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भारत के लिए ख्वाब सरीखी है फाइजर की कोरोना वैक्सीन, मिलने की उम्मीद बेहद कम!

अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर की कोविड-19 वैक्‍सीन (Pfizer Corona vaccine) के ट्रायल के शुरुआती नतीजे आ गए हैं। यह वैक्‍सीन साल के आखिर तक उपलब्‍ध हो सकती है। हालांकि भारतीयों को इस वैक्‍सीन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। वैक्सीन की शुरुआत डोज अमेरिका में पहले उपलब्‍ध होंगी क्‍योंकि वहां की सरकार ने फाइजर से 100 मिलियन डोज की ऐडवांस परचेज डील कर रखी है। इसके अलावा कनाडा, जापान और यूके ने भी ऐडवांस्‍ड ऑर्डर्स दे रखे हैं यानी शुरुआती सप्‍लाई रिजर्व है। इसके अलावा इस mRNA वैक्‍सीन के लिए बेहद कम तापमान (-70 डिग्री सेल्सियस) चाहिए। इसके चलते भी भारत में इस वैक्‍सीन को बड़े पैमाने पर उपलब्‍ध कराने में दिक्‍कत आ सकती है।

भारत नहीं है ग्‍लोबल डील का हिस्‍सा

फाइजर ने इस वैक्‍सीन के लिए जर्मन दवा कंपनी बायोएनटेक (BionTech) और चीनी कंपनी फोसुन (Fosun) से डील की है। जर्मन कंपनी यूरोप में और चीनी कंपनी एशिया के कई हिस्‍सों में वैक्‍सीन डिस्‍ट्रीब्‍यूट करेगी। भारत इस ग्‍लोबल डील का हिस्‍सा नहीं है। फाइजर ने वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन की बैकिंग वाले COVAX से भी कोई डील नहीं की है। फाइजर ही नहीं, भारत ने किसी भी ग्‍लोबल या घरेलू वैक्‍सीन निर्माता से ऐडवांस परचेज एग्रीमेंट नहीं किया है।

भारत में क्‍यों फाइजर की वैक्‍सीन लाने में दिक्‍कत?

mRNA वैक्‍सीन को माइनस 70 डिग्री तापमान पर स्‍टोर करने की जरूरत होगी। यह अमेरिका में ही एक बड़ी चुनौती है, भारत जैसी गर्म जलवायु वाले देश की बात तो छोड़ दीजिए। इसी वजह से राष्‍ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में ऐसी वैक्‍सीन को शामिल करने की कोशिश होगी जिन्‍हें आसानी से स्‍टोर किया जा सके।

वैक्‍सीन के लिए पहले 6 महीनों में 6 करोड़ शीशियों की जरूरत

एक बार कोई वैक्‍सीन उपलब्‍ध हो जाए तो भारत को पहले 6 महीने में सभी डोज पैक करने के लिए करीब 6.10 करोड़ वायल्‍स (शीशियों) की जरूरत होगी। वैक्‍सीन तैयार कर रहीं फार्मा कंपनियों ने इशारा किया है कि उनके पास त्‍वरित मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्‍त स्‍टॉक है। अगले छह महीनों में 9.3 करोड़ अतिरिक्‍त वायल्‍स तैयार करने की क्षमता भी भारत के पास है जिसे कंपनियां और बेहतर कर रही हैं।

वैक्‍सीन वायल-मेकर्स से भी बातचीत कर रही सरकार

वैक्‍सीन को लेकर बने नैशनल ग्रुप की एक सब-कमिटी सप्‍लाई चैन और लॉजिस्टिक्‍स को परख रही है। उसने वैक्‍सीन निर्माताओं और वायल उत्‍पादकों से बातचीत कर एक प्‍लान तैयार किया है। एक अधिकारी के अनुसार, “तीन वैक्‍सीन निर्माताओं- भारत बायोटेक, सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और कैडिला का अनुमान है कि उन्‍हें पहले छह महीनों में वैक्‍सीन स्‍टोर करने के लिए करीब 6.10 करोड़ ग्‍लास वायल्‍स की जरूरत पड़ेगी। उनके पास इस डिमांड को पूरा करने के लिए पर्याप्‍त स्‍टॉक है। हमने वायल-मेकर्स के साथ भी बातचीत की है जो और उत्‍पादन के लिए तैयार दिख रहे हैं। भारत में Schottkaisha, Saint Gobain, Borosil Klasspack और Gerresheimer India जैसी कंपनियां वायल बनाने में सबसे आगे हैं।

शुरुआत में 20-25 करोड़ लोगों को वैक्‍सीन की तैयारी

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कहा है कि एक बार कोविड-19 की कोई वैक्‍सीन अप्रूव हो जाए तो जुलाई 2021 तक 25-30 करोड़ भारतीयों को टीका लगाने की तैयारी है। सभी वैक्‍सीन दो डोज वाली हैं, ऐसे में पहले चरण के लिए करीब 50 करोड़ डोज की जरूरत पड़ेगी। वैक्‍सीन निर्माताओं का कहना है कि वैक्‍सीन को मल्‍टी-डोज वायल्‍स में स्‍टोर किया जा सकता है। एक वायल में 10 डोज तक स्‍टोर की जा सकती हैं।

 

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