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यूपी में कोरोना : पश्चिम से ज्यादा पूर्वांचल में हुआ घातक, जानिए वजह?

लखनऊ :  उत्तर प्रदेश 2 लाख कोरोना केस पार करने वाला देश का पांचवां राज्य बन गया है। इस लिस्ट में 7 लाख से ज्यादा केस के साथ महाराष्ट्र सबसे पहले नंबर पर है जबकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 4 लाख पर पहुंचने वाला है। कर्नाटक में कोरोना का आंकड़ा 3 लाख पार कर चुका है। पांचों राज्यों में से सबसे अधिक केस और मौत आंध्र प्रदेश से सामने आ रही है।

आंध्र प्रदेश में कोरोना के अधिक केस सामने की वजह टेस्टिंग रेट को माना जा रहा है। आंध्र में प्रति 1 हजार आबादी में 65 लोगों की टेस्टिंग हो रही है जो कि पांचों राज्यों में सबसे अधिक है। जबकि यूपी में सबसे कम प्रति 1000ट में सिर्फ 22 लोगों की टेस्टिंग हो रही है। भले ही ओवरऑल टेस्टिंग में यूपी आगे हो।

4 मार्च को यूपी में कोरोना का पहला केस आया और 6 महीने में यहां केस बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गए हैं। अब तक सिर्फ 22 देशों (भारत सहित) में ही 2 लाख से ज्यादा केस दर्ज किए गए। इनमें से अधिकतर देशों की टेस्टिंग रेट यूपी से ज्यादा ही रही है। साथ ही यहां कोरोना की रफ्तार भी धीमी रही।

यूपी में कोरोना का पहला केस आने के एक-दो महीने तक रफ्तार धीमी रही। यूपी में कोरोना की औसत वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से कम ही रही है। हालांकि जून के पहले हफ्ते से राज्य में कोरोना की रफ्तार राष्ट्रीय औसत दर से अधिक होने लगी।

यूपी में कोरोना फैलने के साथ इसका भौगोलिक विस्तार भी देखने को मिला। शुरुआत में दिल्ली से लगे पश्चिमी क्षेत्रों में महामारी फैलनी शुरू हुई थी लेकिन अब मध्यांचल और पूर्वांचल में यह पांव पसार चुका है। 1 जून को यूपी में कोरोना के कुल मामले 8, 361 थे। इसमें से 42 फीसदी केस सिर्फ पश्चिमी क्षेत्रों से थे। नोएडा, आगरा, मेरठ और गाजियाबाद हॉटस्पॉट बने हुए थे।

1 जुलाई तक यह आंकड़ा बढ़ गया और पूरे राज्य के 45 फीसदी केस पश्चिमी यूपी से सामने। नए हॉटस्पॉट में अलीगढ़, बुलंदशहर, फिरोजाबाद और हापुड़ का नाम जुड़ा। हालांकि 1 अगस्त आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पश्चिमी जिलों में कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ गई जबकि सेंट्रल और ईस्ट यूपी में कोरोना के केस तेजी से बढ़ने लगे।

जिलावार कोरोना केस का विश्लेषण करने पर कई तथ्य सामने आए, जैसे पूर्वांचल में कोरोना पश्चिम की अपेक्षा तेजी से फैला। मध्यांचल और पूर्वांचल में कोरोना के पॉजिटिव केस भी पश्चिम से ज्यादा है। इसके पीछे हेल्थकेयर सुविधा में कमी और अपर्याप्त टेस्टिंग हो सकती है। पश्चिमी क्षेत्र में कुल कोरोना केस का 45 फीसदी गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और मेरठ तक सीमित रहा।

इसी तरह रोहिलखंड के केसों को देखें तो बरेली, मुरादाबाद, रामपुर और शाहजहांपुर से सबसे अधिक 67 फीसदी केस सामने आए। मध्यांचल के केसों में लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज की हिस्सेदारी सबसे अधिक 64 फीसदी रही जबकि बुंदेलखंड में 48 फीसदी केस अकेले झांसी से आए। पूर्वांचल में कुल कोरोना केसों का 26 फीसदी वाराणसी और गोरखपुर से रहा।

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