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योगी की ‘ठाएं-ठाएं’ पुलिस का नया कांड- ‘दो दिन की बच्ची घर से बिना बताये कहीं चली गई’

मुंह से ठांय ठांय करके अपराधियों को मार भगाने वाली यूपी पुलिस यूँ ही बदनाम नहीं है. बल्कि अपने कारनामों के कारण भी वो सुर्ख़ियों में रहती है. हाल ही में यूपी पुलिस का सामना एलियन से हो गया था. बाद में पता चला की वो गुब्बारा है. और अब यूपी पुलिस ने ऐसा काण्ड कर दिया. जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे. मतलब इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी की होश उड़ जाए. साइंस फिक्शन मूवी में आपको ऐसी कहानियां देखने को मिले. अब खुद ही सोचिये की क्या दो दिन की बच्ची चल सकती है. जी हाँ मात्र दो दिन की बच्ची. जिसकी आँखें भी अभी सही से नहीं खुली होती. जिसने दुनिया में अभी पहला कदम भी नहीं रखा. जिसका विकास अभी शुरू ही हुआ था. वो बच्ची यूपी पुलिस के हिसाब से कहीं चली गई.

आप सोच रहे होंगे कि हम आज ऐसी बहकी बहकी बातें क्यों कर रहे हैं. लेकिन ये सच है. दरअसल ये अजीबो गरीब घटना हुई है आगरा में. जहाँ दो दिन की बच्ची चल कर कहीं चली गई. वो भी अपने मन से हैरान न होइए पहले ये तस्वीर देखिये. जिसके 29 वें कॉलम में लिखा है. दो दिन की नवजात बच्ची घर से बिना बताये गायब है. अब सवाल ये की जब दो दिन की बच्ची न बोल सकती है न चल सकती है तो फिर वो बिना बताये कैसे चली गई. यूपी पुलिस ने फिजिक्स के नियमों को भी ताक पर रख दिया. अमूमन एक बच्चा 1 साल के बाद ही चलना सीखता है. पर यहां दो दिन की बच्ची बिना बताये चली गई. इतनी एडवांस साइंस तो अभी फिल्मों की कहानियों में भी नहीं आई है. ये सब सुनकर तो आपका माथा भी चकरा गया होगा. पर ये पूरी तरह से सत्य है.

 

मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2010 से 31 जुलाई 2020 तक आगरा पुलिस का डाटा जो कहानी बताता है वो हैरत अंगेज है. डाटा के मुताबिक़ 41 नाबालिग लड़के लड़कियां ऐसे हैं जो दस से मिले ही नहीं हैं. और वो दो दिन की बच्ची भी पांच साल पहले खो गई थी. और सबसे बड़ी बात ये की 41 में से 37 केस ऐसे हैं जिनमे बच्चे घर से बिना बताये कहीं चले गए. सिर्फ चार केस में ही अलग अलग कारण दर्ज हैं. ये डाटा पुलिस रिकॉर्ड का है. अब ऐसे में गौर करें दो दिन की बच्ची के गायब होने का कारण भी यही है की वो घर से बिना बताये चली गई. और यही लिखकर केस दर्ज किया गया है. तो सवाल ये की लापरवाही है या फिर गलती. या फिर एक आदत जिसे वो सुधारना ही नहीं चाहते. कम से कम दो दिन की बच्ची के गायब होने का कारण तो जायज लिखना चाहिए.

इस रिपोर्ट में एक और बड़ी गलती है. जिस पर अब आलाअधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए. सूत्रों के मुताबिक़ ये बच्ची घर से नहीं बल्कि अस्पताल से गायब हुई है. ये बच्ची जिला महिला अस्पताल से गायब हो गई थी. ये मामला एमएम गेट पुलिस स्टेशन पर दर्ज किया गया. जबकि पीड़ित परिवार पुलिस स्टेशन शाहगंज इलाके का रहने वाला है. तो ये भी सवाल उठता है की जब बच्ची घर से गायब हुई तो ये मामला एमएमगेट पुलिस स्टेशन में क्यों दर्ज किया गया. जबकि एमएम गेट पुलिस स्टेशन और शाहगंज पुलिस स्टेशन की दूरी कई किलोमीटर की है.

यानी एक बच्ची गायब हो गई. एक घर में किलकारी गूंजने ही वाली थी. पर वो गायब हो गई. और पुलिस वालों ने इन सबका मज़ाक बना कर रख दिया है. कम से कम इन अधिकारियों को ये तो सोचना चाहिए था की वो मात्र दो दिन की बच्ची है. लेकिन न यूपी पुलिस का अपना अलग ही विज्ञान है. तभी तो दो दिन की बच्ची ने बोलना शुरू कर दिया. और चली गई.

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