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पाक की दोगली चाल : चीन से ऐंठने हैं ज़्यादा पैसे और FATF की ब्लैक लिस्ट से भी बचने की जुगाड़, क्या होगा कामयाब ?

जब चीन ने पाकिस्तान के साथ अपने सम्बन्धों को बढ़ाना शुरू किया था तब उसे लगा था कि वह पाकिस्तान के साथ मिलकर अपने प्रतिद्वंदी भारत को घेर लेगा और उपमहाद्वीप क्षेत्र में अपनी नापाक योजनाओं को अंजाम दे पाएगा। हालांकि, चीन और शी जिनपिंग यह भूल गए थे, कि आखिर में पाकिस्तान एक कट्टरपंथियों का देश है, जो इमरान खान जैसे अक्षम नेता द्वारा सेना और ISI के इशारे पर चलता है। अब ऐसा लग रहा है, चीन ने पाकिस्तान की दुखती रग पर हाथ रख दिया है और अब इसके बदले पाकिस्तान के कट्टरपंथी चीनी और उसके युआन का पूरा फायदा उठाना चाह रहे हैं।

मीडिया  ने अपनी रिपोर्ट कर यह बताया था कि पाकिस्तान के दूरसंचार प्राधिकरण यानि PTA ने शुक्रवार को टिक-टॉक को ब्लॉक कर दिया और इसके पीछे कारण बताया कि यह चीनी ऐप सरकार के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा है।

हालांकि, PTA ने यह भी कहा कि उन्हें वीडियो शेयर करने वालों के कई आवेदन मिले जिसमें इस ऐप पर अनैतिक और अश्लील सामग्री की शिकायतें की गयी थी जिसके बाद उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

जब कोरोना अपने सबसे बुरे दौर में था तथा उस दौरान मक्का भी बंद हो चुका था तब पाकिस्तान के कट्टरपंथियों ने सरकार को मस्जिदों को खुला रखने के लिए मजबूर कर दिया था। इसलिए, यह मानना ​​मुश्किल नहीं होगा कि उन्होंने इमरान खान पर चीनी ऐप को इस्लाम धर्म के खिलाफ होने का बहाना देकर दबाव बनाया होगा जिसकी मांगों के आगे उन्हें घुटने टेकने पड़े।

ऐप पर प्रतिबंध लगाने के बाद पाकिस्तान के चीनी आकाओं को झटका अवश्य लगा होगा। जैसा कि पहले मीडिया ने कहा था कि इस्लामाबाद अब अपने मूल लाभकर्ता सऊदी अरब से दूरी बनाने के बाद बीजिंग से ताजा ऋण प्राप्त करने के लिए टिकटोक पर प्रतिबंध लगा कर लाभ उठाने की कोशिश करेगा।

वर्तमान में देखा जाए तो पाकिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य भी बदला हुआ है, विपक्ष इमरान खान नियाज़ी सरकार पर भारी दबाव डाल रहा है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर पाकिस्तान सेना और उसके समर्थक इमरान खान को निशाने पर लिया। ऐसा लग रहा है कि पूर्व पीएम शरीफ ने इमरान खान को उनके घुटनों पर लाने का रास्ता खोज लिया है। 11 दलों के विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व फज़ल-उर-रहमान कर रहे हैं, जो एक फायरब्रांड इस्लामवादी मौलवी राजनीतिज्ञ थे, यानि कट्टर इस्लाम को मानने वाला और हो सकता है कि टिक-टॉक पर प्रतिबंध लगाने का दबाव बनाने में उसकी भूमिका रही हो।

सिर्फ यही एक मामला नहीं है जिस पर पाकिस्तान ने चीन के उलट काम किया हो। सिर्फ लाभ देखकर संबंध बनाने वाले इन दोनों देशों के बीच बलोच लिबरेशन आर्मी को लेकर भी विवाद है। पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) है – जो बलूचिस्तान को अपने कब्जे से मुक्त कराने के लिए संघर्ष में लगी हुई है। बंदरगाह शहर ग्वादर सहित बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय, बीएलए न केवल पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रही, बल्कि CPEC के इस क्षेत्र में चीनी निवेश को नुकसान पहुंचा रही है।

ऐसा लगता है कि चीन ने पाकिस्तान से दोस्ती कर किसी लैंडमाइन पर कदम रख दिया है और जिस क्षण भी वह पीछे हटेगा, पाकिस्तान चीन को अपना असली आतंकी-प्रायोजित पक्ष दिखा देगा।

अब तक, इमरान खान ने चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के अनैतिक व्यवहार के खिलाफ आवाज को धीमे कर रखा है। अगर चीन अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश करता है, तो कट्टरपंथियों का गुस्सा उइगर मुस्लिमों के पक्ष में निकल सकता है।

मीडिया ने पहले ही बताया था कि कि कैसे चीन ने बीएलए को इस्लामिक आतंकी संगठन घोषित करने लिए यूएनएससी 1267 प्रतिबंध समिति के तहत प्रस्ताव लाने के लिए इस्लामाबाद को एक अल्टीमेटम जारी किया था।

अब ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने चीन के लिए मुश्किलें खड़ी करनी शुरू कर दी है, और दोनों देशों के रिश्ते के बीच दरार पड़ चुकी है। इस्लामिस्टों और आतंकवादियों का यह देश अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है जहां वो केवल चीन से फायदा लेना चाहता है, और यदि कम्युनिस्ट देश ऐसा करने से इनकार करते हैं, वह उस पर भी अपने आतंकवादियों की फौज भेजना शुरू कर देगा। पाकिस्तान अन्य देशों कि तरह नहीं है जहां कि अर्थव्यवस्था को अपने ऊपर निर्भर बनाने के बाद उसे अपने जाल में फंसाया जा सके। यह देश अपने वजूद को ढूंढ रहे उन इस्लामिस्टों का है जो कभी अपने आप को तुर्की के करीब बताता है तो कभी अरब। पाकिस्तानी कट्टरपंथियों को अपने सुसाइड वेस्ट को उड़ाने में एक सेकंड की भी हिचकिचाहट नहीं होगी और वह चीन के कम्युनिस्टों को उड़ा देंगे। इसलिए शी जिनपिंग को पाकिस्तान जैसे देश को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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