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PLA में भर्ती होने को तैयार नहीं नौजवान, पूर्व चीनी सैनिकों में भी सुलग रहा अंगार !

पेइचिंग
पूर्वी लद्दाख में भारतीय सरजमीं पर कब्‍जा जमाने की कोशिश में लगी चीनी सेना को ढूढ़ने से भी नए सैनिक नहीं म‍िल रहे हैं। चीन के युवा अब सेना की बजाय अन्‍य आकर्षक नौकरियों में जाना पसंद कर रहे हैं जिससे PLA के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। यही नहीं चीन के करीब 5 करोड़ 70 लाख पूर्व सैनिकों में भी रिटायरमेंट के बाद सुविधाएं नहीं मिलने पर असंतोष भड़क रहा है। इन पूर्व सैनिकों को मनाने के लिए अब चीन सरकार लॉलीपाप देने में जुट गई है।

हॉन्‍ग कॉन्‍ग से प्रकाशित अखबार साऊथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट के मुताबिक चीन की सेना अब पढ़े लिखे युवाओं को आकर्षित करने में असफल साबित हो रही है। इन युवाओं के पास अब अपने पूर्व की पीढ़ी के मुताबिक और ज्‍यादा कैरियर विकल्‍प हैं। वुहान यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञानी प्रफेसर क्नि किआनहोंग ने कहा कि चीन को और ज्‍यादा काम करने की जरूरत है ताकि युवाओं के लिए सेना आकर्षक कैरियर विकल्‍प बनी रहे।

पूर्व सैनिकों ने सुविधाएं देने के लिए प्रदर्शन किया
उधर, चीन में पूर्व सैनिकों में भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। हाल के वर्षों में पूर्व सैनिकों ने सुविधाएं देने के लिए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया है। पिछले साल जनवरी में ही 19 प्रदर्शनकारियों को अरेस्‍ट किया गया था। इस असंतोष के बाद चीन ने अब पूर्व सैनिकों की मदद के लिए बुधवार को एक नए कानून को पारित किया है। चीन में कुल 5 करोड़ 70 लाख पूर्व सैनिक हैं।

चीन के नैशनल पीपुल्‍स कांग्रेस की स्‍थायी समिति ने इस विधेयक को स्‍वीकार कर लिया है। शिन्‍हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व सैनिकों को अब नौकरी के अन्‍य अवसर, भत्‍ते, नौकरी, प्रशिक्षण, शैक्षिक अवसर दिए जाएंगे। नए कानून के तहत पूर्व सैनिकों को नौकरी देने वाली कंपनियों को टैक्‍स में राहत दी जाएगी। साथ ही स्‍थानीय सरकारें अब पूर्व सैनिकों को वैकल्पिक रोजगार तलाश करने में मदद करेंगी।

चीनी जवानों के रोने का व‍िड‍ियो वायरल

इससे पहले चीनी जवानों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया था जिसमें दावा किया जा रहा था कि ये चीनी सैनिक भारतीय सीमा पर अपनी पोस्टिंग होने से रो रहे हैं। इस वीडियो को पहले चीनी सोशल मीडिया वीचैट पर पोस्ट किया गया था लेकिन बेइज्जती होने के डर से चीनी प्रशासन ने इसे डिलीट कर दिया था। ताइवान न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस वीडियो को फूयांग रेलवे स्टेशन जाते समय बस में शूट किया गया था।

सेना में भर्ती इन नये जवानों को यहां से ट्र्र्रेनिंग के बाद भारत से लगी सीमा पर पोस्टिंग के लिए भेजा जा रहा था। इन जवानों को पहले हुबेई प्रांत के एक मिलिट्री कैंप जाना था। वहां से इनकी पोस्टिंग भारतीय सीमा पर होनी थी। हालांकि चीन ने बाद में चीनी सैनिकों के रोने का खंडन किया था और कहा था कि यह फेक न्‍यूज है।

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