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फ्रांस-अमेरिका से पंगा लेना एर्दोगन को पड़ा महंगा, तुर्की का ‘लीरा’ हुआ कूड़ा

अंकारा :  तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन का अमेरिका और फ्रांस के साथ पंगा लेना भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को तुर्की की मुद्रा लीरा डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर देखी गई। शनिवार को लीरा में मामूली सुधार दिखाई दिया, फिर भी एक डॉलर का मूल्य 8.52 लीरा के निचले स्तर पर बना रहा।गुस्साए एर्दोगन ने लीरा में रिकॉर्ड गिरावट और महंगाई दर के ऊंचाई पर बने रहने के बीच शनिवार को देश के केंद्रीय बैंक के प्रमुख को हटा दिया।

पूर्व वित्त मंत्री केंद्रीय बैंक के नए प्रमुख
तुर्की के आधिकारिक गजट में राष्ट्रपति के फैसले की घोषणा की गयी है। इसके मुताबिक केंद्रीय बैंक के प्रमुख मूरत उयसाल को हटा दिया गया है और उनके स्थान पर पूर्व वित्त मंत्री नासी अग्बल को लाया गया है। तुर्की की मुद्रा लीरा के साल की शुरुआत से अब तक अपने मूल्य का लगभग एक तिहाई गिर जाने के बाद राष्ट्रपति एर्दोआन ने यह निर्णय किया है।

अमेरिकी पाबंदियों से तुर्की की अर्थव्यवस्था संकट में
अमेरिका की पाबंदियों के कारण तुर्की की अर्थव्यवस्था इन दिनों संकट से गुजर रही है। सोमवार को ही आर्थिक प्रतिबंध लगाने की अमेरिका की चेतावनी के बाद तुर्की की मुद्रा लीरा रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई। तुर्की अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य संगठन नाटो का हिस्सा है। उसने रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद की है। तुर्की ने इस प्रणाली का परीक्षण किया है, जिसके बाद अमेरिका ने तुर्की के ऊपर आर्थिक पाबंदियां लगाने की चेतावनी दी।

लीबिया में चल रही जंग में फ्रांस और तुर्की आमने-सामने
तुर्की के एडम शोध संस्‍थान में विश्‍लेषक सिनान उल्‍गेन का मानना है कि अपने इस बयान के जरिए एर्दोगान ने यह दिखाने की कोशिश की कि वह पूरी दुनिया में मुस्लिमों के अधिकारों के रक्षक हैं। उल्‍गेन ने कहा, ‘कार्टून को लेकर चल रहा विवाद दोनों देशों के बीच बढ़ रही प्रतिस्‍पर्द्धा का हिस्‍सा है। फ्रांस ने संयुक्‍त अरब अमीरात के साथ मिलकर एक रणनीतिक गठजोड़ बनाया है ताकि पश्चिम एशिया और उत्‍तरी अफ्रीका में राजनीतिक इस्‍लाम के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके।

मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस्लाम को ढाल बना रहे एर्दोगन

एर्दोगन धर्म और देशप्रेम की बातें लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए भी कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से तुर्की की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उसकी मुद्रा का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। देश में बेरोजगारी और महंगाई के आंकड़े रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। तुर्की में पहले भी विद्रोह हो चुका है, जिसको एर्दोगन ने सेना के दम पर कुचल दिया था। ऐसे में वह इन मुद्दों के सहारे लोगों का ध्यान दूसरे मुद्दों पर केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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