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रफाल और पृथ्वी का जब देखा डबल डोज़, चीन का छिना चैन, पाकिस्तान के उड़े होश

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव बढ़ता ही जा रहा है. जहां एक तरफ चीन को पूरी दुनिया बॉयकॉट कर रही है. वहीं दूसरी तरफ भारत का सभी देश बाहें फैला कर दोस्ती के लिए स्वागत कर रहे हैं. पूरी दुनिया की नज़र इस वक्त भारत और चीन पर है, कि कैसे भारत-चीन को शिकस्त पर शिकस्त दे रहा है. जहां चीन अपनी गीदड़ भभकी से भारत को डराने की कोशिश करता रहा है. वही दूसरी तरफ भारत अपनी ताकत और दूसरे देशों के साथ संबंध मज़बुत कर रहा है. सबसे पहले क्वाड में ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ चीन के खिलाफ बैठक कर चीन की हवा निकाल दी थी. हर हफ्ते एक नई मिसाइल का सफल परीक्षण कर भारत चीन को अपनी ताकत दिखा रहा है.

भारत की ताकत से डरकर चीन ने भारतीय सीमा पर 60,000 सैनिक तैनात किए ताकि भारत अपने अधूरे पड़े पुलों का निर्माण न कर सके. लेकिन भारत ने फिर पलटवार कर अपनी ताकत तीन गुनी करते हुए अधूरे निर्माण को पूरा कर चीन को फिर से उसकी औकात याद दिला दी. और अब भारत ने चीन को एक और शक्ति परीक्षण कर जवाब दिया है, जिससे चीन के पैरों तले ज़मीन खिसक गयी है. दरअसल, एलएसी(LAC) पर चीन के साथ तनाव के बीच चीन को मुंहतोड़ जवाब देते हुए. भारत ने पृथ्वी-2 मिसाइल का रात्रि परीक्षण सफलतापूर्ण पूरा कर लिया है. परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम पृथ्वी 2 का कामयाब परीक्षण 16 अक्टूबर की शाम साढ़े 7 बजे हुआ.

बतादें, कि पृथ्वी-2 की स्ट्राइक रेंज 250 किलोमीटर से भी ज्यादा है. और इसका परिक्षण ओडिशा के बालासोर तट पर हुआ है. इसके साथ पिछले महीने की 23 सितंबर की शाम को भी इसी जगह पृथ्वी मिसाइल का परिक्षण भी सफल हुआ था. उस वक्त भी मिसाइल सभी की उमीदों पर खरी उत्तरी थी. आपको बता दें, कि पृथ्वी-2 जमीन  से जमीन पर ही वार करने वाली मिसाइल है. इसलिए इसका नाम पृथ्वी मिसाइल रखा गया है. पृथ्वी-1 और पृथ्वी-2 के बीच में फर्क को भी समझ लीजिए . बात करें पृथ्वी I की तो ये 150 किलोमीटर (93 मील) की सीमा के साथ एक एकल चरण वाली तरल-ईंधन सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है. जिसकी अधिकतम क्षमता 1000 किलो ग्राम है. इसकी सटीकता 10 से 50 मीटर (33 से 164 फीट) तक है और इसे ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है.

पृथ्वी मिसाइल के इस वर्ग को 1994 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था. डीआरडीओ के प्रमुख अविनाश चंदर के अनुसार 150 किलोमीटर की दूरी वाली पृथ्वी मिसाइल को प्रहार मिसाइल से बदला जाएगा, जो अधिक सक्षम है और इसमें अधिक सटीकता है. चंदर के अनुसार, सेवा से हटाई गई पृथ्वी I मिसाइलों को अधिक समय तक इस्तेमाल करने के लिए अपग्रेड किया जाएगा.

पृथ्वी II भी एक एकल-चरण तरल-ईंधन वाली मिसाइल है. इसकी अधिकतम वारहेड की क्षमता 500 किलोग्राम है, लेकिन 250 किमी (160 मील) की विस्तारित सीमा के साथ. ये भारतीय वायु सेना के प्राथमिक उपयोगकर्ता होने के साथ विकसित किया गया था. 27 जनवरी 1996 को पहली बार परीक्षण किया गया और 2004 में विकास के चरण पूरे किए गए. इस संस्करण को सेना में भी शामिल किया गया है. एक परीक्षण में, मिसाइल को 350 किमी (220 मील) की विस्तारित सीमा के साथ लॉन्च किया गया था और एक जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली के कारण नेविगेशन में सुधार हुआ था. मिसाइल में एंटी बैलिस्टिक मिसाइलों को धोखा देने के फिचर्स भी हैं.

इसके साथ एक और खुश खबरी है, लेकिन ये खबर चीन की रातो की नींद और ज्यादा उड़ा देगी. दरअसल, इंडियन एयर फोर्स को जल्द ही राफेल लड़ाकू विमानों की दूसरी खेप मिलने वाली है. जिसमे करीब 3 से 4 राफेल फाइटर जेट नवंबर के पहले हफ्ते में हरियाणा में मौजूद एयर फोर्स के अंबाला बेस पहुंचेंगे. 5 राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप 29 जुलाई को भारत आ चुकी है. और तभी से भारत ने चीन और उसके नापाक साजिशों में शामिल पाकिस्तान का जीना दुश्वार किया हुआ है.

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