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रूस को पाला बदलते देख छाती पीटा चीन- ‘हमें तो उसकी जरूरत ही नहीं’

QUAD समूह- यानि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के गठजोड़ से चीन की चिंताएँ बढ़ी हुई हैं। पिछले दिनों Global Times ने अपने एक लेख में बड़ी ही रोचक बात लिखी। GT ने लिखा कि जिस प्रकार भारत रूसी हथियारों के बल पर Quad का हिस्सा बनकर चीन को आँख दिखा रहा है, उससे मॉस्को खुश नहीं होगा। लेकिन क्या यह सच है? क्या वाकई रूस को Quad से किसी प्रकार की दिक्कत है? Quad की बड़ी ताकतों के साथ रूस के गहराते संबंध तो दूसरी ओर ही इशारा कर रहे हैं। जिस प्रकार भारत, अमेरिका और जापान के साथ लगातार रूस अपना संवाद बढ़ा रहा है, उससे यह निश्चित है कि अगर रूस Quad को अपने सहयोगी की तरह नहीं देखता है तो किसी खतरे के रूप में नहीं देखता है। स्पष्ट है कि चीन के लिए यह अच्छी खबर नहीं है!

पश्चिमी मीडिया में रूस और चीन को अक्सर एक चश्मे से देखे जाने का चलन रहा है। अक्सर चीन और रूस के बीच संभावित “सैन्य गठबंधन” की बातें की जाती हैं। हालांकि, बीते दिनों एक बयान देते हुए रूसी राष्ट्रपति ने यह साफ कहा था कि अभी चीन और रूस के बीच किसी प्रकार के सैन्य गठबंधन की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके जवाब में बौखलाई चीनी मीडिया को भी यही कहना पड़ा कि उन्हें भी रूस के साथ किसी प्रकार के सैन्य गठबंधन की अभी कोई ज़रूरत नहीं है। चीन स्वयं इस बात को मानता है कि रूस चीन का साझेदार है, साथी नहीं।

Quad चीन को घेरता जा रहा है और ऐसे में चीन को उम्मीद थी कि उसे रूस से साथ ज़रूर मिलेगा।लेकिन चीन की उम्मीदों के ठीक उलट पिछले कुछ महीनों में रूस Quad के साथ संबंध बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है। उदाहरण के लिए भारत-चीन विवाद के दौरान रूस ने चीन को किसी भी प्रकार की कूटनीतिक सहायता देने से साफ मना कर दिया। इसी के साथ विवाद के दौरान रूस ने भारत की नेवी के साथ सैन्य अभ्यास कर चीन को एक स्पष्ट संदेश भेजा। दशकों से भारत और रूस के संबंध बेहद मजबूत रहे हैं और अब भारत के इन्हीं रिश्तों के बल पर रूस भी Quad से अपनी नजदीकी बढ़ा रहा है।

इसी प्रकार रूस जापान के साथ भी नज़दीकियाँ बढ़ा रहा है। रूस अपने Far East में चीनी प्रभाव को कम करने के लिए जापान और भारत जैसे देशों को आमंत्रित कर रहा है। भारत और जापान भी रूस में निवेश करने को लेकर अपनी रूचि दिखा चुके हैं। भारत, जापान और रूस को करीब लाकर चीन के लिए और मुश्किलें खड़ी करना चाहता है। इसी प्रकार रूस अमेरिका के साथ भी रिश्ते ठीक करने की ओर आगे बढ़ रहा है। हाल ही में जब Democrats द्वारा रूस पर अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए गए थे, तो रूस ने अमेरिका के साथ “Non-Interference Pact” पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव पेश किया था। Quad के चौथे देश ऑस्ट्रेलिया के साथ भी रूस के सामान्य संबंध हैं।

इन तथ्यों पर गौर किया जाये तो रूस Quad देशों के साथ बेहतर तालमेल रखने के पक्ष में है क्योंकि उसे Quad से कोई खतरा महसूस नहीं होता है। ऐसे में Quad और रूस का यह तालमेल चीन के लिए बड़ी मुसीबतें खड़ी कर सकता है। रूस खुद चीन को एक बड़े खतरे के रूप में देखता है और ऐसे में Arctic और अपने Far East में चीन के वर्चस्व को बढ़ने से रोकने के लिए रूस Quad का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है। रूस भविष्य में Quad के साथ मिलकर काम करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। चीन इस सच्चाई को जितना जल्दी स्वीकार कर ले, उसके लिए उतना ही अच्छा रहेगा!

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