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पोस्ट छीन लिया भारत तो भड़के चीन की धमकी- ‘1962 से भी ज्यादा घातक हमला होगा’

दुनिया में ड्रैगन की सेना की धज्जियां उड़ रही हैं. लद्दाख में चीन अब बुरी तरह से घिर गया है. भारतीय सेना के पराक्रम के आगे चीन की सभी साजिशें नाकाम हो रही हैं. 14 जून को लद्दाख में हुए संघर्ष के बाद अब पैंगोंग झील इलाके में भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों खदेड़ा दिया है. मामला 29-30 अगस्त की रात का है. पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सैनिक घुसपैठ के लिए पूरे लाव लश्कर के साथ पहुंचे थे. ड्रैगन की आर्मी के 500 से अधिक सैनिक टैंकों के साथ भारतीय सीमा में घुसपैठ करने पहुंचे थे लेकिन उनकी ये कोशिश नाकाम साबित हुई. भारतीय जाबांजों ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि चीनी सेना की टुकड़ी दुम दबाकर भाग खड़ी हुई. चीनी साजिश को नाकाम करने के साथ ही भारत के जवानों ने चीन के वाली ब्लैक टॉप पोस्ट पर कब्जा कर लिया है. इतनी ही नहीं भारतीय सेना ने इस पोस्ट पर मौजूद चीनी सेना के कैमरे और सर्विलांस उपकरणों को भी उखाड़ फेंका है.

भारत की इस कार्रवाई से चीन बौखला गया है और भारत के खिलाफ हमले की गीदड़ भभकी दी है. वामपंथी देश चीन में मीडिया कुछ और नहीं बल्कि सरकार का मुखपत्र होता है. यहां जो भी अखबार या टेलीविजन में प्रसारण होता है उसका मतलब चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की सहमति होती है. चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू शिन ने चीनी पोस्ट पर भारतीय कब्जा होने के बाद ट्वीट कर युद्ध की धमकी दी है.

इसके अलावा ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में लिखा है कि ध्यान दिया जाना चाहिए कि नई दिल्ली शक्तिशाली चीन का सामना कर रहा है. पीएलए (चीनी सेना) के पास उसके देश के हर इंच की सुरक्षा करने के लिए पर्याप्त बल है. चीनी लोगों ने अपने सरकार को समर्थन दिया है, जो भारत को भड़काने की कोशिश नहीं कर रहा, लेकिन वह चीन के क्षेत्र में अतिक्रमण करने की अनुमति भी नहीं देता है. दक्षिण-पश्चिमी सीमा क्षेत्रों में चीन रणनीतिक रूप से दृढ़ (मजबूत) है और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है. यदि भारत शांति से रहना चाहता है तो चीन इसका स्वागत करता है. यदि भारत प्रतिस्पर्धा में शामिल होना चाहता है, तो चीन के पास भारत की तुलना में अधिक उपकरण और क्षमता है. यदि भारत सैन्य प्रदर्शन (मतलब सीमा पर सैनिकों को खुली छूट) करना चाहेगा, तो पीएलए (चीनी सेना) भारतीय सेना को 1962 की तुलना में अधिक गंभीर नुकसान करवाने के लिए बाध्य है.

मैं आपको बता दूं कि इस तरह की गीदड़ भभकी चीनी मीडिया अक्सर देती रहती है. लेकिन उसे पता नहीं हैं कि अब वैश्विक परिदृश्य बदल चुका है. 2020 न तो 1962 है और न ही आज का भारत तब जैसा है. तब के भारतीय नेतृत्व और आज के भारतीय नेतृत्व में बहुत अंतर है. चीन को समझ लेना चाहिए कि भारत युद्ध नहीं चाहता है. लेकिन क्षमता किसमें कितनी है, यह गलवान से लेकर 29/30 अगस्त की रात को पैंगोंग त्सो में हुए घटनाक्रम से पूरी दुनिया ने देखा है.

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