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बैंक अकाउंट में क्यों नहीं रखने चाहिए 5 लाख से ज्यादा रुपए, वजह यहां समझिए

क्‍या आपका बैंक में बचत खाता (Savings Bank) है. क्‍या आप जानते हैं कि इस बचत खाते में जमा कितनी रकम सेफ है. मतलब अगर बैंक किसी कारण से डूब जाता है तो आपको कितनी रकम वापस मिलेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट 2020 (Budget 2020) में ऐसा ही एक नियम बदला था. बैंकों में रखी आपकी 5 लाख रुपए तक की रकम सुरक्षित है. लेकिन, अगर बैंक में 5 लाख रुपए से ज्यादा जमा है तो क्या होगा? क्यों हमें अपने अकाउंट में 5 लाख रुपए से ज्यादा नहीं रखने चाहिए? आइये समझते हैं…

बजट 2020 में बदला था नियम (Budget 2020 rules changed)
दरअसल, पिछले बजट में सरकार ने बैंक गारंटी की रकम को बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया था. इससे पहले बैंक गारंटी सिर्फ 1 लाख रुपए थी. 4 फरवरी 2020 से इस नियम को लागू भी कर दिया गया है. अगर अब कोई बैंक डूबता है तो आपके खाते में जमा 5 लाख रुपए तक सुरक्षित हैं. बैंक आपको 5 लाख रुपए लौटाएगा. यह कवर रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई जमा बीमा और कर्ज गारंटी निगम (DICGC) देगा

कैसे होता है आकलन? (How your money is assesment)
किसी भी बैंक में एक व्यक्ति के सभी खातों को मिलाकर पांच लाख रुपए की गारंटी होती है. मतलब अगर आपने एक ही बैंक में पांच लाख रुपए की FD (Fixed deposit) करा रखी है और उसी में बचत खाते में तीन लाख रुपए भी जमा हैं तो बैंक डूबने की स्थिति में पांच लाख रुपए ही आपको वापस मिलेंगे. आपके खाते में जितने चाहे पैसे हों, कुल रकम सिर्फ 5 लाख रुपए तक ही सुरक्षित होगी. मसलन अगर किसी के अकाउंट में 10 लाख रुपए और अलग से FD भी कराई हुई है. ऐसे में बैंक डूबने या दिवालिया होने पर आपको सिर्फ 5 लाख रुपए की रकम इंश्योयर्ड होगी.

लक्ष्मी विलास की निकसी सीमा को भी समझें (Lakshmi Vilas bank withdrawal rule)
लक्ष्मी विलास बैंक के मामले में रिजर्व बैंक ने 25 हजार रुपए की जो निकासी सीमा रखी है, वह प्रति व्यक्ति है. उसी बैंक में अगर दूसरा खाता भी है तो भी दोनों अकाउंट को मिलाकर प्रति व्यक्ति 25 हजार रुपए ही मिलेंगे. यह निकासी सीमा व्यक्ति पर लागू होती है, अकाउंट पर नहीं.

पैसे की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी (Bank deposit is secured)

SBI के पूर्व अधिकारी प्रदीप कुमार राय का मानना है कि बैंक में जमा लोगों के पैसे की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती है. सरकार किसी बैंक को डूबने नहीं दे सकती. क्योंकि. इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत उसे चुकानी पड़ सकती है.

बैंक डूबने से पहले तैयार होता है प्लान (Bank defaulter plan)
प्रदीप कुमार राय के मुताबिक, जैसे ही कोई बैंक या फाइनेंशियल सर्विस देने वाली कंपनी क्रिटिकल कैटिगरी में आती है तो उसे संभालने के लिए प्लान तैयार किया जाता है. इसके तहत बैंक की लायबिलिटी को कैंसिल करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं. इस बेल-इन-क्लॉज में डिपॉजिटर्स का पैसा भी आ सकता है. वैसे आपको यह जानकर हैरत होगी कि कस्टमर्स का पैसा 5वें नंबर की लायबलिटी है. ऐसे में चिंता होना स्‍वाभाविक है.

कैसे बचा सकते हैं अपना पैसा? (How can you save your money?)
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले 50 साल में देश में शायद ही कोई बैंक दिवालिया हुआ है. हालांकि, अलग-अलग बैंकों में अपना पैसा रखकर आप अपना जोखिम घटा सकते हैं. जमा बीमा कवर को 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए किया गया था. यह बदलाव करीब 27 साल यानी 1993 के बाद पहली बार किया गया. आने वाले समय में इसे और बढ़ाया जा सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपके पैसे की सुरक्षा के लिए बैंक अब प्रत्येक 100 रुपए के जमा पर 12 पैसे का प्रीमियम देंगे. पहले यह 10 पैसे था.

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