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पैंगोंग झील से पीछे नहीं हटेगी चीनी सेना, अब इन पर चलाना ही होगा जूता!

पेइचिंग
चीन के सरकारी भोंपू ग्‍लोबल टाइम्‍स ने पैंगोंग झील के फिंगर 4 से पीछे हटने की खबर का खंडन किया है। चीनी अखबार ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में अग्रिम मोर्चों से भारत और चीन के सैनिकों, टैंकों, तोपों और हथियारों से लैस वाहनों को वापस लेने पर कोई सहमति नहीं बनी है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि भारतीय मीडिया में आई इस तरह की खबरें गलत हैं। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने कहा कि यह दोनों पक्षों के उनके स्‍थापित लक्ष्‍यों तक पहुंचने में सहायक नहीं है।

इससे पहले आई खबरों में कहा गया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद बनी आपसी सहमति के अनुसार अब पीएलए अपने सैनिकों को फिंगर 8 से पूरब की तरफ धकेलेगा जबकि भारतीय सैनिक पश्चिम की तरफ फिंगर 2 और फिंगर 3 के बीच धन सिंह थापा पोस्ट की तरफ पीछे आएंगे। यह काम चरण-दर-चरण पूरा होगा। फिंगर 3 से फिंगर 8 तक का इलाका बफर जोन की तरह से होगा जिस पर कोई गश्‍त नहीं करेगा।

घरेलू राष्‍ट्रवाद को संतुष्‍ट करने के लिए झूठी सूचनाएं दे रहा मीडिया

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने सूत्रों के हवाले कहा कि आठवें दौर की वार्ता के बाद अच्‍छी प्रगति हुई है लेकिन भारतीय मीडिया में आई पीछे हटने की खबर गलत है। चीनी अखबार ने आरोप लगाया कि भारतीय मीडिया घरेलू राष्‍ट्रवाद को संतुष्‍ट करने के लिए झूठी सूचनाएं दे रहा है। पिछली वार्ता में इस बात पर बातचीत हुई थी कि दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील से किस तरह से पीछे हटेंगी। चीनी अखबार ने आरोप लगाया कि भारत एलएसी को लेकर ‘गैरवास्‍तविक’ विचार रखता है और एकतरफा तरीके से यह मानता है कि फिंगर 4 से लेकर 8 तक उसका पैट्रोलिंग एरिया है।

चीनी विशेषज्ञ किआन फेंग ने कहा कि भारतीय मीडिया ने पीछे हटने की जो बात कही है, वह पिछली बातचीत के निष्‍कर्षों की खुद से की गई व्‍याख्‍या है। उन्‍होंने कहा कि यह अंतिम योजना नहीं है। उन्‍होंने कहा कि हिंदुओं के त्‍योहार दीपावली को देखते हुए इस सूचना के जरिए भारत चीन पर दबाव बनाना चाहता है और अपने लोगों को दबाव से मुक्‍त करना चाहता है। फेंग ने दावा किया कि ठंड की वजह से भारतीय सेना को सप्‍लाइ लाइन बनाए रखने में काफी मुसीबत हो रही है।

देसपांग एरिया पर अलग से होगी बातचीत
इससे पहले आई खबर में कहा गया था कि देसपांग के मैदानी इलाके पर अलग से बातचीत होगी। यहां चीनी सैनिक भारतीय सैनिकों को उनके परंपरागत पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंचने में पिछले छह महीने से अड़ंगा डाल रहे हैं। एक सूत्र ने बताया, देसपांग की समस्या पुरानी है। पहली प्राथमिकता पेंगोंग झील-चुसुल एरिया में गतिरोध खत्म करने की है। इसे खत्म करने की समयबद्ध प्रक्रिया इसी महीने शुरू हो सकती है, बशर्ते इसकी रूपरेखा तय हो जाए। इसके लिए हर दिन हॉटलाइन के जरिए बातचीत हो रही है। वहीं, कॉर्प्स कमांडर लेवल की बातचीत का अगला दौर भी होना है।

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