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राफेल से एक कमी पूरी हुई तो दूसरी परेशानी तैयार, एयर फोर्स के सामने बड़ा संकट

नई दिल्ली
बीते कुछ दशकों में देश की सुरक्षा को ताक पर रखते हुए सैन्य बलों की जरूरतों को किस तरह नजरअंदाज कर दिया गया, आए दिन इसका पता चलता रहता है। 20-30 सालों में वायुसेना की हालत ऐसी हो गई है कि इसके लिए अनुमोदित 42 स्क्वैड्रन की जगह सिर्फ 30 फाइटर स्क्वैड्रन हैं। यानी, भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) युद्धक विमानों की भारी किल्लत का सामना कर रही है।

इन 30 स्क्वैड्रन में भी मुख्य रूप से मिग-21 रूसी जेट्स हैं जो पुराने पड़ चुके हैं। हालांकि, फ्रांस से 36 राफेल विमानों की डील के तहत पहले चरण में पांच जेट्स आने से वायुसेना की हालत कुछ जरूर सुधरी है। तब तक हल्के इस्तेमाल के हेलिकॉप्टरों (Light Utility Choppers) के मोर्चे पर अलार्म साउंड बजने लगा है।

एयरफोर्स ने सरकार को किया आगाह

एयरफोर्स ने कहा है कि चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों की ‘टोटल टेक्निकल लाइफ’ 2023 से खत्म होनी शुरू हो जाएगी। वायुसेना ने सरकार से ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत ऐसे लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टरों के निर्माण की परियोजना पर तेज कदम बढ़ाने का आग्रह किया है। साथ ही, रक्षा उत्पादन कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में बन रहे हेलिकॉप्टरों की डिलिवरी भी समय सीमा के अंदर किए जाने की दरकार बताई गई है। वायुसेना ने सरकार से कहा कि एचएएल के अंदर पर्याप्त संख्या में हेलिकॉप्टरों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए।

इंडियन एयरफोर्स के एक सीनियर ऑफिसर ने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय को कहा गया है कि पुरानी पीढ़ी के सिंगल इंजन वाले चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों की उम्र पूरी होने के कगार पर है। ऐसे में युद्ध अभियानों के लिहाज से हेलिकॉप्टरों के भारी अभाव की स्थिति पैदा हो रही है क्योंकि उनमें से ज्यादातर 40 साल पुराने हैं।’

सुरक्षा बलों की चिंताओं के प्रति भारत सरकार के लापरवाह रवैये का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एयरफोर्स पिछले 15 सालों से नए हल्के हेलिकॉप्टरों की मांग कर रही है और आज जब पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ संघर्ष छिड़ा हुआ है तो इसकी जरूरत का अहसास सिद्दत से किया जा रहा है। अभी आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के पास 187 चेतक जबकि 205 चीता हेलिकॉप्टर्स हैं जिनका इस्तेमाल सियाचिन जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में भी होते हैं। लेकिन, अब ये इतने पुराने पड़ चुके हैं कि लगातार क्रैश हो जा रहे हैं और इनकी सर्विसिंग की भी गंभीर समस्या है।

483 यूटिलिटी चॉपर्स की जरूरत
अभी भारतीय सेना के तीनों अंगों को 483 नए लाइट यूटिलिटी चॉपर्स की जरूरत है। इसकी पूर्ति के लिए 2015 में ही भारत और रूस की सरकारों ने संयुक्त उद्यम (Joint Venture) खोलने पर दस्तखत किए थे। इसके तहत दो इंजनों वाले 200 Kamov-226T हेलिकॉप्टरों का निर्माण किया जाना है। ये हेलिकॉप्टर बनने पर 135 आर्मी और 65 एयरफोर्स को मिलेंगे। इनकी लागत 20 हजार करोड़ रुपये आएगी। लेकिन, समझौते के पांच साल बाद भी अभी तक यह तकनीकी आकलन लेवल पर ही है, ठेके की आखिरी प्रक्रिया तो बहुत दूर की बात है।

 

रक्षा मंत्रालय को कहा गया है कि पुरानी पीढ़ी के सिंगल इंजन वाले चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों की उम्र पूरी होने के कगार पर है। ऐसे में युद्ध अभियानों के लिहाज से हेलिकॉप्टरों के भारी अभाव की स्थिति पैदा हो रही है क्योंकि उनमें से ज्यादातर 40 साल पुराने हैं।
वायुसेना के सीनियर ऑफिसर

 

ध्यान रहे कि 16 युद्धक विमानों और पायलट ट्रेनिंग के दो विमानों से मिलकर भारतीय वायुसेना का एक स्क्वैड्रन बनता है। ऐसे में अगर एयरफोर्स के पास 42 की जगह 30 स्क्वैड्रन होने का मतलब कम-से-कम 192 फाइटर जेट्स और 24 ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी है। यह कमी तब है जब भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से लगातार चुनौती मिलती रहती है।

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