटल बिहारी के निधन के तुरंत बाद पटना में उनकी आदम कद प्रतिमा लगवा दी। उनकी जयंती को नीतीश कुमार ने राजकीय समारोह के तौर पर मनाने की घोषणा की। लेकिन नीतीश कुमार इतने ‘आहत’ हुए कि उनको श्रद्धांजलि देने तक नहीं गए। जबकि भाजपा के नेता वहां गए थे। सीएम ने घर में उनकी फोटो के सामने श्रद्धांजलि दे दी।

2- रविशंकर प्रसाद की मां के निधन पर

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की मां विमला प्रसाद का निधन 24 दिसंबर की रात को हुआ। अगली सुबह ये जानकारी सभी को दी गई। विमला प्रसाद रविशंकर प्रसाद की मां से पहले जनसंघ के नेता ठाकुर प्रसाद की पत्नी थी और वो जनसंघ में सक्रीय नेता थी। रविशंकर प्रसाद खुद पटना साहिब के सांसद है। लेकिन नीतीश कुमार उनके घर मिलने तक नही गए। जबकि नीतीश कुमार खुद रविशंकर प्रसाद के वोटर हैं। नीतीश कुमार ऐसे मौकों पर जरुर जाते हैं। यहां तक कि विपक्ष के नेताओं के घर भी जाने से वो नही हिचकते है। लेकिन, 25 दिसंबर को बेली रोड, लोहिया पथचक्र का निरीक्षण करने पहुंचे तो थे, लेकिन महज 1 किलोमीटर दूर रविशंकर प्रसाद के घर नही पहुंचे।

3- कैबिनेट में जरुर गये, लेकिन..

26 दिसंबर को बिहार सरकार की कैबिनेट की बैठक थी। इस कैबिनेट की बैठक में भाजपा और जदयू कोटे के मंत्री पहुंचे थे। लेकिन इस कैबिनेट में महज एक एजेंडा पर मुहर लगाकर बैठक को महज कुछ मिनटों में ही खत्म कर दिया गया। इस कैबिनेट के बाद भाजपा के मंत्री रविशंकर प्रसाद की मां के अंतिम संस्कार में गए। लेकिन नीतीश कुमार बहुत देर तक अपने संवाद के दफ्तर में बैठे रहे, लेकिन घाट पर नही गए।

4- अरुण जेटली की जयंती

26- 27 दिसंबर को नीतीश कुमार अपनी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में व्यस्त रहे। अगले दिन, यानी 28 दिसंबर को भाजपा नेता और उनके मित्र अरुण जे़टली की जयंती थी। नीतीश कुमार ने अरुण जेटली के निधन पर पटना के एक पार्क में उनकी आदम कद प्रतिमा भी लगवाई है और राजकीय समारोह भी होता है। लेकिन, इस जगह भी पटना के डीएम के नेतृत्व में समारोह हुआ , भाजपा के सभी बड़े नेता आए, लेकिन नीतीश कुमार नही आए। जबकि नीतीश कुमार अरुण जेटली की दोस्ती जगजाहिर थी।

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