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रिपोर्ट : जम्मू-कश्मीर में 14 साल के कम उम्र के बच्चों को बनाया जा रहा आतंकी

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा लगातार आतंकियों को मारे जाने के बाद भी नए-नए आतंकवादी उभरकर सामने आ रहे हैं। इसको लेकर अमेरिकी विदेश विभाग ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। विभाग की ओर से गुरुवार को पेश की गई ट्रैफिकिंग इन पर्सन्स रिपोर्ट 2019 में बताया गया है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठन सरकार के खिलाफ गतिविधियों में 14 साल से कम उम्र के बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

HT की खबर के अनुसार रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि माओवादी संगठन 12 साल से कम उम्र के बच्चों को जबरन हथियार चलाना सिखाने के साथ IED का उपयोग करना भी सिखा रहे हैं। यह स्थिति वामपंथी उग्रवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित भारत के छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्य में सबसे अधिक है। इतना ही नहीं माओवादी संगठनों से जुड़ी युवती व महिलाओं का उनके प्रभारियों द्वारा जमकर यौन उत्पीड़न भी किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत को मानव तस्करी के मामले में दूसरी श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि भारत में इसे रोकने के पूरी तरह से प्रयास नहीं किए गए, लेकिन प्रयास जारी है। पहली श्रेणी में उन देशों को रखा जाता है, जहां मानव तस्करी को रोकने के लिए आवश्यक उपायों की पूरी तरह से पालना की जाती है। भारत मानव तस्करी के मामले में पिछले एक दशक से दूसरी श्रेणी में ही बना हुआ है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत बाल यौन पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। बाहरी लोग यहां आकर कम उम्र की बालिकाओं के साथ संबंध बनाते हैं और उन्हें जबरन देह व्यापार में धकेल दिया जाता है। यह अमानवीयता का सबसे बड़ा पहलू है।

रिपोर्ट में भारत की कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि भारत में कुछ कानून के रक्षक रिश्वत के लालच में मानव तस्कर और अवैध देह व्यापार चलाने वालों का बचाव करते हैं।

भारत सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया है कि देश में तस्करों की गिरफ्तारी, मामलों की जांच और लंबित मामलों में त्वरित कार्रवाई बंद कर दी है। इससे तस्कर अपराधियों के बरी होने का प्रतिशत 83 प्रतिशत बढ़ गया।

रिपोर्ट में मानव तस्करी के लिए भारतीय पुलिस को दोषी ठहराया गया है। इसमें कहा गया है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने मामले की जानकारी होने के बाद भी उस पर कार्रवाई करने की जगह आरोपियों को बचाने का प्रयास किया है। कुछ जगह पर राजनीतिक हस्तक्षेप होने के कारण भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई।

इसी तरह कई राज्यों में सरकारों में इच्छा शक्ति की कमी के कारण मानव तस्करी से जुड़े अपराधियों पर कार्रवाई नहीं हुई।

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