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नक्सलियों ने जारी की अगवा जवान की तस्वीर, पांच वर्षीय बेटी का ये VIDEO कर देगा भावुक

छत्तीसगढ़ के सुकमा-बीजापुर में शनिवार 3 अप्रैल को हुई मुठभेड में 22 जवान शहीद हो गए जबकि 4 नक्सलियों को भी मार गिराया गया। वहीं इस मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों ने सेना के जवान राकेश्वर सिंह मनहास को अगवा कर लिया। नक्सलियों ने अब उसकी तस्वीर भी जारी की है।

इससे पहले भाकपा माओवादी के नेताओं की ओर से प्रेस नोट में कहा गया था कि अगवा जवान उनके कब्जे में हैं। नक्सलियों ने इससे पहले सुरक्षाकर्मियों लुटे हथियारों की तस्वीर भी साझा की थी। वहीं अगवा जवान के परिजन उनको लेकर चिंतित हैं। राकेश्वर सिंह मनहास की पांच साल की बेटी ने पिता को रिहा करने की अपील की है। एक वीडियो में उसने कहा, ‘पापा की परी पापा को बहुत मिस कर रही है। मैं अपने पापा से बहुत प्यार करती हूं। प्लीज नक्सल अंकल, मेरे पापा को घर भेज दो।’

छत्तीसगढ़ के एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर दीपांशु काबरा ने जवान की बेटी का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, बीजापुर नक्सल हमले में बंधक बनाए गए जवान की बेटी की आवाज़ सुनकर मन भावुक हो गया। परिवार के दर्द की हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं… उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। आपके पिताजी रक बहादुर योद्धा हैं बिटिया। आप भी उनकी तरह धैर्य और हिम्मत से काम लें..

शोशल मीडिया पर भी अगवा जवान के तस्वीर की चर्चा हो रही है।

इससे पहले नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी कर लिखा था, ‘3 अप्रैल 2021 को बस्तर आईजी सुंदरराज पी के नेतृत्व में सुकमा, बीजापुर जिले के गांवों पर भारी हमला करने के लिए 200 पुलिस बल आ गए। अगस्त 2020 में अमित शाह के नेतृत्व में दिल्ली में एक बैठक में इस सैनिक अभियना की योजना बनी थी। उसके बाद रायपुर केंद्र बनाकर काम करने वाले विजय कुमार के नेतृत्व में अक्टूबर महीने में पांच राज्यों के पुलिस अधिकारियों के सात तेलंगाना-वेंकटीपुरम में इस सैनिक अभियान की जमीनी स्तर पर योजना बनायी गई। बस्तर आईजी सुंदरराज पी को इस सैनिक अभियान का प्रभारी बनाया गया। केंद्र सरकार के इस अभियान की कार्रवाई के लिए विशेष अधिकारी के रूप में अशोक जुनेजा (डीजीपी) को नियुक्त किया गया है।’

इसमें आगे नक्सलियों की ओर से दावा किया गया है कि ‘नवंबर 2020 में शुरु हुए इस सैनिक अभियान में 150 से ऊपर ग्रामीण जनता की हत्या की गई। इसमें हमारी पार्टी के कुछ नेता और कार्यकर्ता लोग भी थे। हजारों को जेल में डाल दिया। महिलाओं पर अत्याचार करके हत्या की है। जनता की संपत्ति को लूट लिया है। एक तरफ इस हत्याकांड को बढ़ाते हुए, दूसरी तरफ पुलिस कैम्प निर्माण, कैम्प अनुसंधान करने वाले सड़क बना रहे हैं। इसी को विकास का नाम देकर झूठा प्रचार कर रहे हैं। जनकल्याण के लिए चल रहे स्कूल और हॉस्पिटल को अभियान में ध्वस्त कर रहे हैं। दूसरी ओर झूठा प्रचार कर रहे हैं कि माओवादी विकास विरोधी हैं। पुलिस कैम्प और सरकार के खिलाफ हजारों की संख्या में बड़े आंदोलन हो रहे हैं। स्कूल और अस्पताल मांग रहे हैं। पुलिस कैम्प को हटाने की मांग कर रहे हैं।’

प्रेस नोट में आगे लिखा है, ‘साम्राज्यवाद अनुकूल और जनविरोदी फासीवादी मोदी का 2000 पुलिस बल 3 अप्रैल की तारीख में एक बड़ा हमला करने के लिए जीरागुड़ेम गांव के पास आया। इसको रोकने के लिए पीएलजीए ने प्रतिहमला किया है। इस वीरतापूर्वक प्रतिहमले में 24 पुलिसवाले मर गए, 31 घायल हुए। एक पुलिसकर्मी बंदी के रुप में हमको मिला और बाकि पुलिस वाले भाग गए। इस घटना से पहले जीरागुड़ेम गांव का माड़वी सुक्काल को पकड़कर उसकी हत्या की और झूठ बोल रहे हैं कि एक माओवादी फायरिंग में मारा गया।’

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