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महामारी के संकट से जूझ रही दिल्ली पर अब इस बीमारी का भी खतरा बढ़ा

नई दिल्ली :  एक तरफ दिल्ली पहले ही कोरोना के खतरे से जूझ रही है तो दूसरी तरफ अब दिमागी बुखार के बढ़ने के खतरा पैदा हो गया है। जिस तरह चार साल पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जापानी इंसेफ्लाइटिस (दिमागी बुखार) से 70 बच्चों की जान गई थी, कुछ ऐसे ही हालात दिल्ली में भी पैदा हो सकते हैं। ऐसा इसलिए कि जिन मच्छरों के काटने से जापानी इंसेफ्लाइटिस होता है, उनकी संख्या दिल्ली में तय मानकों से करीब 6-7 गुना अधिक बढ़ गई है। एमसीडी की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक मच्छर वेस्ट दिल्ली में हैं। यहां मच्छरों का घनत्व 7.2 मैन/ घंटा मापा गया है जो साउथ एमसीडी के किसी भी जोन की तुलना में सबसे अधिक है। नॉर्थ एमसीडी में हालात और भी बुरे हैं।

एमसीडी पब्लिक हेल्थ विभाग के अफसरों के अनुसार, मच्छरों की वैसे तो सैकड़ों प्रजातियां होती हैं, लेकिन सभी के काटने से बीमारी नहीं होती। मच्छरों की तीन प्रजातियां सबसे खतरनाक हैं जिनके काटने से डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया (हाथीपांव) और दिमागी बुखार होता है। इसमें क्यूलेक्स ऐसा मच्छर है जो घरों में पाया जाता है और मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फाइलेरिया और दिमागी बुखार होता है। साल 2017 में दिमागी बुखार से ही गोरखपुर में 70 बच्चों की मौत हो गई थी। ऐसे मच्छरों का घनत्व शून्य हो तो बेहतर है। लेकिन साउथ एमसीडी के चारों जोन में व नॉर्थ एमसीडी के तीन जोन में इनका घनत्व काफी अधिक पाया गया है। एनोफिलिन और एडिस मच्छरों का घनत्व शून्य है। इनके काटने से मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां होती हैं।

यहां ज्यादा है मच्छरों का घनत्व
साउथ एमसीडी एरिया में मच्छरों का घनत्व मापने के लिए प्रत्येक जोन में अलग-अलग जगहों से सैंपल लिया गया। इसमें सेंट्रल जोन के तुगलकाबाद एक्सटेंशन, साउथ जोन में नेब सराय, नजफगढ़ जोन में महावीर एनक्लेव और वेस्ट जोन में हरिनगर स्थित पीली कोठी के आसपास से सैंपल लिया गया। तुगलकाबाद एक्सटेंशन में मच्छरों का घनत्व 6.6, नेब सराय में 5.8, महावीर एनक्लेव में 4.8 और हरिनगर की पीली कोठी के आसपास 7.2 मैन/घंटा पाया गया। पब्लिक हेल्थ विभाग के एंटोमॉलोजिस्ट का कहना है कि मच्छरों यह घनत्व अधिक है। नियमों के अनुसार, मच्छरों का घनत्व शून्य होना चाहिए। लेकिन दिल्ली जैसे शहर में घनत्व शून्य नहीं हो सकता, लेकिन घनत्व 1 या 2 से अधिक होना खतरे की घंटी है।

 

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