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मंगल से आई आवाज: रोवर पर्सिवरेंस ने मंगल ग्रह से भेजा पहला ऑडियो-वीडियो संदेश

लाल ग्रह की अबूझ पहेलियों को सुलझाने गए नासा के Mars Perseverance रोवर ने मंगल ग्रह का पहला वीडियो और ऑडियो भेजा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने रोवर के वीडियो शेयर किया है और इसे मंगल ग्रह पर कैसे लैंड करें, नाम दिया है। नासा के इस ऑडियो और वीडियो से लाल ग्रह के बारे में इंसान की और ज्‍यादा समझ बढ़ी है। नासा के रोवर में लगे कैमरों ने पहली बार दुनिया को दिखाया है कि मंगल ग्रह पर किस तरह से लैंडिंग होती है। यही नहीं रोवर पर लगाए गए माइक्रोफोन ने कुछ सेकंड का ऑडियो भेजा है जिसमें मंगल ग्रह की हवाएं और वहां रोवर के काम करने पर पैदा होने वाली आवाज रेकॉर्ड हुई है। आइए देखते हैं नासा का अद्भुत विड‍ियो और सुनते हैं लाल ग्रह की आवाज…

​नासा के विडियो में द‍िखा, कैसे मंगल ग्रह पर उतरते हैं रोवर

नासा की ओर से जारी वीडियो में मंगल ग्रह पर यान के उतरने की पूरी प्रक्रिया नजर आ रही है। इस वीडियो की शुरुआत रोवर के मंगल ग्रह के वातावरण में पहुंचने के ठीक 230 सेकंड बाद होती है। मंगल ग्रह के 7 मील ऊपर नासा के रोवर का पैराशूट खुल जाता है। वीडियो का अंत रोवर के मंगल ग्रह की सतह को छूने के साथ होता है। नासा से जुड़े थॉमस जुरबूचेन ने कहा, ‘रोवर के लैंडिंग का यह वीडियो बहुत शानदार है और सूट पर ज्‍यादा दबाव डाले बिना आप इसे कर सकते हैं।’ उन्‍होंने कहा कि यह हर युवा महिला और पुरुष वैज्ञानिक के लिए जरूरी होना चाहिए जो दूसरी दुनिया की खोज करना चाहते हैं और ऐसे यान बनाना चाहते हैं जो उन्‍हें दूसरी दुनिया में ले जाए। नासा के इस अत्‍याधुनिक रोवर में कुल 23 कैमरे लगे हुए हैं। इसमें जूम करने और रंगीन वीडियो बनाने की क्षमता है। रोवर में एक हेलीकॉप्‍टर लगा है जिसे Ingenuity नाम दिया गया है। यह रोवर मंगल ग्रह पर उतरने के बाद नासा के वर्ष 2006 में भेजे गए ऑर्बिटर की मदद से अपना डेटा और तस्‍वीरें भेज रहा है।

​नासा के रोवर ने भेजी मंगल ग्रह की पहली आवाज

नासा के रोवर ने अपने माइक्रोफोन की मदद से लाल ग्रह की हवाओं की कुछ सेकंड की आवाज को भेजा है। हालांकि माइक्रोफोन ने बहुत इस्‍तेमाल किए जाने वाला डेटा नहीं भेजा है। Mars Perseverance रोवर ने अपने ट्विटर अकाउंट से मंगल ग्रह की आवाज को शेयर किया है। नासा के रोवर ने मंगल ग्रह पर उतरने की कुल 23000 तस्‍वीरें भेजी हैं। यही नहीं अभी तक किसी भी अंतरिक्ष यान ने उतरने का वीडियो कैमरे में कैद नहीं किया है। नासा से जुड़े अल चेन ने कहा कि ये वीडियो और तस्‍वीरें हमारा सपना था। इसका सपना हम कई वर्षों से देख रहे थे। नासा के 5 कैमरों ने एक साथ रोवर के मंगल ग्रह पर उतरने को रेकॉर्ड किया। इस दौरान यह क्राफ्ट 7 मिनट में 12 हजार मील प्रतिघंटे की रफ्तार से 0 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर आ गया और सतह पर लैंड कर गया। नासा का रोवर जेजेरो क्रेटर में उतरा है जिसे मंगल की प्राचीन झील का तल माना जाता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगर मंगल पर कभी जीवन था, तो उसके संकेत यहां जीवाश्मों में मिल सकेंगे।

ल‍िंंक पर क्लिक करके सुनें मंगल ग्रह की पहली आवाज

क्या मंगल ग्रह पर है जीवन? नासा का रोवर करेगा तलाश

NASA का Perseverance रोवर मंगल पर ऐस्ट्रोबायॉलजी से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब खोजेगा। इनमें से सबसे बड़ा सवाल है- क्या मंगल पर जीवन संभव है? यह मिशन न सिर्फ मंगल पर ऐसी जगहों की तलाश करेगा जहां पहले कभी जीवन रहा हो बल्कि अभी वहां मौजूद माइक्रोबियल लाइव के संकेत भी खोजेगा। Perseverance रोवर कोर वहां चट्टानों और मिट्टी से सैंपल लेगा और भविष्य में वहां जाने वाले मिशन इन सैंपल्स को धरती पर वापस लेकर आएंगे। दरअसल, इन सैंपल्स को स्टडी करने के लिए वैज्ञानिकों को बड़े लैब की जरूरत होगी जिसे मंगल पर ले जाना संभव नहीं है। इसके अलावा मिशन ऐसी जानकारियां इकट्ठा करेगा और टेक्नॉलजी को टेस्ट करेगा जिनसे आने वाले समय में मंगल पर इंसानों को भेजने का तरीका खोजा जा सके। इसमें सबसे अहम होगा मंगल के वायुमंडल में ऑक्सिजन बनाने का तरीका खोजना। Perseverance में Mars Oxygen In-Situ Resource Utilization Experiment यानी MOXIE नाम की डिवाइस लगाई गई है जो वहां ऑक्सिजन पैदा करने की कोशिश करेगी।

​Mars Perseverance कैसे करेगा खोज?

Perseverance में 23 कैमरे और 2 माइक्रोफोन लगे हैं। इसके मास्ट में लगा मास्टकैम-Z ऐसे टार्गेट्स पर जूम करेगा जहां वैज्ञानिक दृष्टि से रोचक खोज की संभावना हो। मिशन की साइंस टीम Perseverance के SuperCam को इस टार्गेट पर लेजर फायर करने की कमांड देगी जिससे एक प्लाज्मा क्लाउड जनरेट होगा। इसके अनैलेसिस से टार्गेट की केमिकल बनावट को समझा जा सकेगा। अगर इसमें कुछ जरूरी मिला तो रोवर की रोबॉटिक आर्म आगे का काम करेगी। Perseverance का सबसे खास फीचर है इसका सैंपल कैशिंग सिस्टम। मोटर, प्लैनेटरी गियरबॉक्स और सेंसर से बना यह क्लीन और कॉम्प्लेक्स मकैनिज्म पूरे मिशन की सफलता की अहम कड़ी है। मंगल पर मिले सैंपल्स को इसकी मदद से इकट्ठा करने के बाद सैंपल ट्यूब में डिपॉजिट कर दिया जाएगा। भविष्य में जब धरती से मिशन मंगल पर जाएंगे तो इससे ये सैंपल निकालकर वापस धरती पर लाएंगे। यहां इन्हें स्टडी किया जाएगा।

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