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नरक चतुर्थी पर शनि की साढ़ेसाती-ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए करें ये उपाय, अवश्य होगा फायदा

नरक चतुर्थी दिवाली के एक दिन पहले मनाई जाती है, इसको नरक चौदस और छोटी दीवाली भी कहा जाता है, नरक चतुर्थी के दिन बजरंगबली, यमराज और भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा अर्चना करने का विधान माना गया है, इस वर्ष  13 नवंबर दिन शुक्रवार को नरक चतुर्थी बनाई जाने वाली है, आप इस दिन कुछ सरल से उपाय करके शनि दोषो से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं।

आज हम आपको नरक चतुर्थी पर किये जाने वाले कुछ ऐसे उपायों के बारे में जानकारी देने वाले हैं जिनको अगर आप करते हैं तो इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलेगी, अगर किसी व्यक्ति के ऊपर शनि का बुरा प्रभाव है तो वह दूर हो सकता है।

नरक चतुर्थी पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए करें यह उपाय

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति खराब है तो आप नरक चतुर्थी के दिन किसी शनि मंदिर में जाकर शनि देव का तेल से अभिषेक कीजिए, इस उपाय को करने से शनि से आपको शुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।

अगर किसी व्यक्ति को अपने जीवन में किसी न किसी दुर्घटना का सामना करना पड़ रहा है या फिर आपको अकाल मृत्यु का भय सता रहा है तो ऐसी स्थिति में आप नरक चतुर्थी के दिन यम दीपक जलाकर पीपल के पेड़ के नीचे रखें, इससे अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है।

अगर आप शनि दोषों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो नरक चतुर्थी के दिन काले तिल, काली उड़द और काले वस्त्रों का दान कीजिए, इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

आप नरक चतुर्थी के दिन हनुमान जी के किसी भी मंदिर में जाकर चमेली के तेल का दीपक जलाकर 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें, इसके अलावा अगर आप नरक चतुर्थी के दिन विधि विधान पूर्वक बाल हनुमान जी की पूजा अर्चना करके उनको लाल पुष्प चढ़ाते हैं और शाम के समय बूंदी का प्रसाद अर्पित करते हैं तो इस उपाय से सभी प्रकार के शनि दोष से छुटकारा मिलता है।

अगर आप नरक चतुर्थी के दिन मां काली को काले वस्त्र अर्पित करते हैं तो इससे शनि पीड़ा दूर होती है, नरक चतुर्थी के दिन काली चौदस का पर्व भी मनाया जाता है इसलिए आप इस दिन काली माता के समक्ष शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाकर इनकी पूजा कीजिए, इससे काली मां का आशीर्वाद मिलेगा।

अगर आप नरक चतुर्थी की शाम को देवताओं की पूजा करके दीपदान करते हैं तो इसे शुभ माना गया है, आप इस दिन 4 बत्तियों वाला दीपक पूर्व दिशा में मुख करके घर के मुख्य द्वार पर रखें, अगर आप इस दिन विधि विधान पूर्वक पूजा करते हैं तो सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

अगर किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव चल रहा है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को नरक चतुर्थी के दिन “नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम” मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए, ऐसा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे प्रभाव शीघ्र ही दूर होते हैं, इस उपाय को करने से शनि देवता आप पर प्रसन्न होंगे।

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