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बात पीके की : बिहार में कभी सरकार बनवाने वाले ने शुरु की ‘बात बिहार की’ और हो गए गायब, कहां ?

जदयू के पूर्व उपाध्यक्ष और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ऐन चुनाव के मौके पर सीन से गायब हैं। लगभग 6 महीने पहले प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक ऐलान किया था कि वे बिहार को अगले 10 साल में देश के अग्रणी राज्य में ले जाने वाला प्लान लेकर आए हैं। इसके तहत अगले 100 दिनों तक प्रदेश के चप्पे-चप्पे में मौजूद बिहार का विकास चाहने वालों को जोड़ेंगे। दावे के अनुरूप 100 दिन तो क्या, अपने ऐलान के 30 दिन बाद से ही प्रशांत का अता-पता नहीं चल रहा है। यहां तक कि पीके जो नीतीश से अलग होने के बाद से लगातार बिहार और केंद्र पर सोशल मीडिया के जरिए हमला बोल रहे थे उस पर भी कम सक्रिय हैं।

20 जुलाई को उनका अंतिम कमेंट कोरोना वायरस के संक्रमण से संबंधित था। 11 जुलाई को उन्होंने अंतिम बार नीतीश पर सीधे हमला करते हुए कहा था कि ‘…नीतीश जी ये चुनाव नहीं कोरोना से लड़ने का वक्त है। लोगों की ज़िंदगी को चुनाव कराने की जल्दी में खतरे में मत डालिए।’

चुनावी रणनीतिकार के अपने पुराने पेशे में लौटने की चर्चा

पीके के यूं बिहार की सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने और चुपके से निकल जाने के पीछे एक बड़ा कारण कोरोना का प्रसार है। दरअसल, मार्च में ही देशभर में इस महामारी की वजह से लॉकडाउन लागू कर दिया गया, जिसने सारी गतिविधियों पर विराम लगा दिया। पीके की तात्कालिक सियासी गतिविधियां भी इसी वजह से शांत पड़ गईं।

लॉकडाउन के बीच ही ये खबर आई कि पीके ‘मिशन बंगाल’ के लिए निकल गए हैं। राजनीति में सक्रिय लोगों का कहना है कि बिहार में रहते हुए उन्होंने सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था तो यहां उनका टिकना कठिन हो गया। ऐसे में उन्होंने फिर से पुराने पेशे, चुनाव रणनीतिकार को ही अपनाना बेहतर समझा।

सियासी समझ वाले बेसब्री से खोज रहे
अब जबकि बिहार विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है, पहले दौर के लिए नामांकन भी शुरु हो गए हैं, ऐसे में राज्य की राजनीति को समझने वाले लोग पीके की खोज बड़े शिद्दत से कर रहे हैं। वे भले शांत हों लेकिन कुछ सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर ‘बात बिहार की’ नाम से पेज एक्टिव हैं जहां से लगातार नीतीश सरकार के विरोध में कंटेंट जारी किए जा रहे हैं।

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