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मां के दूध से मात खाई महामारी, जितने नवजात कोरोना संक्रमित हुए, सब हो गए ठीक

सूरत. परिस्थितियां कैसी भी हो मां हमेशा अपने बच्चों की रक्षा करती है। कोरोना काल में भी यह बात साबित हुई है। मां महामारी में भी बच्चों के लिए ढाल बन रही है। मां का दूध रक्षा कवच बना हुआ है। मां भले ही कोरोना पॉजिटिव रही हो, लेकिन उसका बच्चे को संक्रमण नहीं लगा। यहां तक कि नवजात पॉजिटिव मां का दूध भी पीता रहा, लेकिन उसे कोरोना छू भी नहीं पाया।

डॉक्टर बताते हैं कि मां का दूध नवजात के लिए सबसे अच्छी दवाई होती है। भले ही कोरोना की अब तक कोई दवाई नहीं बनी, लेकिन यह मां के दूध की ताकत है कि नवजात बच्चे सबसे ताकतवर कोरोना वॉरियर साबित हुए हैं। मां के दूध में हजारों बीमारियों को हराने की क्षमता होती है। मां भले भी कोरोना पॉजिटिव पर उसके दूध में इतनी ताकत है कि बच्चे को मामूली समस्या भी नहीं होती।

इस बात की पुष्टि कोरोना काल के आंकड़े भी कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान सिविल और स्मीमेर अस्पताल में 241 कोरोना पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलेवरी हुई। इनमें से मात्र 13 के नवजात ही कोरोना पॉजिटिव पैदा हुए। प्रोटोकाल के अनुसार अन्य नवजातों का टेस्ट हुआ पर कोरोना के कोई भी लक्षण उनमें नहीं मिले और न ही अब तक इन बच्चों को कोई समस्या हुई है। वहीं 228 बच्चे कोरोना निगेटिव मिले। इस दौरान कोरोना पॉजिटिव मां का इलाज होता रहा।

बच्चे दूध पीते रहे पर किसी भी बच्चे को कोई समस्या नहीं हुई। कुछ दिन के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। कोरोना काल में सिविल और स्मीमेर अस्पताल में सात हजार डिलेवरी हो चुकी हैं। ज्यादातर बच्चे निगेटिव हैं। अब तक जितने भी संक्रमित हुए उनमें से किसी की भी मौत नहीं हुई।

स्मीमेर में 103 मां पॉजिटिव, सिर्फ 5 नवजात संक्रमित पैदा हुए

स्मीमेर अस्पताल के गायनिक विभाग के एचओडी डॉ. अश्विन वाछानी ने बताया कि कोरोना काल में हमारे यहां करीब 4 हजार डिलेवरी हुई। इनमें से 103 गर्भवती पॉजिटिव थीं। भले ही मां कोरोना पॉजिटिव हो, लेकिन वह मास्क और अन्य प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बच्चे को दूध पिला सकती है।

मां के दूध से कोरोना नहीं फैलता। हां अगर किसी कारण से बच्चे कोरोना पॉजिटिव हुए भी तो इसका कोई प्रभाव उन पर नहीं पड़ता। यह सोचकर मां के दूध से उन्हें वंचित किया जाए तो वह अन्य बीमारियों से ग्रसित हो जाएंगे और जीवन भर नहीं उबर पाएंगे।

सिविल: 138 पॉजिटिव मां से सिर्फ 8 नवजात संक्रमित हुए

सिविल अस्पताल की गायनिक विभाग की प्रोफेसर डॉ. ध्वनि देसाई ने बताया कि कोरोना काल में हमने करीब 250 कोविड एडमिशन प्रेग्नेंसी मैनेज की हैं। जिसमें करीब 138 डिलेवरी हमारे यहां हुई हैं। मात्र 8 बच्चे ही कोरोना पॉजिटिव मिले। इन बच्चों को कोरोना के कोई लक्षण नहीं मिले। मां के दूध के कारण बच्चों की इम्युनिटी बहुत मजबूत होती है। इससे सभी जरूरी पोषक तत्व और विटामिन होते हैं। मां का दूध नवजातों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। ये हर बीमारी से बचाता है।

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