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बिहार चुनाव में नहीं दिख रहे कन्हैया कुमार? भाग रहे हैं या फिर.. जानिए अंदर की बात

पटना
सीपीआई के स्टार प्रचारक और बेगूसराय से लोकसभा उम्मीदवार रहे कन्हैया कुमार इस बार बिहार से चुनाव के दूर चल रहे हैं। चुनावी माहौल में कन्हैया कुमार की बिहार में अभी कोई गतिविधि नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या कन्हैया कुमार बिहार चुनाव से भाग रहे हैं। क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान नामांकन से पहले ही उनके लोग और वह खुद बिहार में एक्टिव थे। लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही कन्हैया बिहार में उतने एक्टिव नहीं हैं। हालांकि उनकी पार्टी इन बातों से इनकार कर रही है।

लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार से सबसे ज्यादा एक बेगूसराय लोकसभा सीट की चर्चा हुई थी। मीडिया का फोकस भी इसी सीट पर था। यहां से सीपीआई ने अपने स्टार नेता कन्हैया कुमार को उम्मीदवार बनाया था। कन्हैया मुकाबला बेगूसराय में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह से थे। कन्हैया को जीत दिलाने के जेएनयू के उनके साथ और गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवानी समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने ताकत झोंक दी थी। लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए।

2019 में जिस तरीके से कन्हैया कुमार ने धमाकेदार एंट्री की थी। उससे लग रहा था कि वह बिहार की राजनीति में एक्टिव रहेंगे। जेएनयू विवाद में नाम सामने आने के बाद जब पहली बार कन्हैया बिहार आए थे, तब वह आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से आर्शीवाद लेने उनके घर पर गए थे। लेकिन लोकसभा चुनाव में कन्हैया जब मैदान में उतरे, तो आरजेडी ने उनका साथ नहीं दिया। इस बार लोकसभा चुनाव में कन्हैया की पार्टी का आरजेडी के साथ गठबंधन है। आरजेडी ने सीपीआई को 6 सीट दिए हैं। सीपीआई ने अपने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं।

कन्हैया का नाम नहीं
सीपीआई उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद यह साफ हो गया है कि कन्हैया कुमार बिहार चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन सवाल है कि आखिर वह अभी तक बिहार में पार्टी के लिए कार्य क्यों नहीं कर रहे हैं। कन्हैया ने पिछले दिनों दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ की थी। नीतीश की तारीफ पर उन्होंने कहा था कि जो अच्छा करेगा, उसे मैं अच्छा कहूंगा। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि मैं इस बार चुनाव नहीं लड़ूंगा।

प्रचार के लिए आएंगे कन्हैया
वहीं, एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव सुशील कुमार ने कहा कि कन्हैया कुमार बिहार से दूर नहीं है। वह बिहार चुनाव से संबंधित कार्यों में संलिप्त हैं। तेजस्वी के साथ मंच साझा करने के सवाल पर सुशील ने कहा कि कन्हैया कुमार बिलकुल करेंगे क्योंकि अब उनके साथ हमारा गठबंधन है। हालांकि सुशील सीट बंटवारे को लेकर सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि उम्मीद के मुताबिक हमें सीटें गठबंधन में नहीं मिली है। लेकिन हम लोगों की बातचीत जारी है। कन्हैया हमारे सभी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने आएंगे।

तेजस्वी को है कन्हैया से खतरा
राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर अजय झा ने कहा कि बिहार चुनाव से कन्हैया के दूर रहने की वजह यह हो सकती है कि कन्हैया से तेजस्वी यादव असुरक्षित महसूस करते हैं। क्योंकि कन्हैया मैदान में होते हैं, तो मीडिया में उन्हें कवरेज ज्यादा मिलती है। ऐसे में तेजस्वी के लिए ये मुश्किल हो जाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी सबसे ज्यादा चर्चा कन्हैया की सीट की थी। कन्हैया सीपीआई के स्टार कैंपनेर हैं।

तेजस्वी ने नहीं दिया था साथ
दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव ने कन्हैया कुमार का साथ नहीं दिया था। कन्हैया के खिलाफ उन्होंने बेगूसराय में उम्मीदवार उतार दिया था। लेकिन वामदलों ने इस बार तेजस्वी यादव को सीएम पद का उम्मीदवार स्वीकार कर लिया है। महागठबंधन में वामदलों को इस बार 29 सीटें दी हैं। बदले हालातों में अगर कन्हैया कुमार बिहार में चुनाव प्रचार के लिए आते हैं, तो तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए वोट मांगेंगे।

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