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ब्रह्मोस के बाद आकाश मिसाइल भी बेचेगा भारत लेकिन एक शर्त- चीन का दुश्मन देश हो खरीदार!

ब्रह्मोस के बाद अब केंद्र सरकार ने भारत में पूर्ण रूप से निर्मित आकाश मिसाइल प्रणाली के निर्यात का फैसला किया है। इस मिसाइल प्रणाली का निर्यात भारत अपने मित्र देशों जैसे फिलीपींस और वियतनाम को सबसे पहले कर सकता है। यह किसी और को नहीं बल्कि चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए यह फैसला लिया गया, जिससे ये छोटे देश अपने अपने आप को ताकतवर बना सके और चीन के गुंगगर्दी का जवाब दे सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार सतह से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल प्रणाली को मित्र देशों को निर्यात करने का फैसला लिया। यही नहीं इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने सैन्य हार्डवेयर के निर्यात के मामलों में जल्द से जल्द अनुमोदन के लिए एक उच्च-शक्ति वाला पैनल भी बनाया।

बता दें कि जब से मोदी सरकार ने सत्ता संभाली है, डिफेंस एक्सपोर्ट पर खासा ध्यान दिया जा रहा है और 2024 तक 5 अरब डॉलर के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने 2018-19 में 10,745 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों का निर्यात किया है, जो कि 2016-17 से सात गुना अधिक है। अब तक, भारतीय रक्षा निर्यात में छोटे-छोटे रक्षा उपकरणों के पार्ट्स ही शामिल थे। अब मंत्रिमंडल की इस पहल से देश को अपने रक्षा उत्पादों को बेहतर बनाने और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

बता दें कि आकाश मिसाइल मिसाइल  पहले से ही भारतीय सेना में सेवा में है और यह 96%  स्वदेशी सामानों से बना है। 25 किलोमीटर की रेंज वाली इस मिसाइल को 2014 में भारतीय वायु सेना और एक साल बाद सेना में शामिल किया गया था।

The Print के अनुसार अधिकारियों ने कहा कि सशस्त्र बलों में शामिल होने के बाद, कई विदेशी देशों जैसे UAE फिलीपींस और वियतनाम ने अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय रक्षा प्रदर्शनियों के दौरान आकाश मिसाइल में रुचि दिखाई थी। अब कैबिनेट की मंजूरी से भारत विभिन्न देशों द्वारा जारी टेंडर में भाग ले सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा वर्तमान में तैनात इस मिसाइल प्रणाली से निर्यात करने वाला मिसाइल प्रणाली अलग होगा।आकाश के अलावा, तटीय निगरानी प्रणाली, राडार और एयर प्लेटफॉर्म जैसे अन्य प्रमुख प्लेटफार्मों में भी कई देश रुचि दिखा चुके है।

अधिकारियों का कहना है कि निर्यात क्षमता रखने वाले अन्य रक्षा प्लेटफार्मों में हल्के लड़ाकू विमान, अस्त्र बियोंड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल, प्रहार-सतह से सतह मार करने वाली मिसाइल, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस, सोनार, तथा कई प्रकार के रडार शामिल हैं।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत अपने उन मित्र देशों को मजबूत कर रहा है जो चीन की आक्रामकता के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। कुछ महीनों पहले ही भारत और रूस ने साथ मिल कर बनाने वाले क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के भी निर्यात का फैसला लिया था और वह भी दक्षिण एशियाई देश फिलीपींस और वियतनाम को ही। यही नहीं, इंडोनेशिया और ब्राज़ील ने भी भारत और रूस के इस मिसाइल को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। ब्रह्मोस मिसाइलों के निर्यात को लेकर भारत लंबे समय से आसियान देशों के साथ बातचीत कर रहा था। अब आकाश मिसाइल प्रणाली का निर्यात भी दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में चीन के दबाव को कम करने की नीति का हिस्सा है।

इन चीन विरोधी देशों को भारत एक के बाद एक नए-नए मिसाइलों से लैस कर ताकतवर बनाने की नीति पर काम कर रहा है। इसका अर्थ स्पष्ट है कि वह किसी भी तरह से इंडो पैसिफिक में चीनी खतरे को जड़ से समाप्त करना चाहता है। वियतनाम सहित दक्षिण पूर्वी एशिया के अधिकतर देश दक्षिणी चीन सागर पर उसकी गुंडई को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं, और तो और फिलीपींस चीन के एक भी गलत कदम पर उससे निपटने की सख्त चेतावनी भी दे चुका है। अब भारत की मदद से ये देश और ताकतवर हो सकेंगे।

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