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बदन सिंह : यूपी का वो ‘हैंडसम’ डॉन, मेरठ से ऑस्ट्रेलिया तक फैला है जिसका जाल

28 मार्च 2019, दोपहर का क़रीब एक बजा होगा। पीएम नरेंद्र मोदी उस वक़्त मेरठ में दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे मैदान में लोकसभा चुनाव की रैली कर रहे थे। तभी मेरठ-दिल्ली हाइवे पर मुकुट महल होटल के बाहर दो गाड़ियां रुकीं। एक लंबे, स्मार्ट से शख़्स को लेकर आधा दर्जन पुलिस वाले उतरे और होटल में चले गए। क़रीब 2 बजे पीएम मेरठ से रवाना हुए। इधर अचानक पुलिस अफसरों के फोन घनघनाने लगे। सूचना मिली कि बद्दो फरार हो गया। बद्दो यानी वेस्टर्न यूपी में हैंडसम डॉन के नाम से मशहूर मेरठ का कुख्यात गैंगस्टर बदन सिंह।

बद्दो 2017 से यूपी की फर्रूखाबाद सेंट्रल जेल में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहा था। 1996 में मेरठ के टीपी नगर इलाके में बद्दो ने दिल्ली के कुख्यात इनामी भोलू और अपने दर्जनों गुर्गों के साथ मिलकर एडवोकेट रवींद्र पाल सिंह की सरेआम हत्या कर दी थी। रवींद्र पाल के भाई एडवोकेट देवेंद्र पाल ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। आखिरकार बद्दो को उम्र कैद की सज़ा हुई। बद्दो के ख़िलाफ़ दर्ज 47 अपराधों में यह पहला मुक़दमा था जिसमें उसको सज़ा हुई।

ट्रक की फर्जी आरसी बनाने के एक मुक़दमे में बद्दो की गाजियाबाद कोर्ट में 28 मार्च 2019 को पेशी थी। इसी पेशी से पहले जेल की सलाखों के पीछे रहकर बद्दो ने अपनी फरारी का तानाबाना बुन लिया था। गाजियाबाद से वापसी का रूट कागजों में तय था, लेकिन बद्दो के कहने पर पुलिसवाले उसे उसके परिवार से मुलाकात कराने के लिए मेरठ ले आए।

बद्दो ने पुलिसवालों को शराब और शबाब की पार्टी में छोड़ा और अकेले ही एक कार लेकर मेरठ के पॉश इलाके साकेत में एक ब्यूटी पार्लर में जा पहुंचा। पार्लर की मालकिन और शहर के एक रईस डॉक्टर की बेटी अदिति उसकी पुरानी दोस्त थी। बदन सिंह बद्दो ने अदिति को बताया कि वह परोल पर जेल से छूटा है। उसने वहां अपना हुलिया बदला और अदिति के फोन के ज़रिए अपने खास दोस्त और करन पब्लिक स्कूल के मालिक भानु प्रताप सिंह को अपने आने की जानकारी दी।

बद्दो कैंट इलाके में भानु के घर पहुंचा। वहां कुछ और दोस्तों से भी उसकी मुलाकात हुई जो उसके लिए लाखों रुपये लेकर आए थे। भानु उसे अपनी इनोवा कार में बैठाकर मेरठ से हापुड़ और फिर नोएडा होते हुए दिल्ली पहुंचा। लाजपत नगर मेट्रो स्टेशन के पास बद्दो ने गाड़ी रुकवाई और रुपयों से भरा सूटकेस लेकर उतर गया। इसके बाद कोई नहीं जानता कि बद्दो कहां गया।

इस कहानी का अंजाम अभी बाकी है, लेकिन इसकी शुरुआत हुई थी 70 के दशक में मेरठ की ट्रांसपोर्ट मंडी से। उस जमाने में ट्रकों के ज़रिये शराब की तस्करी आम थी। मेरठ में इस धंधे में एक बड़ा नाम था ट्रांसपोर्टर बंता सिंह का। उन्हीं दिनों अमृतसर के मुद्दर गांव से उसका एक दूर का रिश्तेदार चरन सिंह आया। बंता ने उसे अपने यहां ड्राइवर रखा।

चरन सिंह ने धीरे-धीरे कमाई के सारे गुर सीख लिए। क़रीबी इतनी बढ़ी कि चरन के नौ बच्चों में से बड़े बेटे सुखदेव को बंता ने गोद ले लिया। उसी दौरान बंता की गैंगस्टर सुनील त्यागी से ठन गई थी। त्यागी ने बंता की हत्या कर दी। अब ट्रांसपोर्ट कारोबार पूरी तरह चरन सिंह के हाथ में आ गया।

चरन सिंह की ज़िंदगी इस मोड़ से बिल्कुल बदल गई। रहन-सहन बदल गया, बच्चे मेरठ के गुरु तेगबहादुर पब्लिक स्कूल में पढ़ने लगे। लेकिन उसके बेटे बदन सिंह का मन पढ़ाई से ज़्यादा कारोबार में लगता था। 10वीं के बाद उसने स्कूल छोड़ दिया। और उतर गया शराब की थैलियों की तस्करी में। फर्जी आरसी के ज़रिए वह हरियाणा और पंजाब से आने वाले शराब के ट्रक मेरठ में गायब कर देता। बेहिसाब पैसा बनाया उसने।

