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राजपूत राजकुमार की दीवानी थी अलाउद्दीन खिलजी की बेटी, ऐसा निकला इश्क का अंजाम

संजय लीला भंसाली की हिट फिल्म पद्मावती वास्तव में इतिहास का हिस्सा थी या कोई काल्पनिक पात्र, इस पर खूब बहस हुई थी। लेकिन पद्मावती विवाद के बीच एक ऐसी कहानी भी सामने आई थी, जिसके बारे बहुत ही कम लोगों को पता होगा। दरअसल कहा जा रहा है कि राजस्थान में ही एक ऐसा योद्धा भी हुआ था जिस पर अलाउद्दीन खिलजी की बेटी मर मिटी थी लेकिन इसका जो अंजाम हुआ था वो बेहद ही खौफनाक था । आज भी राजस्थान में इसके किस्से सुनाए जाते हैं और आज हम आपको इसी वाक्ये से रूबरूं कराने जा रहे हैं।

वीरमदेव के एकतरफा प्यार में दिवानी थी अलाउद्दीन खिलजी की शहजादी –

दरअसल कहानी कुछ ऐसी है कि राजस्थान के जालौर में एक वीर राजपूत था ..राजकुमार वीरमदेव । वीरमदेव को कुश्ती में महारत हासिल थी और उसकी वीरता के चर्चें दूर दूर तक थे.. जालौर के सोनगरा चौहान शासक कान्हड़ देव का पुत्र वीरमदेव उस समय दिल्ली दरबार में रहता था और जब वह यहां रहता था तो दिल्ली के तत्कालीन बादशाह अल्लाउद्दीन खिलजी की शहजादी फीरोज को वीरम से प्यार से एक तरफा प्यार हो गया।
फिर शहजादी ने उसे किसी भी कीमत पर पाने की ठान ली .. और कहा , ‘वर वरूं वीरमदेव ना तो रहूंगी अकन कुंवारी’ यानि मै निकाह करूंगी तो वीरमदेव से नहीं तो जीवन भर कुंवारी रहूंगी। बेटी की जिद और राजनीतिक लाभ पाने के लिए बादशाह अल्लाउद्दीन खिलजी ने भी वीरमदेव के पास शादी का प्रस्ताव भेज दिया पर वीरम ने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया।
जवाब में वीरम ने कहा..
‘मामो लाजे भाटियां, कुल लाजे चौहान,जे मैं परणु तुरकणी, तो पश्चिम उगे भान…।”
यानि अगर मैं तुरकणी से शादी करूं तो मेरे मामा (भाटी) का कुल और स्वयं का चौहान कुल लज्जित हो जाएंगे और ऐसा तभी हो सकता है जब सूरज पश्चिम से उगे।
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