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भारत ने सीमा पर आखिर ऐसा किया क्या, जो चीन बार-बार तिलमिला रहा ?

जब अटल जी प्रधानमंत्री और जॉर्ज फर्नांडिस जी रक्षा मंत्री हुआ करते थे, तब तत्कालीन सरकार खासकर जॉर्ज फर्नांडिस को ये लगा की बॉर्डर एरिया अभी भारतीय सेना के लिए उतनी अच्छी तरह तैयार नहीं है। क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है और उसे दूर करने के लिए उन्होंने कुल 61 स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर लोकेशन को चिन्हित किया और फैसला लिया गया की पुरे लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर स्ट्रेटेजिक सड़के बनायीं जाएँगी।

जब डोकलाम विवाद हुआ, बातचीत हुई तो दोनों देशो ने फैसला लिया कि सेना पीछे करेंगे लेकिन अभी फिर से चीन गलवान घाटी में आ टपका। अब ऐसा क्यों हो रहा है उसके पीछे कई कारण है।

वाजपेयी जी की सरकार में जो सड़क बनाने का फैसला लिया गया था उसका काम 2004-14 के बीच पूरी तरह लटका हुआ था लेकिन 2014 के बाद से तेजी से हो रहा है और वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार लगभग 75% सड़क बनकर तैयार हो गयी है। वही सड़क अब लद्दाख तथा दौलतबेग ओल्डी में बन रही है।

क्षेत्र के मैप में देंखे तो दौलतबेग ओल्डी एरिया सियाचिन के ठीक निचे है। और इन दोनों का स्ट्रेटेजिक महत्त्व इतना ज्यादा है कि इसकी कल्पना नहीं की जा सकती है।

सियाचिन ग्लेशियर पूरी दुनिया का सबसे बड़ा मिलिट्री अड्डा है, वही दूसरी तरफ दौलतबेग ओल्डी जो सियाचिन के नीचे है वहां भारतीय एयरफोर्स पूरी तयारी के साथ बैठी हुई है।

गलवान घाटी जिसको लेकर विवाद मचा हुआ है वह दौलतबेग ओल्डी से लगभग 20 किमी निचे ही है।

भारत अपनी स्ट्रेटेजिक पहुँच मजबूत करते हुए कश्मीर से दौलतबेग ओल्डी तक सड़क तो बना ही रहा था, उसके साथ ही भारत ने दर्बुक श्याक नदी पर सुपर ब्रिज भी बना दिया जो अभी 2019 में बनकर तैयार हुआ है।

अब गलवान घाटी जो की भारत का हिस्सा है तो उसे जोड़ना जरुरी था, ऐसे में मोदी सरकार ने फैसला किया की जो सड़क दौलतबेग ओल्डी तक जा रही है उससे 10 किमी लम्बा एक लिंक रोड गलवान घाटी की तरफ ले जाएंगे और वो सड़क बहुत तेजी से बन रही है, इस सड़क का महत्त्व समझिये की अगर ये लिंक रोड न होती तो भारतीय सेना को गलवान घाटी पहुंचने में लगभग 8 घंटे लगते लेकिन इस सड़क की वजह से अब सेना आधे घंटे में पहुंच सकती है।

अब जब ऊपर दौलतबेग ओल्डी में एयरफोर्स और गलवान घाटी में भारतीय सेना हो तो चीन को पसीना आना स्वाभाविक है। बस चीन की समस्या यही है और चीन कह रहा है की इस सड़क का काम बंद करो तभी हम पीछे हटेंगे।

पिछले दो सालो में मोदी सरकार ने एक और बढ़िया चाल चली की गलवान घाटी में पर्यटक को भेजना शुरू कर दिया जिससे भारत को एक महत्वपुर्ण बढ़त मिल रही है, क्योंकि पर्यटक को परमिशन तो भारत ही दे रहा है।

चीन को ये लग रहा था की भारत दौलतबेग ओल्डी तक सड़क नहीं बना पायेगा क्योंकि पहाड़ों को काटना और स्ट्रेटेजिक सड़क बनाना आसान नहीं होगा लेकिन चीन का माथा तब ठनका जब सड़क बनकर तैयार हो गयी।

भारत ने दो कदम और आगे जाते हुए दौलतबेग ओल्डी में C-17 ग्लोबमास्टर और हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट को उतार दिया और इससे चीन को बहुत बड़ा झटका लगा।

चीन का असली डर दौलतबेग ओल्डी में भारतीय एयरफोर्स का मौजूद होना ही है क्योंकि वहां से चीन को हम तुरंत पीट सकते है लेकिन चीन का वहां तक पहुंचना आसान नहीं है, इसके साथ गलवान घाटी एयरफोर्स की नजर में भी रहता है, ऊपर से सेना मौजूद है।

एक बार ये भी देखिये की सियाचिन में हमारी सेना जहाँ है और जहाँ से CPEC निकल रहा है वो कितनी दूर है, आप समझ जायेंगे की चीन के लिए भारत कितना बड़ा खतरा है क्योंकि सियाचिन में फ़ोर्स तथा दौलतबेग ओल्डी में एयरफोर्स दोनों मिलकर चीन के इस सीपेक को पूरी तरह काट सकते है।

यहाँ हमें ये नहीं सोचना चाहिए की भारत ने कुछ नहीं किया, भारत ने पुरे लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल यानि अरुणाचल से सियाचिन तक सेना लगा दी है, हमारी नेवी फॉरवर्ड पोजीशन में है और चीन इसी वजह से बौखला गया है।

चीन बहुत चालाकी से साइकोलॉजिकल गेम खेल रहा है जिससे भारतियों को डराया जा सके, ये जो मीडिया में ड्रामा, आर्टिकल, सोशल मीडिया पर चीन की प्रोपेगेंडा मशीनरी सब उसी गेम का पार्ट है।

हाल ही में नेपाल द्वारा सीमा पर फायरिंग, पकिस्तान की एक्टिविटी तेज होना, ये सब एक साथ काम कर रहे है।

लेकिन भारत पूरी तरह तैयार और मजबूत है, सेना को छूट मिली हुई है, ईस्टर्न फ्लीट नेवी आगे जा रही है, सरकार सतर्क है बाकि आर्थिक बहिष्कार का मुद्दा हमे संभालना है।

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