90 का दशक आते-आते उसने केबल टीवी के कारोबार की ओर कदम बढ़ा दिए। मेरठ इस कारोबार में वेस्ट यूपी का सेंटर था और यहां का धंधा था रोमीशिव के हाथों में। इधर वेस्टर्न यूपी के सुशील मूंछ, रवींद्र भूरा, भूपेंद्र बाफर जैसे गैंगस्टरों से बद्दो का गठजोड़ हो चुका था। केबल कारोबार पर कब्जे की जंग तेज हुई तो रोमीशिव के मैनेजर पवित्र मैत्रेय को मेरठ के बच्चापार्क इलाके में दिनदहाड़े मार डाला गया।

हत्याएं, डकैतियां और रईस गैंगस्टर बदन सिंह 'बद्दो' के आपराधिक ज़िंदगी की कहानी

फिर मेरठ रेंज में तैनात एक अफसर के इशारे पर शहर के मेट्रो प्लाजा में बदन सिंह बद्दो ने बनाया केबल बिजनेस का कंट्रोल रूम। वहां से पायरेटेड चैनलों का टेलीकास्ट होने लगा। बात लखनऊ तक गई। उसका कंट्रोल रूम हटवा दिया गया। रंगबाजी से केबल कारोबार चलाने की बद्दो की हसरत धरी रह गई। लेकिन बद्दो ने जरायम से कमाई गई दौलत को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में खपाया और वहां होटल कारोबार खड़ा कर लिया।

1995 में बद्दो की ज़िंदगी में जैस्मीन कौर उसकी पत्नी बनकर आई। जैस्मीन से उसे दो बच्चे बेटी अनमोल और बेटा सिकंदर हुए। इस बीच बद्दो के दुश्मनों की तादाद बढ़ी तो जैस्मीन बच्चों को लेकर सिडनी चली गई और वहां होटल कारोबार संभालने लगी।

इधर एडवोकेट रवींद्र पाल सिंह की हत्या के मामले में तेजी से सुनवाई चल रही थी और बद्दो को सज़ा का अंदेशा था। उसने अपनी प्रॉपर्टी अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम करनी शुरू कर दी। जैस्मीन के नाम ऑस्ट्रेलिया की प्रॉपर्टी करने के बाद बदन सिंह बद्दो ने उसे अप्रैल 2016 में कागजी तलाक भी दे दिया। लेकिन दोनों बच्चे और जैस्मीन भारत आते-जाते रहे। बाद में सिकंदर की पढ़ाई भी भारत में ही जारी रही।

फिल्मी डॉन की तरह बद्दो की ज़िंदगी रंगीनियों से भरी थी। बद्दो की महिला मित्रों की लंबी फेहरिस्त थी। बद्दो देशी-विदेशी टॉप ब्रैंड्स का शौकीन था। लाखों की कीमत की राडो की घड़ियां, रेबेन के मंहगे चश्मे, अरमानी के सूट और बुलेट प्रूफ विदेशी गाड़ियों की रेंज उसकी शख़्सियत को आम गैंगस्टर से अलग करती हैं।

पर्शियन बिल्लियों को हाथ में रखना बद्दो अपना गुडलक मानता था। जैस्मीन से तलाक के बाद बद्दो ने ऑनलाइन साइट के ज़रिए एक मल्टिनैशनल आईटी कंपनी की अधिकारी से 2016 में शादी रचा ली। बद्दो ने खुद को ट्रांसपोर्टर बताया था, लेकिन जब तक नई बीवी को उसकी असलियत पता लगती, बद्दो उसे भी 60 लाख का चूना लगा चुका था। बद्दो की इस शादी में उसके बेटे सिकंदर के साथ मेरठ के कई बड़े उद्योगपति करनाल पहुंचे थे।

बद्दो की असलियत उसकी नई बीवी को भले ही रास नहीं आई, लेकिन उसकी तमाम गर्लफ्रेंड्स के लिए डॉन का साथ तमगे की तरह रहा। दिल्ली के कई पांच सितारा होटलों में योगा सर्विस प्रोवाइडर और हेल्थकेयर यूनिट स्लिम जोन की मालकिन प्रीति सिंह करीब एक दशक तक बद्दो के बेहद करीब रही। फरारी में मददगार बनी मेरठ की अदिति का उसके ज्वैलर पति से तलाक प्रीति ने ही बद्दो से कहकर मैनेज कराया। तलाक के मामले में बद्दो की एंट्री के बाद अदिति के पति ने उसे करीब एक करोड़ दिए और अपना कारोबार बंद कर मेरठ से चला गया।

28 मार्च 2019 को फरारी के बाद बदन सिंह बद्दो ने शहर के कई लोगो को वॉट्सऐप कॉल की थीं। लेकिन उसकी सबसे चौंकाने वाली एंट्री 4 फरवरी 2020 को हुई फेसबुक पर। उसने अपनी लोकेशन नीदरलैंड्स बताई और फेसबुक पर अपने पुराने दुश्मन रोमीशिव और आईपीएस अफसर बृजलाल पर सिंडिकेट चलाने के आरोप पोस्ट किए। बृजलाल ने ही उसका केबल कारोबार बंद कराया था।

यूपी पुलिस के रेकॉर्ड में बद्दो ढाई लाख रुपये का इनामी है। पुलिस मेरठ के करीब दो दर्जन कारोबारियों को बद्दो का राज़दार होने के गुनाह में जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है। यूपी एसटीएफ और मेरठ पुलिस उसकी तलाश में गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल और उत्तराखंड में बीते 17 महीनों से खाक छान रही है। उसके विदेश में होने की भी चर्चा है, लेकिन फरारी के वक़्त से रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के कारण उसके विदेश भागने की गुंजाइश बेहद कम है। हर सूबे की पुलिस को बद्दो की तलाश का जिम्मा सौंपा गया है, लेकिन बदन सिंह डॉन का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

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