Thursday , November 26 2020
Breaking News
Home / ख़बर / बिहार चुनाव : तेजस्वी पर भरोसा नहीं कर पा रहे सवर्ण वोटर, पीछे हैं ये 5 वजह !

बिहार चुनाव : तेजस्वी पर भरोसा नहीं कर पा रहे सवर्ण वोटर, पीछे हैं ये 5 वजह !

सहरसा
तेजस्वी यादव की सभाओं में भीड़ खूब उमड़ रही है। वहीं, पीएम मोदी अपनी हर सभाओं में तेजस्वी का नाम लिए बिना लालू यादव के शासन काल की याद दिला रहे हैं। सहरसा की रैली में पीएम मोदी ने धर्म को लेकर भी महागठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जंगलरात के साथी को भारत माता और जय श्रीराम से दिक्कत है। इसके जरिए वह हिंदू वोटरों को पोलराइज करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही जंगलराज का लोगों को भय दिखा रहे हैं। लेकिन तेजस्वी की सभाओं में उमड़ रही भीड़ ने सियासी दलों की नींद उड़ा दी है।

लेकिन तेजस्वी की रैलियों में जो भीड़ है, उसमें 90 फीसदी से ज्यादा लोग MY के होते हैं। MY का मतलब मुस्लिम-यादव वोटर हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या तेजस्वी इन दो जातियों के सहारे सत्ता के शीर्ष पर बैठ जाएंगे। क्योंकि पूर्व में भी यह समीकरण उनके साथ ही रहा है। आरजेडी ने पिछले 15 सालों तक इसी समीकरण के साथ बिहार में राज किया है। 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। वहीं, इनके कोर वोटर पहले से ज्यादा एग्रेसिव हैं। उनकी यह आक्रामकता दूसरे वोटरों में भय का माहौल पैदा कर रहा है। जिसके लिए कभी लालू राज सुर्खियों में रहा है।

दूसरे फेज की वोटिंग में घटी कई घटनाएं
दूसरे फेज की वोटिंग के दौरान इसकी बानगी देखने को भी मिली है। तेजस्वी के वोटर ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। खगड़िया के परबत्ता में जेडीयू को वोट करने पर आरजेडी समर्थक ने वोटर पर ईंट से हमला कर दिया। वहीं, फतुहा में आरजेडी समर्थक ने जेडीयू को वोट देने पर एक वोटर को बेरहमी से पीट दिया। दोनों ही घटनाओं में आरोप आरजेडी के लोगों पर ही लगे। इसके साथ ही पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें तेजस्वी के समर्थक एक पुजारी से जबरन नारे लगवा रहे थे।

सवर्णों का नहीं जीत पा रहे हैं भरोसा
सिवान, गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी, सुपौल, मधेपुरा, दरभंगा, सहरसा, मधुबनी समेत कई जिलों में स्थानीय लोगों से तेजस्वी को लेकर बात की। ज्यादातर जगहों पर नीतीश कुमार से लोगों को नाराजगी है। हालांकि सड़क और बिजली में सुधार की बात मानते हैं। लेकिन अफसरशाही की वजह से लोग परेशान हैं। लेकिन तेजस्वी सवर्ण और बिजनेस क्लास के लोगों का भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं।

ये हैं डर
1. गोपालगंज में एक व्यक्ति ने बातचीत के दौरान बताया कि हम लोग परिवर्तन तो चाहते हैं। लेकिन तेजस्वी यादव अभी सत्ता में नहीं आए हैं। उससे पहले ही शहर में उनके लोग ऐसे पेश आ रहे हैं, जैसे अब वह पावर में आ गए हैं। उनके तेवर को देख फिर से हमलोग 15 साल पहले के शासन को याद करने लग रहे हैं। यहीं माहौल लोगों में डर पैदा कर रहा है।

2. तेजस्वी की सभाओं में भीड़ खूब उमड़ रही है। लेकिन रैली में शामिल होने आ रहे लोग जिस तरह से एग्रेसिव नजर आते हैं, वह तेजस्वी के लिए घातक साबित हो सकता है। क्योंकि दूसरे तबके के लोगों को यह डराता है। मधुबनी शहरी क्षेत्र के लोगों ने कहा कि आरजेडी समर्थकों का यह रूप देख हम लोग डर जाते हैं। साथ ही हम लोगों ने लालू यादव के 15 सालों के शासन को देखा है। उसके बाद हम लोगों के पास कोई विकल्प नहीं बच जाता है।

3. लालू यादव ने अपने शासन के दौरान भूरा बाल साफ करो का नारा दिया था। सवर्ण वोटरों को लगता है कि इसकी वजह से बिहार में जातीय संघर्ष खूब हुए थे। तेजस्वी भले ही चुनावी रैलियों में कह रहे हैं कि हम सभी जातियों के लोगों को साथ लेकर चलेंगे। लेकिन उनके समर्थकों जमीनी स्तर पर ऐसा माहौल बनाया है, उससे सवर्ण वोटरों को यकीन करना मुश्किल हो रहा है। तेजस्वी अपने लोगों पर कंट्रोल रख पाएंगे।

4. बिहार में जमीनी स्तर पर स्थानीय उम्मीदवारों और नीतीश कुमार से जबरदस्त नाराजगी है। तेजस्वी ने रोजगार को एक बड़ा मुद्दा बनाया है। इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल चलने को मजबूर हैं। लेकिन उनके कोर वोटरों को छोड़ इस वायदे पर दूसरे को भरोसा नहीं है। लोग आज भी यहीं सवाल करते हैं कि पिछले 15 सालों के शासन में उन्होंने कितने लोगों को रोजगार दिया था। रक्सौल बॉर्डर पर नेपाल से ड्यूटी कर लौट रहे सागर नाम के युवक ने कहा कि कैसे उनकी बातों पर यकीन करें। उनके पिता के शासन काल में ही बिहार में 30 चीनी मिलें बंद हो गईं।

5. तेजस्वी यादव के कोर वोट में इस बार बिखराव की संभावना 1 फीसदी तक है। यादव बहुल राघोपुर में दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान लोगों ने जम कर वोट किया है। तेजस्वी इसी क्षेत्र से उम्मीदवार हैं। सहरसा में एक व्यवसायी ने कहा कि उनके शासन काल में व्यापार करना मुश्किल था। स्थानीय विधायक ने कुछ काम नहीं किया है। लेकिन तेजस्वी की पार्टी का राज हम लोगों ने देखा है। फिर से वहीं रूप उनके समर्थक दिखाने लगे हैं। ऐसे में यकीन करना बहुत मुश्किल हो रहा है।

तेजस्वी को भी एहसास
मधुबनी जिले के हरलाखी में नीतीश कुमार के ऊपर पत्थर और प्याज फेंके गए। नीतीश कुमार इस पर गरम होते हुए कहा कि खूब फेंको, खूब फेंको। इसके बाद वह जंगलराज की याद दिलाने लगे। तेजस्वी को लगा कि इससे नुकसान हो सकता है तो उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि चुनावी सभा में किसी ने आदरणीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर प्याज फेंकी। यह निंदनीय, अलोकतांत्रिक और आवंछनीय व्यवहार है। लोकतंत्र में प्रतिरोध की अभिव्यक्ति सिर्फ मतदान ही होनी चाहिए और इसके अलावा कोई भी तरीका स्वीकार्य नहीं हो सकता है।

loading...
loading...

Check Also

1 दिसंबर से करोड़ों किसानों के खातों में आएंगे हजारों रुपए, लिस्ट में अपना नाम ऐसे चेक करें!

मोदी सरकार पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana) के तहत देश के अन्नदाताओं के खातों ...