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देश में क्यों फिर बेकाबू होने लगा कोरोना? जानिए एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं

भारत में कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। 3 अप्रैल को 89,129 नए कोरोना केस सामने आए जो नौ महीने में सबसे अधिक हैं। इससे पहले 19 सितंबर को 92 हजार से ज्यादा केस सामने आए थे। 3 फरवरी से 3 अप्रैल तक एक्टिव केस पांच गुना से अधिक बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी महाराष्ट्र में हुई है, जहां नए केस और एक्टिव केस पुराने रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। दूसरी लहर मुख्य रूप से कुछ राज्यों तक सीमित है, जहां 3 फरवरी के मुकाबले 11-12 गुना तक एक्टिव केस बढ़ चुके हैं।

तीन अप्रैल की बात करें तो देश में पॉजिटिव केस की संख्या 1.23 करोड़ को पार कर चुकी है। इनमें से 1.15 करोड़ रिकवर हो चुके हैं। वहीं, 1.64 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले साल सितंबर में नए केस 97 हजार तक पहुंच गए थे, जो फरवरी में घटकर 9 हजार तक रह गए थे। उसके बाद फिर नंबर बढ़ता गया और लगातार बढ़ ही रहा है। फिर 90 हजार के आसपास नए केस सामने आ रहे हैं। महाराष्ट्र में लॉकडाउन के आसार तेज हो गए हैं। मध्यप्रदेश, पंजाब समेत कई राज्य नाइट कर्फ्यू लगा चुके हैं। इससे भी नए केस सामने आने में कोई कमी नहीं आई है। केरल में चुनाव हो रहे हैं, पर वहां बढ़ते मामलों को देखते हुए भीड़ से जुड़े आयोजनों पर रोक लगा दी गई है।

दूसरी लहर में रफ्तार क्यों?

पब्लिक हेल्थ पॉलिसी और वैक्सीन से जुड़े मामलों के जानकार चंद्रकांत लहारिया के अनुसार हमारे यहां अभी दूसरी लहर चल रही है। अन्य देशों से जो अनुभव सामने आए हैं, उनसे साफ है कि कोविड-19 की दूसरी लहर तेज होती है। हालांकि, उसकी गंभीरता थोड़ी कम हो जाती है। यह एक सहज प्रक्रिया है। जब लोग सावधानी बरतना छोड़ देते हैं तो वायरस का शिकार हो जाते हैं। यह भारत में इस समय देखने को मिल रहा है। वायरस के नए स्ट्रेन भी सामने आए हैं, जो ज्यादा संक्रामक है और ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक महाराष्ट्र में डबल म्यूटेंट वैरिएंट सामने आया था। इसके अलावा 18 राज्यों में वैरिएंट्स ऑफ कंसर्न (VOC) पाए गए हैं। यानी साफ है कि देश में कोरोना के कई वैरिएंट्स हैं, जिनकी संक्रामक क्षमता बढ़ चुकी है। यह भी दूसरी लहर में तेजी का एक बड़ा कारण है।

वहीं, वैल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) की प्रोफेसर और देश की टॉप वैक्सीन एक्सपर्ट डॉ. गगनदीप कंग कहती हैं कि यह कोई नई बात नहीं है। महामारी में लहर आती-जाती रहती है। सारे वायरस ऐसा ही व्यवहार करते हैं। इनफ्लुएंजा का वायरस भी साल में दो बार इंफेक्ट करता है। जहां तक मॉर्टलिटी रेट की बात करें तो कोरोना का रेट 1% से भी कम है। इसके मुकाबले इबोला 60% से ज्यादा, SARS-Cov 10% और मर्स कोरोनावायरस का मॉर्टलिटी रेट 35% तक रहा था। यह वायरस तेजी से फैलता है। इंफेक्शन सबको हो जाता है। इस वजह से नंबर बढ़ जाते हैं।

उनका कहना है कि जब हम सीरोलॉजिकल सर्वे के आंकड़े देखते हैं तो सामने आता है कि हमने एक पॉजिटिव केस पर करीब 30 केस मिस किए हैं। यानी यह लोग असिम्प्टमैटिक थे और पता ही नहीं चला कि इन्हें इंफेक्शन होकर खत्म हो गया।

कितना खतरनाक हो सकता है दूसरा पीक?

अन्य देशों की तुलना करें तो फ्रांस में दूसरी लहर में पहले पीक के मुकाबले 11 गुना ज्यादा केस सामने आए हैं। अगर इसकी तुलना हम अपने देश में करें तो हालात बहुत ही खराब हो सकते हैं। हमारे यहां पहला पीक 97 हजार केस का था, फ्रांस जैसे हाल हुए तो हमारे यहां हर दिन 10 लाख से ज्यादा केस भी सामने आ सकते हैं। यह बहुत ही खतरनाक स्थिति होगी क्योंकि इतने मरीजों का इलाज करने में हमारा सिस्टम सक्षम नहीं है।

यही कारण है कि सरकारों ने वैक्सीनेशन को रफ्तार दे दी है। इससे वायरस का इंफेक्शन रोकने में मदद मिलेगी। और अगर कोई इंफेक्ट हो भी गया तो बीमारी अधिक गंभीर नहीं होगी। अब तक वैक्सीन के रिजल्ट इसी तरह के सामने आए हैं। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर स्टेटिस्टिकल और मैथमेटिकल मॉडल 15 अप्रैल के आसपास दूसरे पीक का अनुमान जता रहे हैं।

नेशनल सुपर मॉडल इनिशिएटिव का हिस्सा रहे आईआईटी कानपुर के मनींद्र अग्रवाल का कहना है कि 15 से 20 अप्रैल के बीच दूसरा पीक आ जाएगा। इस पीक में 80 से 90 हजार केस सामने आएंगे। पर 3 अप्रैल को 89 हजार नए केस सामने आए, इससे यह आंकड़ा और ऊपर जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में प्रकाशित आकलन कहता है कि दूसरी लहर भी 100 दिन के आसपास कायम रहेगी। 15 फरवरी से दूसरी लहर शुरू हुई थी और इसमें 25 लाख केस सामने आ सकते हैं।

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