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पूरा होगा 1000 साल पहले का ख्वाब, शिवमंदिर का निर्माण शुरु कराए राजा भोज, पूरा कराएगी मोदी सरकार

देश में आज एक ऐसी सरकार है जो मुगल आक्रांताओं की ओर से हिंदू संस्कृति पर किए गए हमलों के खिलाफ न्याय के लिए लड़ रही है. और उस संस्कृति को फिर से सहेजने में लगी हुई है. जिसको आक्राताओं ने नष्ट कर दिया या फिर भारी नुकसान पहुंचाया. देश के अंदर ऐसे कई प्रसिद्ध मंदिर थे जिन पर कई बार मुगल आक्रांताओं ने हमला किया उन्हें तोड़कर मस्जिदें बना दी. लेकिन अब उनको फिर से न्याय दिलाने की मुहिम जारी है.

दरअसल मध्य प्रदेश के रायसेन में बेतवा नदी के किनारे भोजपुर गाँव में स्थित शिव मंदिर का पुराना वैभव फिर से लौट कर आने वाला है क्योंकि मोदी सरकार ने इसके बचे हुए निर्माण-कार्य को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. राजा भोज ने इस्लामी आक्रांता महमूद गजनवी से बदला लेने के बाद इस मंदिर का निर्माण कराया था. भोपाल से भोजपुर की दूरी 32 किलोमीटर है. इस मंदिर को उत्तर का सोमनाथ कहा जाता है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की देखरेख में अब इस मंदिर को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है. इस शिवालय को भोजपुर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जिसे लोग ‘उत्तर का सोमनाथ’ कहते हैं. इसे लाल पत्थरों से तराशा गया है. 21.5 फीट ऊँचा और 17.8 फीट परिधि वाला ये शिवलिंग सबसे विशाल है. चबूतरे पर स्थित शिवलिंग के पास पुजारी भी सीढ़ी लगा कर जाते हैं.

इसका 66 फ़ीट ऊँचा प्रवेशद्वार सभी मंदिरों में सबसे ऊँचा माना जाता है. ऊँचे स्तम्भों पर खड़े इस मंदिर की दीवारों पर काफी अच्छी चित्रकारी की गई है. बताया गया है कि इसका शिखर कई प्रयासों के बावजूद पूरा नहीं हो सका क्योंकि शिखर इतना भारी हो जाता कि मंदिर उसका भार नहीं सह पाता. भवन से शिखर के भारी होने की सम्भावना के कारण ही इसका निर्माण-कार्य रुका रह गया था, जो अब पूरा होगा.

भोजपुर मंदिर

दरअसल धार के महान परमार राजा भोज ने जब सोमनाथ मंदिर में विदेशी लुटेरे महमूद गजनवी की ओर से तोड़फोड़ की घटना के बारे में सुना तो उन्होंने गुस्सा होकर उस पर हमला बोल दिया. भगवान शिव के अपमान से क्रोधित राजा भोज के हमले के बाद महमूद गजनवी तो रेगिस्तान में भाग खड़ा हुआ लेकिन उसके बेटे सालार मसूद को मौत के घाट उतार दिया गया. सोमनाथ का बदला लेने के बाद राजा भोज ने इस मंदिर का निर्माण करवाया. अब मंदिर के बचे हुए निर्माण-कार्य को पूरा कराने के लिए मोदी सरकार ने ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही हजार साल बाद राजा भोज की प्रतिज्ञा भी पूरी होने जा रही है.

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