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इनसाइड स्टोरी : नीतीश को जब लेना ही था इस्तीफा तो मेवालाल को मंत्री क्यों बनाया ?

पटना
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 125 सीटों पर जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्व में 16 नवबंर को नई सरकार ने शपथ ग्रहण किया। 17 नवबंर को विभागों का बंटवारा किया गया। इसी के साथ विवाद शुरू हो गया। विवाद नीतीश कैबिनेट में शिक्षामंत्री बने मेवालाल चौधरी को लेकर शुरू हुआ। शिक्षा मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी (Dr. Mewalal Chaudhary) पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहते हुए नियुक्ति में भ्रष्टाचार के आरोप हैं। जिसके कारण मेवालाल, विरोधी दलों के निशाने पर आ गए। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से बुधवार को मुलाकात के बाद मेवालाल ने गुरुवार को अपने पद से इस्‍तीफा (Resign) दे दिया है। मेवालाल चौधरी ने बीते सोमवार 16 नवबंर को नीतीश कुमार के साथ ही मंत्री पद की शपथ ली थी। अब सवाल उठ रहा है कि मेवालाल चौधरी पर लगे आरोप पब्लिक डोमैन में थे, ऐसे में नीतीश कुमार ने ऐसा फैसला क्यों लिया जिसे पलटना पड़ा।

मेवालाल चौधरी को कैबिनेट में जगह देने के पीछे एक वजह नया चेहरा माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार इस बार अपनी कैबिनेट में नए चेहरों को जगह देना चाहते थे। उनकी कैबिनेट में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को छोड़कर सभी नए चेहरे थे। इसी के चलते नीतीश कुमार ने मेवालाल चौधरी को कैबिनेट में शामिल करके एक तीर से दो निशाने लगाने की कोशिश की। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने मेवालाल चौधरी को बहुत सोच समझकर कैबिनेट में शामिल किया। मेवालाल चौधरी पर भ्रष्टाचार के जो आरोप लगे हैं वो सभी को मालूम हैं। ऐसे में अगर कैबिनेट में शामिल करने पर कोई विवाद नहीं होता है तो जेडीयू कोटे से मेवालाल कैबिनेट में बने रहेंगे और अगर विवाद होता है तो उन्हें कैबिनेट से बाहर कर दिया जाएगा। जैसा किया भी गया। ताकि जनता के बीच नीतीश कुमार की ‘सुशासन बाबू’ की छवि बनी रहे और संदेश जाए कि नई सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाएगी।

नीतीश कैबिनेट में जेडीयू कोटे से अलग-अलग जाति के मंत्री
जेडीयू कोटे के सभी पांच मंत्री अलग-अलग जाति के हैं, विजय चौधरी- भूमिहार, विजेंद्र यादव- यादव, अशोक चौधरी- पासी, मेवालाल चौधरी-कुशवाहा, शीला मंडल- ईबीसी जाति से हैं। माना जा रहा है कि नीतीश ने मेवालाल चौधरी को कैबिनेट में बिहार में 4.5% कोइरी यानि कुशवाहा वोटर को ध्यान ने रखकर शामिल किया था।

बुधवार को ही नीतीश ने मेवालाल चौधरी को किया था तलब
नीतीश कुमार ने बुधवार को मेवालाल चौधरी को तलब किया था। सीएम आवास पर जाकर मेवालाल ने नीतीश कुमार से मुलाकात की। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने मेवालाल को इस्तीफा देने को कहा था। जिसके बाद गुरुवार को मेवालाल ने 12:30 बजे अपना कार्यभार संभाला और 2 बजे तक इस्तीफा भी दे दिया। राज्यपाल फागू चौहान ने मेवालाल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। प्रदेश सरकार की कैबिनेट में मंत्री अशोक चौधरी को फिलहाल शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। पहले भी अशोक चौधरी शिक्षा विभाग संभाल चुके हैं।

मेवालाल ने आरोपों का दिया जवाब
मेवालाल चौधरी इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हैं। मेवालाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कोई भी केस तब साबित होता है जब आपके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल हुई हो या कोर्ट ने कुछ फैसला दिया हो।

मेवालाल चौधरी पर क्या हैं आरोप?
जेडीयू कोटे से मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने वाले मेवालाल चौधरी पर सहायक प्राध्यापक और जूनियर वैज्ञानिकों की नियुक्ति में अनियमितता बरतने के आरोप हैं। मेवालाल चौधरी, विधायक बनने से पहले सबौर (भागलपुर) स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के साल 2010-2015 तक वाइस चांसलर रहे। कुलपति रहते कृषि विश्वविद्यालय में साल 2012 में सहायक प्राध्यापक और जूनियर वैज्ञानिकों की बहाली हुई थी। बताया जाता है कि उस नियुक्ति में धांधली की गई थी। कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति घोटाले का मामला सबौर थाने में 2017 में दर्ज किया गया था। हालांकि इस मामले में उन्होंने कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी और अभी तक कोर्ट में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।

मंत्री की पत्नी की मौत का मामला भी तूल पकड़ रहा

मेवालाल चौधरी की पत्नी नीता चौधरी के मौत की भी एक बार फिर से जांच कि मांग होने लगी है। सोशल मीडिया पर पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास की कथित रूप से लिखी हुई चिट्ठी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनके द्वारा डीजीपी से मेवालाल चौधरी की पत्नी की मौत मामले में भी उनसे पूछताछ की मांग की गई है। मेवालाल की पत्नी स्वर्गीय नीता चौधरी 2010 से 2015 तक तारापुर से विधायक रही थी। वह राजनीति में काफी सक्रिय थीं। 2019 में रसोई गैस सिलिंडर में आग लगने से वह झुलस गई थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

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