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‘मेड इन चाइना’ के दीवाने बोलते हैं ये 4 सफेद झूठ, उनको जवाब देने के लिए जानिए सच

भारत-चीन के बीच फ़ौजी तनाव के बीच चाइनीज़ सामान के बहिष्कार की अपील भी तेज़ हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्थानीय सामान ख़रीदने की अपील लोगों से कर चुकी हैं, लेकिन अब जिस तरह चीन लद्दाख में भारत की ज़मीन हड़पने की साज़िशें कर रहा है उसे देखते हुए लोगों में भारी ग़ुस्सा है। चाइनीज़ मोबाइल फ़ोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होने के कारण भारतीय बाज़ारों में पिछले कुछ सालो से छाए हुए हैं। अब अपील हो रही है कि इन सारी चाइनीज़ कंपनियों का बहिष्कार किया जाए और भारतीय सामान ख़रीदे जाएं। लेकिन भारत में चीन समर्थकों ने कुछ ऐसे झूठ फैला रखे हैं, जिनके कारण अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं। ऐसे ही कुछ झूठों का पर्दाफ़ाश हम कर रहे हैं:

1. क्या सरदार पटेल की मूर्ति चीन ने बनाई?

भारत में चीन के लिए काम करने वाले कुछ दलाल क़िस्म के लोग अक्सर यह चुटकी लेते दिखाई देते हैं कि गुजरात में बनी स्टैचू ऑफ यूनिटी चीन में बनी है। जबकि यह पूरी तरह से झूठ है। इसे भारतीय कंपनी L&T ने बनाया था। कुछ छिटपुट काम में उसने एक चीन की कंपनी से तकनीकी सहायता जरूर ली थी, लेकिन उसकी कीमत इस पूरे प्रोजेक्ट का 1 प्रतिशत भी नहीं था। तब टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार ने यह फर्जी खबर छापी थी, जिसका बाद में उसे खुद ही खंडन भी करना पड़ा था। पीएम नरेंद्र मोदी भी इस बारे में सारे तथ्य स्पष्ट कर चुके हैं (नीचे देखें वीडियो), लेकिन आज भी यह झूठ सरेआम बेशर्मी के साथ बोला जा रहा है।

पटेल की मूर्ति के चाइनीज़ होने पर पीएम मोदी का बयान सुनें:

2. क्या मोदी ने बैंक ऑफ चाइना को मंज़ूरी दी?

अक्सर कुछ लोग कहते हैं कि मोदी सरकार ने तो चीन के बैंक के लिए भारत के दरवाज़े खोल दिए। सबसे पहले 2018 में पुण्य प्रसून वाजपेयी नाम के एक क्रांतिकारी दलाल पत्रकार ने ABP न्यूज चैनल के जरिए यह झूठ फैलाया था। यह बिल्कुल सही है सरकार ने बैंक ऑफ चाइना को मंजूरी दी, लेकिन यह मुंबई में सिर्फ एक बिजनेस ब्रांच के लिए है। कई भारतीय बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, ICICI, बैंक ऑफ इंडिया की शाखाएं पहले से चीन में हैं। अब यह कैसे हो सकता है कि भारत तो अपने बैंक चीन में खोले, लेकिन उनके बैंक अपने यहां न खोलने दे?

3. मेट्रो टनल का करोड़ों का ठेका चीन को दिया?

यह झूठ भी मीडिया की उपज है कि दिल्ली से मेरठ के बीच बन रहे रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम की टनल का ठेका एक चाइनीज़ कंपनी STEC को दिया गया है। अभी किसी कंपनी को ठेका नहीं दिया गया है। इस बारे में आप हमारी विस्तृत रिपोर्ट

4. क्या चीन की कंपनी 5G नेटवर्क बिछा रही है?

यह बात सही है कि कुछ महीने पहले तक चीन की कंपनी हुवेई (Huawei) के भारत में 5G नेटवर्क बनाने की चर्चाएं थीं, लेकिन इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। मोदी सरकार ने जिस तरह BSNL को चाइनीज एक्विपमेंट खरीदने के लिए मना कर दिया है, उसके बाद Huawei की रही-सही उम्मीद भी खत्म हो चुकी है।

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