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अलीगढ़ का आमिर बना अमीर, रोचक है सफाईकर्मी के सक्सेस की कहानी

एक इंजीनियर जो इस दुनिया में नई नई तकनीकों को बनाने के लिए जाना जाता है. सोचिये वो इंजीनियर सफाईकर्मी का काम कर रहा था. उसकी किस्मत कब चमकती पता नहीं पर वो फर्श को रोज चमकाता. खुद की किस्मत पर धूल की परत चढ़ी हुई थी, और वो फर्श को शीशे की तरह चमकाता. हर शाम उसकी यूँ ही बीत रही थी, सुबह वो अखबार बांटने के लिए निकल जाता, ख़बरों को सही समय पर सबके पास पहुंचाता, पर उसे खुद ये मालुम नहीं था की खुदा उसकी खबर कब देखेगा. कब उसकी मुरादें पूरी होंगी. यही सब सोचते हुए उसकी ज़िन्दगी का एक एक पल बीतते जा रहा था. आँखों में बस एक सपना लिए जी रहा था की कब उसकी अपनी कम्पनी होगी. ये कहानी उन लोगों के लिए भी है जो हार मान जाते हैं या फिर अपने प्रोफेशन से समझौता कर बैठते हैं. समय आया और वक़्त का पहिया घूमा. कभी एक नौकरी के लिए तरसने वाले इस शख्स के अंदर सैंकड़ों लोग काम करते हैं.

ये कहानी है उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में मध्यमवर्गीय परिवार जन्मे आमिर कुतुब की. जिसके हौंसले क़ुतुब मीनार की तरह ऊँचे थे. और आमिर अमीर भी बन गया. यूँ तो आमिर का मन पढ़ाई में बिलकुल भी नहीं लिखता था फिर भी मन मारकर उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. पिता की इक्छा थी की बेटा इंजीनियर या डॉक्टर बने. इसलिए आमिर ने भी बी टेक में एडमिशन ले लिया. आमिर के पिता सरकारी नौकरी से रिटायर हैं और माँ गृहणी. पढ़ाई में मन नहीं लगता था इसलिए एक बार टीचर ने ये तक कह दिया की तुमसे कुछ नहीं हो पायेगा. आज अगर वो टीचर ये खबर देख रही होंगी तो वो सोच रही होंगी. जिसको उन्होंने खोता सिक्का समझा था वो तो सोना निकला.

खैर पढ़ाई पूरी हुई और आमिर को पहली जॉब भी मिली. लेकिन आमिर को ये जॉब पसंद नहीं आया और वो दिल्ली चले आये. नए अरमानों के साथ राजधानी पहुंचे. यहां उन्होंने होंडा में कुछ समय के लिए काम किया. पर काम में मन नहीं लग रहा था, बार अपना बिज़नेस शुरू करने के सपने आते. मन नहीं भरा तो नौकरी छोड़ी फ्री लांस काम करने लगे. बता दें आमिर वेबसाइट डिज़ाइन करते हैं. उनके कुछ क्लाइंट्स ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी थे.

इसलिए आमिर ने सोचा क्यों न काम को बढाए जाए. अंदर से चिंगारी सुलग ही रही थी की एक क्लाइंट ने हवा और दे दी और कहा कि आप ऑस्ट्रेलिया में आकर कंपनी क्यों नहीं शुरू करते. पता चला की वो स्टूडेंट वीजा पर ही ऑस्ट्रेलिया जा सकते थे. इसलिए ऑस्ट्रेलिया में एमबीए में दाखिला भी ले लिया. पैसों की कमी हुई तो नौकरी की तलाश में निकल पड़े. सैंकड़ों कंपनियों में ट्राई किया पर नौकरी. नौकरी तो बरेली के झुमके की तरह हो चुकी थी, मिलने का नाम ही नहीं ले रही थी.

मजबूरी में एयरपोर्ट पर सफाईकर्मी की जॉब की और सुबह अखबार बांटने का भी काम किया. इन सबके बाद वो सटिस्फैक्शन नहीं मिल रहा था और ना ही टाइम. किसी तरह करके एक गैराज में नौकरी मिली. बस इसी समय किस्मत ने करवट ली. एक दिन काम करते हुए एक व्यक्ति मिला. जिससे आमिर ने अपने काम के बारे में बताया. एक प्यासे को कुआं मिल चूका था, बस उसे पानी निकालना था. और आमिर ने वो करके दिखा दिया. आमिर ने ऐसा सिस्टम तैयार करके दिया जिससे उस शख्स को हज़ारों डॉलर को फायदा होने लगा. उस शख्स ने आमिर को और भी कई क्लाइंट दिए. फिर क्या था, आमिर की किस्मत चमकी और उसने आपा स्टार्टअप किया. वेबसाइट डिजाइनिंग का उनका काम चलने लगा. और आज आमिर की कम्पनी में 100 परमानेंट और 300 अस्थायी कर्मचारी काम करते हैं. कंपनी का टर्न ओवर 10 करोड़ का है.

तो आप भी उम्मीदों पर कायम न रहे, मेहनत करते हैं, जाने कब क्या मिल जाए. कहते हैं जब किस्मत थी तो मैं सोता रहा, आज नहीं हैं तो मैं रोता रहा. तो जागिये और रोने से अच्छा है मेहनत कीजिये.

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