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बाबरी ध्वंस : 27 साल बाद आई फैसले की घड़ी, जानें पूरा मामला और कौन-कौन हैं आरोपी

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले का निपटारा तो सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में अपने फैसले से कर दिया, लेकिन अब जिस दूसरे केस पर देश की निगाहें हैं वो है 6 दिसंबर 1992 को हुआ बाबरी ध्वंस। इस घटना के 27 साल के बाद सीबीआई की विशेष अदालत आज अपना फैसला सुनाएगी। इस मामले में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, विनय कटियार सहित कुल 32 आरोपी हैं।

अयोध्या के बाबरी विध्वंस मामले में कुल 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इनमें से 17 का निधन हो चुका है। पहली एफआईआर फैजाबाद थाने में राम जन्मभूमि के एसओ प्रियंवदा नाथ शुक्ला जबकि दूसरी एफआईआर एसआई गंगा प्रसाद तिवारी ने दर्ज कराई थी। इसके अलावा बाकी 47 एफआईआर अलग-अलग तारीखों पर पत्रकारों-फोटोग्राफरों सहित अन्य लोगों ने दर्ज कराई थी। इसके बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

सीबीआई ने बाबरी विध्वंस मामले की जांच करके एक साल से भी कम समय में 5 अक्टूबर 1993 को 49 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिए। लेकिन 13 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने आरोप के स्तर पर ही डिस्चार्ज कर दिया। इसको पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत में फैजाबाद के तत्कालीन डीएम आरएन श्रीवास्तव समेत कुल 28 अभियुक्तों के खिलाफ केस शुरू हुआ। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती समेत मुख्य 8 आरोपियों की सुनवाई रायबरेली की विशेष अदालत में शुरू हुई। हालांकि, बाद में अप्रैल 2017 को रायबरेली की विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को भी लखनऊ की सीबीआई कोर्ट को स्थानांतरित कर दिया गया।

जिन 13 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप विशेष अदालत ने डिस्चार्ज किए थे, उन अभियुक्तों के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट से मुकदमा चलाने का आदेश हुआ। 18 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से 6 को समन भेजा। कल्याण सिंह राजस्थान के गवर्नर थे। इसीलिए उन्हें समन नहीं भेजा गया जबकि शेष 6 का निधन हो चुका था।

सीबीआई की विशेष अदालत ने बाबरी विध्वंस के आरोपी लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा व विष्णु हरि डालमिया पर धारा 120 बी यानी आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया। इन सबके खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 147, 149, 153ए, 153बी और 505 (1) के तहत मुकदमा चला।

विष्णु हरि डालमिया की मौत हो चुकी है। महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चंपत राय बंसल, धर्मदास और डॉ। सतीश प्रधान पर भी आईपीसी की धारा 147, 149, 153ए, 153बी, 295, 295ए व 505 (1)बी के साथ ही धारा 120 बी के तहत आरोप तय हुए। कल्याण सिंह के राज्यपाल पद से हटने के बाद 17 सितंबर 2019 को उन पर भी उपरोक्त सभी धाराएं लगाई गईं।

इस तरह 49 में से कुल 32 अभियुक्तों के मुकदमे की कार्यवाही शुरू हुई, शेष 17 अभियुक्तों की मौत हो चुकी है। सीबीआई की विशेष अदालत ने 1 सितंबर 2020 तक पूरे मामले की सुनवाई कर फैसला लिखना शुरू कर दिया है और अब 30 सितंबर को फैसला आएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 49 आरोपितों में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ। राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर थे।

सीबीआई की तरफ से बनाए गए 49 आरोपियों में से अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, मोरेश्वर सावें, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉ। सतीश नागर, बालासाहेब ठाकरे, तत्कालीन एसएसपी डीबी राय, रमेश प्रताप सिंह, महात्यागी हरगोविंद सिंह, लक्ष्मी नारायण दास, राम नारायण दास और विनोद कुमार बंसल का निधन हो चुका है।

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