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पटवारी बनना चाहता था शुभम, नहीं बन सका तो फर्जी कलेक्ट्रेट खोलकर बैठ गया

इंदौर : बंसी ट्रेड सेंटर में दूसरी मंजिल स्थित एक एमपी ऑन लाइन कियोस्क सेंटर में निगम-प्रशासन ने छापा मारा। ये लोग नगर निगम, जिला प्रशासन व नगर और ग्राम निवेश विभाग में होने वाले कार्यों की दलाली में लिप्त थे। शुभम नामक कियोस्क संचालक के यहां से टीम को भारी मात्रा में सरकारी दस्तावेज मिले हैं। यहां से सरकारी विभागों के आदेश के साथ ही सरकारी विभागों की अनापत्ति भी सिस्टम पर टाइप की हुई मिली है।

सीमांकन के 10 हजार, नामांतरण एनओसी के 50 हजार

दलालों ने हर काम के रेट तय कर रखे थे। सीमांकन, बंटाकन, नजूल की एनओसी का आवेदन जमीन मालिक की ओर से लगाने के लिए 10 हजार रुपए लिए जाते थे। एक हेक्टेयर से कम जमीन हो तो अनापत्ति दिलाने, नामांतरण, बंटाकन करवाने के 50 हजार रुपए लेते थे। अधिकारियों को पैसा देने के नाम पर जमीन मालिकों से यह मांग की जाती थी। इसी तरह नगर निगम और टीएंडसीपी से नक्शे पास कराने के एवज में रेट बना रखे हैं।

निगम से एक हजार स्क्वेयर फीट का नक्शा पास कराने के लिए 50 तो दो हेक्टेयर से ज्यादा की टाउनशिप मंजूर कराने के तीन लाख भी लेते थे। इधर, आईडीए सीईओ ने दलालों के आवेदन लेने वाले दो कर्मचारियों नेहा यादव और सुपरवाइजर लक्ष्मीनारायण गावड़े को सस्पेंड कर दिया है। विभागीय अफसरों के प्रभार भी बदले जा रहे हैं। राजकुमार हलदर की जगह सुनील माहेश्वरी संपदा अधिकारी होंगे।

एडीएम अजयदेव शर्मा ने बताया कि कलेक्टर मनीष सिंह को शिकायत मिली थी कि बंसी ट्रेड सेंटर के दूसरी मंजिल पर एमपी ऑनलाइन की आड़ में फर्जी दस्तावेज बनाने और शासकीय दस्तावेजों की हेराफेरी का गोरखधंधा चल रहा है। इस पर कलेक्टर के आदेश पर एडीएम शर्मा के नेतृत्व में छह लोगों की टीम ने यहां पर शाम को दबिश दी। संचालक शुभम के अड्डे पर जमीन संबंधित विभागों की फाइलों का जखीरा मिला। जानकारी अनुसार शुभम कलेक्टर कार्यालय पर दलाली का काम करता था। प्रशासन यहां से जब्त दस्तावेज की जांच करने की बात कर रही है, जिसमें कई जमीन संबंधित मामले और शासकीय दस्तावेज मिलने की संभावना है।

दखल इतना कि अफसर ने क्राइम ब्रांच को की शिकायत

टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक एसके मुदगल ने भी दलालों की धरपकड़ के लिए क्राइम ब्रांच को पत्र लिखा था। उन्होंने शिकायत में कहा था कि दफ्तर खुलने से लेकर बंद होने तक दलाल सक्रिय रहते हैं। स्टाफ नहीं हो तो अलमारी, टेबल में फाइलें तक चेक कर लेते हैं। कुछ लोग विधायक, पार्षद का नाम लेकर स्टाफ को धमकाते हैं।

आईडीए सीईओ विवेक श्रोत्रिय ने कुछ दिन पहले कलेक्टर को शिकायत कर कहा था कि यहां लगने वाले ज्यादातर आवेदनों में अंजुम खान नामक व्यक्ति का नाम रहता है, जबकि प्रकरण के संबंध में आवेदक को कोई जानकारी नहीं होती। पत्राचार करने पर ये ही संपर्क करता है। उन्होंने कलेक्टर को ऐसे दर्जनों नाम दिए और आशंका जताई कि ये लोग दलाली कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने बताया था कि शुभम दलाली में लिप्त है। उसने इस काम के लिए कुछ लड़के भी रख रखे हैं। उसके दफ्तर पर कई विभागों की नोटशीट, अनापत्ति प्रमाण पत्र सहित कई सरकार दस्तावेज मिल जाएंगे। इनमें से कई दस्तावेज तो वह अपने दफ्तर में ही तैयार कर लेता है। टीम ने यहां पर दबिश, तो टेबल से लेकर अलमारी तक में फाइलें रखी थीं। कम्प्यूटर खंगाला, तो नोटशीट सहित कई प्रकार के आदेश टाइप किए हुए मिले। इतना ही नहीं, कई सील भी इसके पास मौजूद थीं।

लंबे समय से चल रहा था गोरखधंधा

प्रारंभिक जानकारी में पता चला कि यह धंधा वह लंबे समय से कर रहा था। उसने कई जगह पर अपनी ऑफिस बदली। बंसी ट्रेड सेंटर पर उसने एमपी ऑनलाइन के जरिए यह काम शुरू किया। एमपी ऑनलाइन के काम तो वह महीने में एक-दो ही करता था। बाकी समय वह इसी में लगा रहता था। शुभम लोक निर्माण, जल संसाधन, सहकारिता विभाग सहित कई सरकारी दफ्तरों से अनापत्ति लाने का काम किया करता था।

बड़ा सवाल : ऑनलाइन सिस्टम, फिर इन्हें कैसे मिलते थे आदेश

प्रशासन को छापे में काफी दस्तावेज बंटाकन, सीमांकन के भी मिले हैं। यह दस्तावेज तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक व पटवारी से सबंधित हैं। प्रशासन ने डायवर्शन, नजूल, सीमांकन, बंटाकन के आदेश देने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की है। सीधे आदेश को किसी को नहीं मिलता। प्रशासन के सिस्टम से आवेदन क्रमांक हासिल कर इन लोगों ने आदेश कैसे निकाल लिए, इसकी जांच की जा रही है।

छापे की भनक लगने पर ताला लगा भागा बनवारी

उधर, प्रशासन की टीम अन्नपूर्णा नगर स्थित हर्षदीप अपार्टमेंट में दलाल बनवारी के ऑफिस पहुंची तो वहां ताला लगा मिला। उसे शुभम के यहां कार्रवाई की जानकारी मिल गई थी इसलिए फाइल, कम्प्यूटर व सील हटा दी।

एसडीएम सुनील झा की टीम ने उसे फोन कर बुलाया और जांच की। जांच में पता चला कि बनवारी स्कूल-कॉलेज सहित किसी भी निर्माण मंजूरी का काम लेता था। कई इमारतों के नक्शे पास करवाए। टीएंडसीपी में सबसे ज्यादा सक्रिय था। बनवारी टीएंडसीपी और नगर निगम के नक्शे समय सीमा में पास करवाने का दावा करता था। कई राजस्व निरीक्षक, पटवारी उसके दफ्तरमें आते-जाते थे।

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