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भारतीय बैंकों का संकट काल जारी, जानें क्यों आई लक्ष्मी निवास बैंक की बारी

भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा माने जाने वाले बैंकों का संकट बीते कुछ सालों में बार-बार सामने आया है। अब इस कड़ी में एक और प्रमुख बैंक लक्ष्मी निवास बैंक का नाम जुड़ गया है। रिजर्व बैंक की सिफारिश के आधार पर केंद्र सरकार ने इस बैंक से 25 हजार से अधिक की निकासी पर रोक लगा दी है।

मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी निवास बैंक का नियंत्रण उसके वित्तीय रिजर्व में गंभीर गिरावट के कारण जब्त कर लिया है। यह बैंक पिछले एक साल से न्यूनतम पूंजीगत बफर्स पूरा करने के लिए एक पार्टनर की तलाश कर रहा है और अबतक उसे इसमें सफलता हासिल नहीं हुई है।

रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने का मोरेटोरियम लगाया है। 94 साल पुराना निजी सेक्टर का यह प्रमुख बैंक पिछले तीन सालों से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। 30 सितंबर को आए तिमाही नतीजे में इस बैंक को 396.99 करोड़ रुपये का खुद्ध घाटा हुआ था। जबकि इस बैंक का सकल एनपीए 24.45 प्रतिशत पर पहुंच गया था।

 

आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही में इस बैंक के पास मात्र 21, 161 करोड़ रुपये की जमा पूंजी थी, ऐसे में स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर आरबीआइ ने तीन सदस्यीय कमेटी बना कर उसे बैंक संचालन का जिम्मा सौंपा और कमान एक तरह से खुद के हाथ में ले ली। इस बैंक द्वारा क्लिक्स कैपिटल को दिए गए लोन को लोन बुक में 2500 से 3000 करोड़ रुपये का अंतर देखने को मिला। क्लिक्स कैपिटल ने अपनी लोन बुक का मूल्य 4200 करोड़ रुपये रखा था, जबकि लक्ष्मी विलास बैंक ने इसे 1200 से 1300 करोड़ रुपये लिखा।

 

बैंक का संकट तब खुल कर सामने आया जब रैनबेक्सी और फोर्टिस केयर के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह के लगभग 720 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपाॅजिट पर ध्यान दिया। रेलिगेयर ने बाद में लोन वसूलने के लिए एफडी का पैसा वसूलने के बाद लक्ष्मी विलास बैंक की दिल्ली शाखा पर मुकदमा दायर कर दिया गया। यह मामला अब भी अदालत में है।

 

बाद में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स ने इस बैंक की रेंटिंग घटाकर इसे बीबी माइनस कर दिया। बैंक ने बीच में इंडियाबुल्स के साथ विलय की कोशिश की थी, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली।

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