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बिहार चुनाव की धुरी बन गए तेजस्वी, पीछे रहीं ये बड़ी वजह

नई दिल्ली
बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Elections 2020) समाप्त हो चुका है। मंगलवार को इसके परिणाम (Bihar Polls Result) आ जाएंगे। एक्जिट पोल (Bihar Election Exit Poll) के संकेत सही साबित हुए तो 31 साल की उम्र में तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) राज्य के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं। लेकिन चुनाव परिणाम के इतर अगर पूरे बिहार चुनाव को देखें तो इन 5 वजहों ने तेजस्वी यादव को इस चुनाव में धुरी बना दिया।

1-आर्थिक संकट को मुद्दा बना लोगों की नजर में आए
देश के चुनाव में शायद पहली बार तेजस्वी यादव आर्थिक संकट, खासकर बेरोजगारी को चुनाव के केंद्र में लाने में सफल रहे। उन्होंने 10 लाख सरकारी नौकरी के वादे के अलावा राज्य के आर्थिक संकट को अपने चुनावी अभियान के केंद्र में रखा और इसी पर टिके रहे। इस मुद्दे के अलावा वे बाकी तमाम मसलों को दरकिनार करते रहे। इसका असर यह हुआ कि एनडीए को उन्हें इसका जवाब देने उतरना पड़ा। इस तरह चुनाव में नैरेटिव को अपने हिसाब से तय करने में तेजस्वी यादव सफल हुए। अब तक जो रुझान हैं उस हिसाब से वे इसमें सफल होते भी दिख रहे हैं।

2-खुद को बदलाव के चेहरा के रूप में पेश किया
तेजस्वी यादव ने खुद को इस चुनाव में बदलाव का चेहरा बना दिया। इसके लिए लालू प्रसाद यादव का फोटो तक हटवाया। पहले दिया सामाजिक न्याय अब देंगे आर्थिक न्याय जैसे एक लाइन का होर्डिंग पूरे राज्य में लगवाया। भले एनडीए लालू प्रसाद पर जंगलराज का आरोप लगाकर तेजस्वी यादव को उनसे जोड़ने की कोशिश करती रही लेकिन तेजस्वी अपने अजेंडे को केंद्र में लाने में सफल हुए। उन्होंने राज्य की जनता के बीच खुद को बदले हुए राजनेता के रूप में पेश किया, जिसे पिछली गलतियों को भुलाने से कोई गुरेज नहीं था।

3-धुआंधार चुनाव प्रचार से एनडीए को किया सन्न

तेजस्वी यादव ने चुनाव में अप्रत्याशित रूप से आक्रामक और धुआंधार चुनावी प्रचार किया। उन्होंने चुनाव के दौरान लगभग 250 रैलियां की। एक दिन में 19 रैलियां तक की। कांग्रेस और लेफ्ट जैसी सहयोगी भी तेजस्वी यादव पर निर्भर हुईं। उनकी रैलियों में भारी भीड़ तक आयी। इस चुनावी रैलियों में आ रही भीड़ और वहां के रिस्पांस ने चुनावी टोन को सेट करने में अहम भूमिका निभाई।

4- बिहारी युवा के रूप में जोड़ा
राज्य में खुद को बिहारी युवा और उनके कनेक्ट करने वाले नेताओं के रूप में पेश करने में तेजस्वी सफल हुए। दौड़ते हुए मंच तक पहुंचना, भाषण का अंदाज, बार-बार युवा की बात करना, नीतीश कुमार थक गये हैं, अब युवा हाथ में काम मिले। इन सब बातों से वे लगातार चर्चा में रहे। तेजस्वी के पक्ष में युवा ही सबसे पहले माहौल बनाने में सफल रहे। तमाम एक्जिट पोल में भी यह बात सामने आयी कि तेजस्वी की अगुवाई वाले विपक्ष को युवाओं ने कहीं अधिक वोट किया। युवाओं से उनके जुड़ाव को देखने के बाद नीतीश कुमार और नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भी इसे काउंटर करने के लिए उतरना पड़ा।

5- सोशल इंजीनियरिंग 2.0
इस बार तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती सोशल इंजीनियरिंग को लेकर थी। उन्होंने इसके लिए बहुत मेहनत की। टिकट वितरण से लेकर गठबंधन को आकार देने में बहुत प्रयोग किये। इसे लेकर कई तरह की चर्चा हुई। सभी जातियों को जोड़ने को लिए नया फार्मुला बनाया। तेजस्वी यादव के इस प्रयोग से एनडीए असहज हुई। तेजस्वी यादव का प्रयोग सफल होता गया और मुस्लिम-यादव के इतर दूसरे वोट भी जुड़ते गये। ऐसा देख एनडीए ने उसे रोकने की पूरी कोशिश की। तेजस्वी खुद को ए टू जेड का नेता बनाने में लगे रहे और एनडीए उन्हें महज माय (मुस्लिम-यादव) तक सीमित करने की कोशिश करती रही।

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