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भारत को मिसाइल लेकर उड़ने वाले खतरनाक ड्रोन देगा अमेरिका, अब लद्दाख में चीनी सेना की खैर नहीं !

लद्दाख में भारत ने चीन को लगातार कई मोर्चों पर तगड़ी शिकस्त दी है. भारतीय सेना चीन की पीएलए को पेंगोंग के ऊंचाई वाले इलाके से खदेड़ दिया है. चीन बौखलाया हुआ है. दुनिया में उसकी बदनामी हो रही है. वह इस शिकस्त का बदला लेने के लिए साजिश रच रहा है. चीन भारत पर सामने से हमला नहीं कर सकता, वह चुपके कायराना हरकत को अंजाम देने की जुगत में है लेकिन भारत ने उसे मुंहतोड़ जवाब देने के लिए कमर कस ली है. भारत अब अमेरिकी से खतरनाक ड्रोन खरीदने जा रहा है. ये ड्रोन मिसाइल लेकर भी उड़ान भरेंगे और दुश्मन सामने आते ही उस पर हमला कर खत्म कर देंगे.

अब भारत मिसाइल लेकर उड़नेवाले ड्रोन के लिए अमेरिका से बात करेगा. वहीं इजरायल से लिए गए ड्रोन सिस्टम को अपग्रेड करवाया जाएगा. इतना ही नहीं डीआरडीओ भी ड्रोन बनाने की शुरुआत करेगा. दरअसल, भारत को ऐसा लगा कि चीनी ड्रोन सिस्टम को टक्कर देने के लिए अपने ड्रोन सिस्टम में ये बदलाव जरूरी हैं.

भारत, अमेरिका से 30 MQ-9B गार्जियन ड्रोन खरीदेगा. जल्‍द ही इस ड्रोन से जुड़ा खरीद प्रस्‍ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली रक्षा खरीद परिषद में पेश किया जाने वाला है. बताया जा रहा है कॉन्ट्रैक्‍ट साइन होने के कुछ समय के अंदर ही छ: ड्रोन भारत को मिल जाएंगे. यह 2.5 टन तक के हथियार लेकर 40 हजार फीट तक उड़ सकता है. इसमें चाहे तो एयर-टु-एयर मिसाइल या लेजर गाइडेड बम भी रखे जा सकते हैं.

6 ड्रोन की कीमत 600 मिलियन डॉलर यानी 4,400 करोड़ रुपए होगी. अगले कुछ माह में ये ड्रोन भारत को मिल जाएंगे. बाकी बचे 24 में से आठ ड्रोन अगले तीन सालों तक भारत को मिलेंगे. यह डील पिछले तीन सालों से अटकी है. साल 2017 में 22 सी गार्डियन की डील हुई थी. इसके बाद इसे साल 2018 में तीनों सेनाओं के लिए ड्रोन खरीद डील में बदल दिया गया.

दूसरी तरफ भारत इजरायल से बात करेगा. दरअसल, भारत ने इजरायल से मध्यम ऊंचाई वाले हेरोन ड्रोन खरीदे थे. भारत चाहता है कि अब इजरायल इन्हें अपग्रेड करके इनसे कम्यूनिकेशन के लिए सेटलाइट लिंक्स जोड़े. इससे हाथ के हाथ जानकारी मिलती रहेगी. इतना ही नहीं भारत का डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) भी मध्यम रेंज वाले ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम पर काम करेगा.

बता दें कि पिछले दिनों खबर आई कि भारत की तरफ से चीन की किसी भी गुस्‍ताखी का जवाब देने के लिए ब्रह्मोस और निर्भय क्रूज मिसाइल के अलावा जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल को भी तैनात कर दिया है.

इससे पहले खबर आई थी कि भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लद्दाख के चुमार-डेमचोक क्षेत्र में टैंक और बख्तरबंद वाहनों को तैनात किया है. सेना ने BMP-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स के साथ T-90 और T-72 टैंकों की तैनाती की है.

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