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बिकरु कांड में नहीं थम रही जांच की आंच, अब IPS समेत 11 अफसरों पर हुआ बड़ा खुलासा

कानपुर। उत्तर प्रदेश के चर्चित गैंगस्टर विकास दुबे द्वारा अंजाम दिये गए बिकरू कांड की एसआईटी जांच में फंसे आईपीएस समेत 11 अफसरों के मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक तब शस्त्र लाइसेंस के सत्यापन का आदेश किनारे कर दिया गया था। अकेले कानपुर नगर में करीब 42 हजार शस्त्र लाइसेंसधारक हैं, बावजूद इसके तीन से चार फीसदी ही यानी महज दो हजार लाइसेंसों का सत्यापन किया गया।

गैंगस्टर विकास दुबे, जय बाजपेई समेत अन्य के लाइसेंसों का सत्यापन किया ही नहीं गया। इसीलिए पता नहीं चल सका कि ऐसे दुर्दांत अपराधियों के पास भी शस्त्र लाइसेंस है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने शहर की पुलिस व प्रशासन को संबंधित अफसरों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की संस्तुति की है।

इस कार्रवाई में तत्कालीन डीआईजी अंनत देव तिवारी, आईपीएस बीबीजीटीएस मुर्थी सहित तत्कालीन एडीएम सिटी विवेक श्रीवास्तव, एसीएम-6 हरिश्चंद्र सिंह, रवि प्रकाश श्रीवास्तव, अभिषेक कुमार सिंह समत कुल 11 अफसर फंसे हैं। कानपुर के एक पुलिस अफसर ने बताया कि 2019 में लोक सभा चुनाव के ठीक पहले शासन का एक आदेश आया था जिसमें निर्देशित किया गया था कि शहर के सभी शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन किया जाए।

लेकिन शाशन के आदेश को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन जब बिकरू कांड हुआ तब पता चला कि अपराधियों के पास लाइसेंसी असलहे हैं जिनसे पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसाई गईं। इसलिए एसआईटी ने इन सभी जिम्मेदार अफसरों को दोषी बनाया है।

शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन हेतु नियमानुसार थानेवार सत्यापन किया जाता है। जिनके खिलाफ आपराधिक इतिहास पाया जाता उनका लाइसेंस निरस्त होता है, उन पर एफआईआर भी दर्ज हो सकती थी। लेकिन ढिलाई ऐसी रही कि केवल कागजों पर ही सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली गई। एक अफसर के मुताबिक कुल शस्त्र लाइसेंसों में से बमुश्किल दो हजार लाइसेंसों का सत्यापन किया गया था। थाने से लेकर बडे़ अफसरों ने इसमें खेल किया था।

एसआईटी की जांच में आईपीएस, पीपीएस, पीसीएस, इंस्पेक्टर आदि दोषी पाए गए हैं। लिहाजा जांच अधिकारी भी उसी आधार पर तय किये जाएंगे। आईजी रेंज मोहित अग्रवाल ने बताया कि मामले की रिपोर्ट डीआईजी को भेज दी गई है। वो अपने स्तर से तय करेंगे कि किस अधिकारी की कौन अफसर जांच करेगा। कमिश्नर व डीएम प्रशासनिक अफसरों की जांच के लिए जांच अधिकारी तय करेंगे। प्रक्रिया के बाद खुलासे किये जायेंगे।

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