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आ जाती प्रलय : चीन पर गिरने वाला था सोवियत संघ का परमाणु बम, लेकिन तभी..

रूस और चीन के संबंध वर्तमान में काफी मजबूत माने जाते हैं। लेकिन, एक समय ऐसा भी था जब दोनों देश एक दूसरे के खून के प्यासे थे। इतना ही नहीं, रूस ने तो चीन को सबक सिखाने के लिए परमाणु मिसाइलें दागने की तैयारी कर ली थी। इसका खुलासा हाल में ही अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है।

पूरी दुनिया पर मंडरा रहा था परमाणु युद्ध का खतरा
शीत युद्ध के समय एक समय ऐसा भी आया था जब पूरी दुनिया पर परमाणु हमले का खतरा मंडराने लगा था। उस समय रूस के राष्ट्रपति निकिता ख्रुश्चेव ने फिदेल कास्त्रो के अनुरोध पर अपनी परमाणु मिसाइलों को क्यूबा में तैनात कर दिया था। उस समय तक कम्युनिस्ट शासित देशों में सबसे बड़ा और शक्तिशाली होने के कारण रूस का समर्थन चीन भी करता था।

चीन के परमाणु परीक्षण के बाद बदलीं परिस्थितियां
लेकिन, 16 अक्टूबर 1964 को चीन के पहले परमाणु परीक्षण के बाद से परिस्थितियां बदलने लगी थीं। चीन ने इस परीक्षण को प्रोजक्ट 596 (Project 596) का नाम दिया था। इस सफल परीक्षण के बाद चीन दुनिया का पांचवा ऐसा देश बन गया था जिसके पास परमाणु हथियार की क्षमता थी। उस समय चीन और रूस के बीच सीमा संघर्ष चरम पर था।

1969 में सात महीनों तक चला था अघोषित युद्ध
1965 से चीन-रूस की सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच सैन्य झड़पें बढ़ने लगी थीं। इन झड़पों में दोनों देशों के कई सैनिक हताहत भी हुए थे। जिसके बाद संभावित युद्ध की आशंका से चीन और रूस ने सीमा पर सैनिकों और हथियारों की तैनाती को भी बढ़ा दिया था। 1969 में दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि मार्च से सितंबर तक दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ अघोषित युद्ध तक लड़ लिया।

सीआईए की रिपोर्ट से खुली चीनी चाल की पोल
रूस को उम्मीद थी कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में जारी कलह उसकी मददगार बनेगी। उस समय माओत्से तुंग और लियू शाओकी के बीच चीन में खींचतान मची हुई थी। हालांकिस रूस को इस विवाद का कोई फायदा नहीं मिला। सीआईए की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2 मार्च, 1969 को चीनी सैनिकों को पेइचिंग से सीधा आदेश मिला कि वे जेनबबाओ द्वीप पर तैनात रूस के केजीबी बॉर्डर ट्रूप्स पर हमला करें।

चीन ने घात लगाकर रूसी सैनिकों पर किया था हमला

यह क्षेत्र रूस के प्रिमोर्स्की क्राय और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के हेइलोंगजियांग प्रांत के बीच उस्सुरी नदी पर स्थित था। जिसके बाद 300 से ज्यादा चीनी सैनिकों ने रूस के सैनिकों पर हमला कर उन्हें मार डाला। माओत्से तुंग को यह लगता था कि रूस की सेना जवाबी कार्रवाई नहीं करेगी। इस क्षेत्र रेड आर्मी के जवानों की व्यापक तैनाती के बावजूद वह छोटे स्तर पर ही कोई कार्रवाई कर सकती है।

रूस ने तैनात की अपनी परमाणु मिसाइलें
सीआईए की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की इस कार्रवाई से रूस इतना भड़क गया कि उसने स्ट्रैटजिक मिसाइल फोर्स को हाई अलर्ट पर रख दिया। उस समय रूस की परमाणु मिसाइलें 1500 किलोमीटर की दूरी पर 15 मिनट से भी कम समय में हमला करने को तैयार थीं। हालांकि, रूस ने दूसरा विकल्प अपनाते हुए केजीबी के एलीट बॉर्ड गार्ड्स की टुकड़ी से चीनी सैनिकों पर हमला किया। जिसमें चीनी पक्ष के सैकड़ों जवान मारे गए।

चीन को उठाना पड़ा भारी नुकसान
रूस की जवाबी कार्रवाई से चीन को इतना डर बैठ गया कि वह मास्को से बार बार बातचीत का अनुरोध करने लगा। पैटरसन स्कूल ऑफ डिप्लोमेसी के सहायक प्रोफेसर डॉ रॉबर्ट फार्ले ने भी दावा किया है कि इस तनाव के दौरान चीन को रूस के मुकाबले भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

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