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बिहार का चुनाव : सासाराम से ही क्यों चुनावी अभियान की शुरुआत कर रहे मोदी? मायने समझें

पटना:   Bihar Assembly Election 2020: यों तो चुनाव किसी राज्य में हो, भाजपा के प्रचार की कमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी खुद सम्भालते हैं लेकिन बिहार चुनावों में उनकी चुनावी सभाओं को लेकर लोगों में जिज्ञासा है. ऐसा इसलिए है कि लोगों के मन में इस बात को लेकर सवाल हैं कि पीएम किस अंदाज़ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो एनडीए का चेहरा हैं, उनके लिए वोट माँगेंगे? पिछले चुनावों में उन्होंने नीतीश को जमकर कोसा था. उनके डीएनए पर भी सवाल उठाए थे.

पीएम की पहली चुनावी रैली, जो अगले शुक्रवार को शुरू होगी, की जगह सासाराम को लेकर निश्चित रूप से एनडीए नेताओं ने राहत की साँस ली है क्योंकि भाजपा की ये परंपरागत सीट इस बार जनता दल यूनाइटेड के खाते में गई है. माना जा रहा है कि स्थानीय सांसद छेदी पासवान समेत स्थानीय भाजपा नेता चुनाव में बहुत सक्रिय नहीं दिख रहे थे. इस फीडबैक के आधार पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने दो दिन पूर्व यहाँ एक कार्यकर्ताओं की बैठक भी की थी. ये वो सीट है जहां से भाजपा के पूर्व विधायक और अब निष्कासित रामेश्वर चौरसिया भी लोक जनशक्ति पार्टी की टिकट पर मैदान में हैं.

रोहतास जिले की सात विधानसभा सीटों में से पांच पर जेडीयू ने उम्मीदावर उतारे हैं. इनमें से तीन पर भाजपा के बागी टक्कर दे रहे हैं. रामेश्वर चौरसिया के अलावा भाजपा के उपाध्यक्ष रहे राजेंद्र सिंह भी नोखा से ताल ठोक रहे हैं ये नेता भी खुद को भाजपा का ही नेता बता रहे हैं. इस स्थिति में वोटरों के बीच भ्रम है. ऐसे में सासाराम से चुनाव अभियान की शुरुआत कर पीएम मोदी अपने संबोधन में न केवल नीतीश क्यों ज़रूरी हैं? इसके बारे में लोगों के बताएंगे बल्कि लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के प्रति उनका क्या रूख है? इसके बारे में भी लोगों को बताएंगे. एक दिन पहले ही चिराग पासवान ने कहा है कि वो मोदी जी के हनुमान हैं.

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की दूसरी संयुक्त जनसभा गया में है, जहाँ से मंत्री और पिछले 30 वर्षों से गया शहर विधानसभा सीट से जीत रहे प्रेम कुमार उम्मीदवार हैं. उसी गया जिले के तहत इमामगंज सुरक्षित सीट से पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी हम के उम्मीदवार हैं. इसके अलावा उसी दिन दोनों नेता भागलपुर में भी चुनावी रैली को संबोधित करेंगे. भागलपुर में पिछली बार यानी 2015 के विधानसभा चुनाव में BJP उम्मीदवार कांग्रेस प्रत्याशी अजीत शर्मा से हार गए थे. यह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे का शहर है. चौबे के पुत्र अरिजित शाश्वत यहाँ से टिकट चाहते थे लेकिन उनकी उम्मीदवारी ख़ारिज हो गई. इस सीट से लोक जनशक्ति पार्टी ने दोस्ताना मुक़ाबले में राजेश वर्मा को टिकट दिया है, जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय और लोकप्रिय दोनो हैं.

प्रधानमंत्री मोदी इसके बाद पहले चरण के मतदान के दिनय यानी 28 अक्टूबर को दरभंगा, मुज़फ़्फ़रपुर और पटना में सभा को संबोधित करेंगे. ये तीनों जगह BJP का परंपरागत गढ़ रहा है. मुज़फ़्फ़रपुर और पटना में तो पार्टी पिछले 20 वर्षों से चुनाव जीतती आ रही है. इसके बाद उनका दौरा छपरा, मोतिहारी और समस्तीपुर का होगा. मोतिहारी के अलावा बाक़ी के दोनों शहरों में BJP को क़रीबियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. आख़िरी चरण में प्रधानमंत्री 3 नवम्बर को चंपारण, सहरसा और अररिया में जनसभाओं को संबोधित करेंगे. पिछले चुनाव में इन तीनों जगहों पर भाजपा के प्रत्याशियों की हार हुई थी और इस बार पार्टी को उम्मीद है कि नीतीश कुमार का साथ है तो वो अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को पाने में क़ामयाब होंगे.

इन चुनावी रैलियों में सबसे महत्वपूर्ण बात भाजपा नेताओं के अनुसार यह होगी कि जो नीतीश कुमार लगातार दो विधानसभा चुनावों 2005 के अक्टूबर और 2010 में नरेंद्र मोदी को विधान सभा चुनाव प्रचार से अलग रखने की सख़्त हिदायत देते थे, उन्हें अब वही नरेंद्र मोदी अब नीतीश कुमार को जीत की संजीवनी वटी दिखने लगे हैं.

 

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