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पाकिस्तान के एक तरफ कुआं तो दूजी ओर खाई, हां किए तो कट्टरपंथी और न बोले तो खाड़ी देश ला देंगे तबाही!

पाकिस्तान विश्व के सभी बड़े देशों के सामने हाथ फैला चुका है फिर भी उसकी अकड़ नहीं जाती। खाड़ी के सभी इस्लामिक देश इजरायल के साथ अपने सम्बन्धों को सुधारने की कवायद शुरू कर चुके हैं लेकिन इमरान खान अभी भी अड़े हुए नजर आ रहे हैं, और यह न तो पाकिस्तान के लिए अच्छी खबर है और न ही इमरान खान के लिए। इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के लिए पाकिस्तान पर अमेरिका सहित कई अन्य देश दबाव बना रहे हैं और इसका खुलासा स्वयं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने किया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि उनकी सरकार इजरायल को मान्यता देने के लिए दबाव में है, लेकिन इस्लामाबाद कभी भी “जयोनीस्ट देश” के साथ संबंध स्थापित नहीं करेगा। अगर पाकिस्तान इसी अड़ियल व्यवहार पर जमा रहा तो उसे दिवालिया होने से कोई नहीं बचा सकता है। एक तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कर्ज पर चलते हुए भी दिन-प्रतिदिन गर्त में जा रही है तो दूसरी ओर सऊदी अरब और UAE जैसे देश पाकिस्तान को अपना दिया कर्ज भी वापिस मांगने लगे हैं।

दरअसल, इमरान खान ने एक निजी टेलीविजन के साथ एक साक्षात्कार के दौरान यह खुलासा किया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन सहित अरब देशों द्वारा इजरायल को मान्यता देने के बाद, इस्लामाबाद को भी इजरायल को मान्यता देने के लिए कहा जा रहा है, जिसे उनकी सरकार ने अभी खारिज कर दिया है। यही नहीं इमरान खान ने यह भी बताया कि दबाव बनाने वाले देशों से अमरीका भी एक है। उन्होंने कहा “इजरायल का अमेरिका में एक मजबूत प्रभाव है। यह प्रभाव वास्तव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान कई गुना अधिक था।”

उन्होंने कहा, “मैं इजरायल को मान्यता देने के बारे में तब तक कोई विचार नहीं करूंगा जब तक कि वह फिलिस्तीन मुद्दे पर किसी सेट्टेलमेंट के लिए राज़ी नहीं होता जो कि, फिलिस्तीन को भी संतुष्ट करता हो”।

जब उनसे उन देशों के नाम पूछे गए, जिन्होंने इस्लामाबाद पर इजरायल को मान्यता देने के लिए दबाव बनाया है, तो इमरान खान ने कहा कि वो नाम नहीं बता सकते क्योंकि उन देशों के साथ पाकिस्तान के अच्छे संबंध हैं। हालांकि, यह समझना मुश्किल नहीं है कि किन देशों ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया होगा क्योंकि हाल में सऊदी अरब UAE और बहरीन ने ही इजरायल से सपने सम्बन्धों को मान्यता दी है।

यूएई और बहरीन द्वारा इज़रायल की हालिया मान्यता के परिणाम स्वरूप तेल अवीव के साथ राजनयिक आर्थिक संबंध बन गए हैं, जबकि कई अन्य अरब देश भी इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने पर विचार कर रहे हैं।

पाकिस्तान एक आर्थिक रूप से निर्भर देश होने के नाते, इज़रायल की मान्यता और आर्थिक संबंधों की स्थापना के लिए एक बड़ा समर्थक बन सकता है। अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब से अक्टूबर 2018 में तीन साल के लिए $ 6.2 बिलियन की सहायता ली थी जिसमें नकद सहायता में $ 3 बिलियन और आस्थगित भुगतान पर 3.2 अरब डॉलर की वार्षिक तेल और गैस की आपूर्ति शामिल थी।

पाकिस्तान ने साल 2019 में UAE से 2 बिलियन डॉलर नकद तथा कतर से 3 बिलियन डॉलर का लोन लिया था। परंतु जैसे पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को केंद्र में रख कर सऊदी से पंगा लेने की कोशिश की थी, वैसे ही सऊदी अरब ने तुरंत पाकिस्तान से अपना कर्ज वापस मांगना शुरू कर दिया था। यही नहीं सऊदी अरब ने अब पाकिस्तान को उधार में तेल न देने का फैसला भी लिया है। यानि देखा जाए तो पाकिस्तान खाड़ी देशों पर अधिक निर्भर है। जब भी पाकिस्तान को आवश्यकता पड़ती है तब वह, हर बार अपना भीख का कटोरा लेकर खाड़ी देशों के पास पहुंच जाता है। अगर किसी अरब देश ने एक कदम भी पाकिस्तान के खिलाफ उठाया तो पाकिस्तान में खलबली मच जाएगी और इमरान खान को अपने हाथ से प्रधानमंत्री का पद गंवाना पड़ सकता है। ऐसे में अगर इमरान खान इजरायल को मान्यता दे देते हैं तो पाकिस्तान में उनकी लोकप्रियता शून्य से माइनस में चली जाएगी। यानि दोनों तरफ से इमरान खान के लिए ही मुश्किलें पैदा होने वाली है।

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