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महाशक्तिशाली देश बनने के और नजदीक पहुंचा भारत, इस खतरनाक मिसाइल का जल्द करेगा सौदा

 

भारत एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है. आज पूरा विश्व भारत को शक्ति शाली देश के रूप में देखता है. जहां एक तरफ भारत के एक के बाद एक मिसाइल और हथियारों के परिक्षण से चीन और पाकिस्तान के पसीने छूट रहे थे वहीं दूसरी तरफ भारत अभी भी लगातार अपनी हथियारों की तकनीक और उनसे जुड़े समझौतों पर अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर रहा है. बता दें भारत अभी तक ज्यादातर मिसाइलें और रक्षा से संबंधी हथियार दूसरे देशों से खरीदता आ रहा है. लेकिन, आने वाले समय में भारत की ताकत और अधिक बढ़ने वाली है. इसका मतलब आने वाले समय में भारत अपने स्वदेशी हथियारों को दूसरे देशों को बेचेगा भी. तो आइये अब आपको पूरी खबर से रूबरू करते हैं की भारत आने वाले समय में कैसे अपने आप को दुनिया के समक्ष रखेगा.

दरअसल, अगले साल भारत और फिलीपींस उस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, जिसके तहत फिलीपींस भारत से ब्राह्मोस मिसाइलें खरीदेगा। अगले साल होने वाले समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते शामिल होंगे। बता दें कि ब्राह्मोस मिसाइलों को भारत-रूस ने संयुक्त रूप से बनाया है।
नई दिल्ली में मौजूद भारत-रूस संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस की एक टीम के, जो हथियार प्रणाली का प्रोडक्शन करती है, फिलीपींस की सेना को पहली बार मिसाइलों की आपूर्ति के लिए सौदे के कुछ शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए दिसंबर महीने में मनीला का दौरा करने की उम्मीद है।

एक शख्स ने बताया, ”मनीला दौरे पर जाने वाली ब्रह्मोस एयरोस्पेस की टीम उन छोटी-मोटी दिक्कतों को सुलझाएगी ताकि आने वाले समिट में इस समझौते को फाइनल किया जा सके। बाकी सभी चीजें फाइनल हो गई हैं।” उन्होंने आगे बताया, ”हालांकि, अभी तक पीएम मोदी और रोड्रिगो दुतेर्ते के बीच होने वाले समिट की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि अगले साल फरवरी में समिट का अयोजन हो सकता है। बैठक के दौरान भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और उसके फिलीपींस समकक्ष के बीच आईसीटी और वायु अधिकारों के बीच सहयोग सहित कई अन्य समझौतों पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।”

वहीं, भारत और फिलीपींस के बीच 6 नवंबर को हुई विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके समकक्ष त्योदोरो लॉकसिन के बीच वर्चुअल मीटिंग में ही रक्षा सहयोग और खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद थी। इसी में ब्राह्मोस मिसाइलों का समझौता भी शामिल होता, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि औपचारिकता की वजह से हस्ताक्षर नहीं हो सके। हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी उपलब्ध नहीं थे और यह एक औपचारिकता थी।

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