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बिहार चुनाव का चाहे जो आए नतीजा, इसने लालू परिवार में विरासत का विवाद तो खत्म ही कर दिया !

लालू प्रसाद के परिवार में विरासत का विवाद खत्म हो गया है और उत्तराधिकार का मामला भी तय हो गया है। यह इस बार के चुनाव की खास बात है। पिछले साल लोकसभा चुनाव तक यह विवाद चल रहा था। लालू प्रसाद ने भले तेजस्वी को नीतीश कुमार के साथ बनी सरकार में उप मुख्यमंत्री बना दिया था और बाद में विपक्ष के नेता का पद भी दिया था। पर इससे उत्तराधिकार और विरासत का विवाद खत्म नहीं हुआ था। पिछले साल के लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद की बड़ी बेटी मीसा भारती ने लड़ कर पाटलीपुत्र सीट से टिकट ली थी। तेजस्वी उनके लड़ने के एकदम खिलाफ था। उनका कहना था कि मीसा भारती राज्यसभा में हैं, इसलिए उनको चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।

गौरतलब है कि मीसा भारती 2014 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ कर हार चुकी थीं और उसके बाद ही उनको राज्यसभा में भेजा गया था। तभी तेजस्वी इस बार अपने एक करीबी विधायक को टिकट देना चाहते थे। पर मीसा भारती और तेजस्वी के बड़े भाई तेजप्रताप यादव ने जोर जबरदस्ती टिकट लिया। तेजस्वी के करीबी विधायक को अपमानित भी किया। उस एक घटना से तेजस्वी बैकफुट पर थे। उनके लिए अच्छा यह हुआ कि मीसा भारती इस बार पिछली बार से ज्यादा वोट से हारीं। उसके बाद से मीसा भारती अलग थलग पड़ी हैं।

इस बार विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के समय लालू प्रसाद के एक पुराने सहायक ने मीसा भारती के जरिए कुछ लोगों को टिकट दिलाने का प्रयास किया पर किसी की टिकट नहीं हुई। यहां तक कि पार्टी का घोषणापत्र जारी करते समय तेजस्वी को एक महिला चेहरा दिखाने की जरूरत थी तो हाल ही में पार्टी में शामिल हुईं लवली आनंद को मंच पर रखा गया। मीसा भारती को वहां से भी दूर रखा गया। इस तरह पार्टी अब पूरी तरह से तेजस्वी यादव के हाथ में आ गई है। इसमें लालू प्रसाद ने भी उनकी मदद की।

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