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दक्षिण अफ्रीका भी चीन से बोला- अपनी कूड़ा वैक्सीन धरे रहो, हम भारत से लेंगे 15 लाख डोज

अब पूरे विश्व में भारत की वैक्सीन कूटनीति शुरू हो गई है। चीन ने जहां पूरी दुनिया में कोरोनावायरस देकर अपनी भद्द पिटाई है तो भारत वैक्सीन देकर अपने सहयोग का परिचय दे रहा है। ब्राजील पहले ही भारत की स्वदेशी वैक्सीन को इस्तेमाल करने की इच्छा रखते हुए उसके 50 लाख डोज को खरीदने की बात कर चुका है। नेपाल और श्रीलंका जैसे देश भी भारत से वैक्सीन की उम्मीद लगा रहे हैं तो वहीं अब दक्षिण अफ्रीका भारत में बनने वाली ऑक्सफ़ोर्ड की एस्ट्रोजैनेका वैक्सीन खरीदने की बात कर रहा है।

दक्षिण अफ्रीका ने भारत में बन रही ऑक्सफ़ोर्ड वाली एस्ट्रोजैनेका की वैक्सीन की खरीद पर अपनी दिलचस्पी दिखाई है। दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि वो अपने देश के स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाने के लिए एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की 1.5 मिलियन खुराक का भारत से आयात करेगा। यह दक्षिण अफ्रीका की COVID-19 वैक्सीन की खरीद की पहली घोषणा है क्योंकि वहां कोरोनावायरस के मामले अब काफी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

इस मामले में वैक्सीन का प्रोडक्शन करने वाली भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट का कहना है कि पहली 10 लाख वैक्सीन का डोज इस महीने के अंत और अगली 5 लाख डोज अगले महीने फरवरी में निर्यात की जाएंगी। दक्षिण अफ्रीका की सरकार का कहना है कि ये वैक्सीन सीधे मैन्युफैक्चरर कंपनी से खरीदी जाएगी, और 2021 के अंत तक वहां की सरकार दक्षिण अफ्रीका की 61 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाने का प्लान बना रही है, जिसे कुछ विश्लेषक असंभव भी बता रहे हैं।

दिलचस्प बात ये है कि अब भारत वैक्सीन के मामले में सबसे ऊपर की श्रेणी में आ रहा है। हाल ही ब्राजील ने भी भारत की स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक की को-वैक्सीन के 50 लाख डोज खरीदने की बात कही थी क्योंकि ये सबसे असरदार वैक्सीन मानी जा रही है और इसमें किसी भी तरह के साइड इफेक्ट्स की संभावना बेहद कम है। दूसरी ओर दुनिया को कोरोनावायरस जैसा आतंक देने वाले चीन की वैक्सीन में साइड इफेक्ट्स की भरमार है।

वहीं नेपाल समेत श्रीलंका सरकार भी भारत से कोरोनावायरस की  वैक्सीन की उम्मीद रख रहे हैं, जिसको लेकर भारत सकारात्मक रुख दिखा रहा है। ये वही नेपाल और श्रीलंका हैं जो चीन के इशारों पर कुछ वक्त पहले भारत के साथ अपने रिश्तों को बर्बादी की तरफ ले जा रहे थे, लेकिन भारत की वैक्सीन कूटनीति इन पर पूरी तरह भारी पड़ रही है और ये भारतीय अस्मिता के लिए सकारात्मक समय है।

भारतीय में मैन्युफैक्चर हो रही दोनों ही वैक्सीन का खर्च भी बेहद कम है। ऐसे में वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का स्थान सर्वोच्च स्तर पर जा रहा है, और वैक्सीन के जरिए भारत एक नई कूटनीतिक बिसात बिछा रहा है जिसमें वैश्विक हित भी है, और भारतीय महत्वकांक्षाओं की पूर्ति भी।

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