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मोदी के ‘नाइट वॉचमैन’ हैं शाह, इसलिए ‘साहेब’ करते हैं आंख बंद करके भरोसा

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे सबसे बड़ा किरदार अमित शाह ने ही निभाया है. मोदी लक्ष्य देते हैं तो उसे पूरा करने का जिम्मा अमित शाह पर ही होता है. दोनों के रिश्तों को इसी बात से समझा जा सकता है कि अमित शाह मोदी को साहेब कहकर पुकारते हैं. शायद इसीलिए अमित शाह को मोदी का नाइट वॉचमैन भी कहा जाता है, जो जरूरत पड़ने पर अपनी ही कुर्बानी दे दे.

ये बात कम ही लोग जानते हैं कि बीजेपी अध्यक्ष शतरंज के खिलाड़ी रहे हैं. शतरंज के नियम उन्होंने सियासत में भी बखूबी आजमाए हैं. तभी वह जानते हैं कि कौन मोहरा किस जगह राजा और रानी के लिए कब खतरा बन सकता है? कौन किसकी काट के लिए काम आ सकता है? शतरंज की तरह शाह की सियासत के कोई तयशुदा नियम नहीं हैं, जैसा मौका वैसी चाल. शतरंज के खिलाड़ी की तरह ही चुनाव में भी जीत के लिए काम करते रहना उनका शौक बन गया है.

आज पीएम अगर किसी शख्स पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, तो वो सिर्फ और सिर्फ बीजेपी अध्यक्ष ही हैं. और ये भरोसा उन्होंने यूं ही नहीं कमाया. इसके लिए उन्होंने खुद को साबित भी किया है. ये बात जून 2013 की है, तब भी अमित शाह का पार्टी में रसूख मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे ज्यादा था. वो आरएसएस के कहने पर वाराणसी में थे. दरअसल संघ ने अमित शाह के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी डाली थी.

2014 के चुनाव में संघ ने अमित शाह से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के लिए यूपी की उपयुक्त सीट चुनने को कहा था. मोदी के लिए जीत की गारंटी वाली सीट खोजने में अमित शाह जुटे थे. शाह के तिकड़मी दिमाग ने ये बात भांप ली कि अगर यूपी में भाजपा का डंका बजाना है तो पूर्वांचल पर कब्जा करना होगा. वहीं मोदी की विकास पुरूष की छवि राज्य में कमजोर पड़ी पार्टी में नई जान फूंकने का काम करेगी.

इसके लिए शाह ने वाराणसी की सीट चुनी. तब वाराणसी सीट पर पार्टी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी काबिज थे, जो अगला चुनाव भी इसी सीट से लड़ना चाहते थे. लेकिन अमित शाह ने तय किया कि मोदी वाराणसी से होकर ही प्रधानमंत्री पद तक का सफर तय करेंगे. मगर संघ, पार्टी और मोदी को अपनी परछाईं अमित शाह पर पूरा भरोसा था. इसलिए जोशी से दो टूक कह दिया गया कि वो कानपुर से चुनाव लड़ें और वाराणसी की सीट नरेंद्र मोदी के लिए खाली कर दें.

उसके बाद जो हुआ, और जो हो रहा है, वो इतिहास के पन्नों में दर्ज होने के साथ-साथ आज भी नया इतिहास लिख रहा है.

 

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